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राजस्थान में कांग्रेस विधायक जैसलमेर शिफ्ट: एयरपोर्ट पर गहलोत बोले- अमित शाह जी आपको क्या हो गया? आप रात-दिन सरकार गिराने की सोचते हैं  


डिजिटल डेस्क, जयपुर। राजस्थान में खरीद-फरोख्त के आरोपों के बीच कांग्रेस विधायक शुक्रवार को अगले 14 दिनों के लिए जयपुर से जैसलमेर ले जाए गए हैं। राजस्थान विधानसभा का सत्र 14 अगस्त को बुलाया गया है और तब तक विधायक जैसलमेर में रिसॉर्ट में रहेंगे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ ये विधायक कुल पांच उड़ानों से जैसलमेर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह दिन-रात सरकारें गिराने के बारे में ही सोचते हैं। वहीं राजस्थान कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्होंने 24 जुलाई को आए राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें पायलट खेमे के विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही स्थगित रखने को कहा गया है। इससे पहले विधानसभा के स्पीकर सीपी जोशी भी इसे अपने अधिकार में दखल बताते हुए याचिका दायर कर चुके हैं।

रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री गहलोत ने हवाई अड्डे पर कहा, हमारे विधायक काफी दिन से यहां बैठे हुए थे, मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे थे, इसलिए हमने उन्हें नयी जगह ले जाने का सोचा। इससे उनपर दबाव कम होगा, ज्यादा दूर भी नहीं है, इसलिए हम जा रहे हैं। राज्य में मौजूदा राजनीतिक रस्साकशी व उठापटक शुरू होने के बाद से गहलोत सरकार समर्थक कांग्रेस और अन्य दलों के विधायक 13 जुलाई से यहां शहर के बाहर एक होटल में रुके हुए थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार विधायकों सहित 100 से अधिक लोग जैसलमेर पहुंचे हैं।

राजस्थान में खरीद-फरोख्त की दरें बढ़ गई हैं: गहलोत
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों को संबोधित किया और कहा कि बसपा के विधायकों का विलय गलत नहीं हो सकता। राज्यसभा में तेदेपा के चार सांसद भी सत्ताधारी भाजपा के साथ विलय कर लिए थे। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि 14 अगस्त को विधानसभा सत्र शुरू होने के बाद वह विश्वासमत हासिल करना चाहेंगे। गहलोत ने कहा कि राजस्थान में खरीद-फरोख्त की दरें बढ़ गई हैं, क्योंकि विधानसभा सत्र की तिथि तय होने के बाद नई दरें घोषित की गई हैं। उन्होंने कहा, विधानसभा सत्र की घोषणा के बाद खरीद-फरोख्त की दरें बढ़ गई हैं। पहले विधायकों के लिए पहली किश्त 10 करोड़ रुपये थी और दूसरी किश्त 15 करोड़ रुपये थी। लेकिन अब यह असीमित हो गई है और हर कोई जानता है कि इस खरीद-फरोख्त में कौन शामिल है।

मायावती पर भी निशाना साधा
गहलोत ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती पर भी निशाना साधा और भाजपा का साथ देने का आरोप लगाया। गहलोत ने असंतुष्ट विधायकों से भी फ्लोर टेस्ट के लिए आग्रह किया और कहा कि चूंकि उन्होंने कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीता है, लिहाजा यह उनका कर्तव्य बनता है कि वे सदन में पार्टी के साथ खड़ा रहें।

कांग्रेस के मुख्य सचेतक पहुंचे SC, हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती
राजस्थान कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्होंने 24 जुलाई को आए राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें पायलट खेमे के विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही स्थगित रखने को कहा था। महेश जोशी ने अपील में कहा कि ये बागी विधायक राज्य में अशोक गहलोत सरकार को गिराने के नापाक प्रयासों में गंभीरतम दलबदल में संलिप्त थे। अधिवक्ता वरुण चोपड़ा के माध्यम से दायर इस याचिका में महेश जोशी ने कहा है कि ‘किहोतो होलोहान प्रकरण’ में 1992 में शीर्ष अदालत के फैसले के आलोक में उच्च न्यायालय का आदेश पहली नजर में ही असंवैधानिक और गैरकानूनी है।

टाइम लाइन:
-14 जुलाई: सचिन पायलट सहित 19 विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष ने अयोग्यता का नोटिस दिया और 17 जुलाई को दोपहर 1:30 बजे तक जवाब मांगा।

-16 जुलाई: सभी 19 विधायकों ने नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया। उधर, व्हिप चीफ महेश जोशी ने सरकार की तरफ से कैविएट लगा दी कि कोई भी फैसला किए जाने से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए।

-17 जुलाई: हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनवाई की और दो जजों की बेंच में मामला भेजा। इस बेंच ने 18 जुलाई को सुनवाई तय की।

-18 जुलाई: हाईकोर्ट ने स्पीकर से कहा कि वे 21 जुलाई तक नोटिस पर कार्रवाई नहीं करें और अगली सुनवाई 20 जुलाई तय की। 

-20 जुलाई: हाईकोर्ट ने बहस पूरी न हो पाने के कारण कहा- 21 जुलाई को भी सुनवाई होगी।

-21 जुलाई: हाईकोर्ट ने 24 जुलाई के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया। स्पीकर को भी तब तक के लिए कोई निर्णय नहीं करने के लिए कहा।

-22 जुलाई: स्पीकर सीपी जोशी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। 

-23 जुलाई: कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। शाम को पायलट खेमे ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की।

-24 जुलाई: हाईकोर्ट ने विधायकों की अयोग्यता को नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका को सही मानते हुए विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस पर रोक लगा दी। कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने को कहा है। इस मामले की सुनवाई आगे जारी रहेगी। 

-27 जुलाई: राजस्थान विधानसभा स्पीकर ने 19 विधायकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस ली।

-29 जुलाई: स्पीकर ने फिर से सचिन पायलट समेत 19 बागी विधायकों को अयोग्य करार देने लिए जारी नोटिस पर यथा स्थिति बनाए रखने के राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

-30 जुलाई: चुनाव के तुरंत बाद बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए 6 विधायकों और स्पीकर को राजस्थान हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया।

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।