comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

सरकार विरोधी गठबंधन तोड़ने के लिए मेरे पति को गिरफ्तार किया गया : मरियम

October 20th, 2020 11:30 IST
 सरकार विरोधी गठबंधन तोड़ने के लिए मेरे पति को गिरफ्तार किया गया : मरियम

हाईलाइट

  • सरकार विरोधी गठबंधन तोड़ने के लिए मेरे पति को गिरफ्तार किया गया : मरियम

कराची, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन की उपाध्यक्ष मरियम नवाज ने दावा किया है कि उनके पति और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दामाद रिटायर्ड कैप्टन मोहम्मद सफदर को गिरफ्तार करने के पीछे का मकसद सरकार विरोधी गठबंधन को तोड़ना है।

द ट्रिब्यून के मुताबिक, मरियम ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, मेरे परिवार और मेरे करीबी लोगों को निशाना बनाकर मुझे ब्लैकमेल मत करें।

उनकी टिप्पणी सोमवार सुबह तड़के यह ट्वीट करने के बाद आई कि सफदर को कराची में एक होटल से गिरफ्तार किया गया था।

उन्होंने दावा किया कि पुलिस उनके पति को गिरफ्तार करने तब पहुंच गई जब वह सो रही थीं।

डॉन न्यूज के मुताबिक, पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के दूसरे पावर शो से पहले रविवार को सफदर द्वारा मुहम्मद अली जिन्ना की मकबरा पर सरकार विरोधी नारे लगाए जाने के एक दिन बाद उनकी गिरफ्तारी हुई।

मकबरे की पवित्रता का उल्लंघन करने के लिए मरियम नवाज, सफदर और 200 अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

हालांकि, उन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था।

संवाददाता सम्मेलन में मरियम नवाज ने आगे कहा कि संघीय सरकार ऐसा दिखाने की कोशिश कर रही थी कि गिरफ्तारी के पीछे सिंध सरकार थी, लेकिन बिलावल (भुट्टो-जरदारी) ने मुझे फोन किया और वह बहुत गुस्से में थे।

सिंध के मुख्यमंत्री ने भी मुझे फोन किया और कहा कि उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि मेरे साथ ऐसा कुछ होगा।

मरियम ने कहा, मैंने कभी भी एक पल के लिए भी नहीं सोचा था कि पीपीपी इसके पीछे है .. उन्होंने (पीटीआई) सोचा था कि वे हमारे बीच फूट डाल सकते हैं। हमें पता है कि इस तरह की चीजें होंगी, हम भी तैयार हैं।

पीएमएल-एन की उपाध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि सफदर को पिछले कुछ समय से मौत की धमकी मिल रही हैं, जो कि उच्च स्च्तर पर बैठे कुछ लोगों से आ रही है।

उन्होंने कहा, अगर वे मानते हैं कि धमकी नवाज शरीफ या मरियम नवाज को चुप करा सकती है, अगर वे मानते हैं कि वो पीडीएम में दरार पैदा कर सकते हैं या इसकी एकता को कमजोर कर सकते हैं, तो वे गलत हैं।

वीएवी-एसकेपी

कमेंट करें
rf4ON
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।