दैनिक भास्कर हिंदी: सामना: दिल्ली हिंसा पर शिवसेना ने उठाए सवाल, पूछा- कहां थे अमित शाह?

February 28th, 2020

डिजिटल डेस्क, मुंबई। दिल्ली हिंसा को लेकर शिवसेना (Shivsena) ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) से सवाल किया है कि वे कहां थे? क्या कर रहे थे। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना (Saamana) के संपादकीय में केंद्र सरकार को आढ़े हाथों लिया है। सामना में लिखा है कि दिल्ली के दंगों में अबतक 38 लोगों की बलि चढ़ गई और सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। मान लें केंद्र में कांग्रेस अथवा दूसरे गठबंधन की सरकार होती तथा विरोधी सीट पर बीजेपी का महामंडल होता तो दंगों के लिए गृहमंत्री का इस्तीफा मांगा गया होता। 

गृहमंत्री से मांगा जाता इस्तीफा
सामना में लिखा है, 'गृहमंत्री के इस्तीफे के लिए दिल्ली में मोर्चा व घेराव का आयोजन किया गया होता। राष्ट्रपति भवन पर धावा बोला गया होता। गृहमंत्री को नाकाम ठहराकर इस्तीफा चाहिए ऐसी मांग की गई होती। अब ऐसे नहीं होगा क्योंकि बीजेपी सत्ता में है और विपक्ष कमजोर है। फिर भी सोनिया गांधी ने गृहमंत्री का इस्तीफा मांगा है। देश की राजधानी में 38 लोग मागे गए तथा केंद्र का आधा मंत्रिमंडल उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को सिर्फ नमस्ते साहेब कहने के लिए गया था।'

पीएम मोदी ने तीन दिन बाद शांति का आह्वान किया
सामना में लिखा है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने लगभग तीन दिनों बाद शांति बनाए रखना का आह्वान किया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल चौथे दिन अपने सहयोगियों के साथ दिल्ली की सड़कों पर लोगों से चर्चा करते दिखे, इससे क्या होगा? जो होना था वो नुकसान पहले ही हो चुका है। सवाल ये है कि इस दौर में हमारे गृहमंत्री के दर्शन क्यों नहीं हुए? विधानसभा चुनाव में अमित शाह गृहमंत्री होते हुए भी घर-घर प्रचार पत्रक बांटते घूम रहे थे। इस प्रचार कार्य के लिए उन्होंने भरपूर समय निकाला। परंतु जब पूरी दिल्ली हिंसा की आग में जल रही थी तब यही गृहमंत्री कहीं दिखाई नहीं दिए। 

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कानून-व्यवस्था धराशायी
शिवसेना ने सामना में लिखा है, दिल्ली की कानून-व्यवस्था स्पष्ट रूप से धराशायी हो गई है। 1984 के दंगों की तरह भयंकर हालात निर्माण न हो ऐसी टिप्पणी न्यायाधीश मुरलीधर ने की। न्यायाधीश मुरलीधर ने जनता के मन के आक्रोश को एक आवाज दे दी। सभी आम नागरिकों को जेड सुरक्षा देने का वक्त आ गया है। ऐसी टिप्पणी मुरलीधर ने की और अगले 24 घंटों में जस्टिस के तबादले का आदेश राष्ट्रपति भवन से निकल गया। सरकार ने न्यायालय द्वारा व्यक्त किए गए सत्य को मार दिया। 

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