विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड: विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड: आरोपी की जमानत रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीबीआई

July 25th, 2022

हाईलाइट

  • जमानत रद्द करने के पक्ष में सीबीआई की दलीलों से अदालत आश्वस्त नहीं हुई

डिजिटल डेस्क, अमरावती। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री वाई. एस. विवेकानंद रेड्डी की हत्या के मुख्य संदिग्ध येरा गंगी रेड्डी की जमानत रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। जांच एजेंसी ने एक निचली अदालत द्वारा गंगी रेड्डी को दी गई जमानत को रद्द करने की उसकी याचिका को खारिज करने के आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की है।

हाईकोर्ट ने मार्च में सीबीआई की याचिका खारिज कर दी थी। केंद्रीय एजेंसी चाहती थी कि इस आधार पर जमानत रद्द की जाए कि गंगी रेड्डी कथित तौर पर मामले में कुछ गवाहों को धमका रहा है। एकल न्यायाधीश की पीठ ने सीबीआई को ऐसे सबूत दिखाने के लिए कहा था, जिससे साबित हो कि गंगी रेड्डी ने उन शर्तों का उल्लंघन किया है, जिनके अधीन उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया है।

सीबीआई ने तर्क दिया था कि पुलिवेंदुला के तत्कालीन निरीक्षक जे. शंकरैया और दो अन्य शुरू में मजिस्ट्रेट के सामने बयान देने के लिए सहमत हो गए थे, लेकिन बाद में मुकर गए। इसने अदालत को यह भी बताया था कि मामले में सरकारी गवाह बने शेख दस्तागिरी ने कहा कि हत्या में शामिल लोगों ने उन्हें धमकी दी है।

जमानत रद्द करने के पक्ष में सीबीआई की दलीलों से अदालत आश्वस्त नहीं हुई। न्यायाधीश ने पाया कि एजेंसी यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत प्रदान करने में विफल रही कि गंगी रेड्डी मामले में प्रमुख गवाहों को धमका रहा है या प्रभावित कर रहा है। मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी के चाचा विवेकानंद रेड्डी की हत्या 15 मार्च, 2019 को कडप्पा स्थित उनके आवास पर की गई थी।

68 वर्षीय पूर्व राज्य मंत्री अपने घर पर अकेले थे और उसी समय अज्ञात लोगों ने घर में घुसकर उनकी हत्या कर दी थी। हत्या विवेकानंद रेड्डी द्वारा कडप्पा में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के चुनाव अभियान की शुरुआत करने से कुछ घंटे पहले ही हुई थी। हालांकि, तीन विशेष जांच टीमों (एसआईटी) ने मामले की जांच की है, लेकिन वे रहस्य को सुलझाने में विफल रहे हैं।

विवेकानंद रेड्डी की बेटी सुनीता की याचिका पर सुनवाई करते हुए आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई ने 2020 में जांच अपने हाथ में ली थी। सुनीता ने हत्या के लिए कुछ रिश्तेदारों पर संदेह जताया था। सीबीआई ने 26 अक्टूबर, 2021 को हत्या के मामले में आरोप पत्र दायर किया और 31 जनवरी को पूरक आरोप पत्र (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) दायर किया गया।

 

 (आईएएनएस)

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