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  • The solution of the Tigadmi government trapped in Shinde's clutches will emerge from the triangle circle of Governor, Speaker and Supreme Court

फूट-टूट के बाद बहुमत की बारी: राज्यपाल,स्पीकर और सुप्रीम कोर्ट के त्रिकोण घेरे से निकलेगा शिंदे के शिकंजे में फंसी तिकड़ी सरकार का हल

June 23rd, 2022

हाईलाइट

  • शिवसेना, शिंदे, सरकार पर फैसला

डिजिटल डेस्क,मुंबई, आनंद जोनवार। शिवसेना के बागी एकनाथ शिंदे नहीं माने तो महाराष्ट्र में जारी सियासी घमासान का हल अब राज्यपाल, स्पीकर और सुप्रीम कोर्ट के त्रिकोणीय घेरे से निकल सकता हैं। 

क्रॉस वोटिंग से शुरु

राज्यसभा चुनाव और विधान परिषद चुनाव में  क्रॉस वोटिंग से शुरु हुआ बागी बनने का सिलसिला पहले सूरत के होटल में ठहरा फिर रात होते होते असम की वादियों में गुवाहाटी पहुंच गया। गुवाहाटी के रैडिसन होटल में रचे जा रहे महाराष्ट्र सियासत के संकटीय ड्रामा में ममता बनर्जी की टीएमसी देखते देखते  ही कूद पड़ी।

बागी बने एकनाथ

शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की तिकड़ी  सरकार से खफा होकर बागी बने एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के सामने चुनौती ऐसी रखी जिसके पालन में शिवसेना मिटना पंसद कर रही हैं। शिंदे की शर्त के मुताबिक एकनाथ हिंदुत्व के धार्मिक  पालने में एक साथ खेलने वाली बीजेपी और शिवसेना को एक साथ आने को कह रहे हैं, हालांकि शिवसेना के लिए शिंदे की शर्त कोई नई नहीं है,लेकिन सियासत के गणितीय गुणा भाग में शिवसेना इसे धोखा और कमजोर, झुकना मान सकती हैं।

शिवसेना और उद्धव कुर्सी  के लिए  खतरा

शर्त  को सीएम उद्धव का न मानना शिवसेना और उद्धव कुर्सी दोनों के लिए  खतरा हैं। लेकिन ये खतरा तभी तक है जब तक की एकनाथ के साथ शिवसेना के बागी 37 विधायक नहीं हो जाते। यदि शिवसेना के 37 से कम विधायक शिंदे के साथ हैं तो एमवीए सरकार को कोई गंभीर खतरा नहीं हैं। ऐसे में उल्टे शिंदे के साथ बागी विधायकों की नेतागिरी मुश्किल में पड़ सकती हैं, और उन्हें अपनी सदस्यता तक गंवानी पड़ सकती हैं। हालांकि ये सब फ्लोर टेस्ट के दौरान और विधानसभा सदन प्रमुख के विवेक पर निर्भर रहेगा। 

सदन में होगा बहुमत का फैसला

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के मुताबिक बहुमत का फैसला राजभवन की बजाय सदन में होगा। बहुमत की जरूरत दो तरीके से पड़ती है, अगर अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है तो अल्पमत की सरकार को अपनी सरकार बचाने के लिए बहुमत साबित करना होगा है। दूसरा, अगर कोई सरकार बनाने का दावा कर रहा है तो उसे भी बहुमत साबित करना होता है।

37 नहीं तो बागियों को खतरा

यदि स्पीकर शिंदे के साथ मौजूद विधायकों की सदस्यता को रद्द करता हैं, तो बागी विधायकों के पास संख्या बल के आधार पर दो ऑप्शन रहेंगे। पहला यदि उनकी संख्या दो तिहाई है तो वो शिवसेना पार्टी पर कब्जे को लेकर निर्वाचन आयोग की शरण में जा सकते है, सुप्रीम कोर्ट में भी जा सकते हैं। दो  तिहाई होने पर ना तो उनकी सदन से सदस्यता रद्द होगी उल्टा शिवसेना के पूरी तरह से अपने कब्जे में ले सकते है,यहां उनके पास एक अन्य विकल्प होगा किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। या अपनी एक अलग नई पार्टी बना सकते हैं। दो तिहाई से कम होने पर उनकी सदन सदस्यता छीन सकती हैं। इसे लेकर वो सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं, ऐसे में एससी स्पीकर और राज्यपाल पर फैसला छोड़ सकता हैं। ऐसी स्थिति में राज्यपाल मौजूदा सरकार को लेकर सदन में बहुमत साबित कराने के लिए फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश  दे सकता हैं।

बीजेपी को बहुमत साबित करने का मिल सकता हैं मौका

सदन में यदि मौजूदा सरकार बहुमत साबित करने में फेल होती है। तब राज्यपाल दूसरी किसी बड़ी पार्टी को बहुमत साबित करने का मौका दे सकती हैं। जिसका बहुमत सदन में साबित हो जाएगा,उसकी सरकार बन जाएगी। यदि किसी भी दल का बहुमत साबित नहीं हुआ तब राज्यपाल राष्ट्रपति शासन की मांग कर सकता हैं। 

किसी दल के पास बहुमत नहीं तो राष्ट्रपति शासन तय

यदि शिंदे के बागी विधायकों को एक नए दल के तौर पर मान्यता नहीं मिलती है और अगर उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाए। सत्ता का सपना देख रहे देवेंद्र फडणवीस और  बीजेपी के लिए ये सबसे बड़ा रोड़ा होगा। अगर शिंदे के बागी विधायकों  के आधार पर बीजेपी को सरकार बनाने का मौका मिलता है, तो फिर नई सरकार को सदन में बहुमत साबित करना होगा। नई सरकार बनने के बाद अगर स्पीकर उनके पक्ष में नहीं है तो स्पीकर को बदला जाएगा। इस पर भी विवाद होने की संभावना है। इस परिस्थिति में भी मामला कोर्ट में जाएगा।

सुको पहुंचा मामला

महाराष्ट्र में सियासी हलचल का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। खबरों के मुताबिक, मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष जया ठाकुर ने इस सियासी हंगामे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने याचिका दायर कर कहा है कि दलबदल कानून के तहत शिवसेना के बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। जया ठाकुर ने अपनी याचिका में अदालत से बागी विधायकों के चुनाव लड़ने से पांच साल तक रोक लगाने की मांग की है। 

विधानसभा भंग के संकेत

शिवसेना नेता संजय राउत ने राज्य में मौजूदा राजनीतिक स्थिति के बीच महाराष्ट्र विधानसभा भंग करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा: "महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक संकट विधानसभा भंग करने की ओर बढ़ रहा है। अगर ऐसा होता है तो महाराष्ट्र में लग सकता हैं राष्ट्रपति शासन, और होंगे मध्यावधि चुनाव। हालांकि ये गवर्नर के ऊपर रहेगा  कि वह विधानसभा भंग करते है या नहीं। 

 

 

 

 


 

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