Special Parliament Session 2026: क्या सदन का 'नंबर गेम' है राहुल गांधी के कॉन्फिडेंस का कारण? कहा बिल पास नहीं होने देंगे, जानिए कितने नंबरों मात खा रही केंद्र सरकार

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकतंत्र के इतिहास में सबसे बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिसको लेकर लोकसभा में भारत सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। बता दें कि सरकार ने सदन के पटल पर तीन विधेयक 16 अप्रैल को रखे थे, इसके लिए 18 घंटों के लिए चर्चा तय की गई थी, जिसके दूसरे दिन भी सरकार और विपक्ष के बीच हंगामा देखने को मिला है। वहीं, इन्हीं तीनों बिलों को लागू करने के लिए सरकार के पास पूर्ण बहुमत नहीं दिखाई दे रहा है। शायद इसलिए राहुल गांधी ने पूरे कॉन्फिडेंस के साथ सदन में कहा है कि वो बिल को सदन में पास नहीं होने देंगे। चलिए समझते हैं बिल पास कराने के लिए कितने वोट्स की जरूरत है।
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इन तीनों बिल पर बहस
केंद्र सरकार ने सदन के पटल पर बीते गुरुवार को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026 रखे। इन्हीं पर आज भी लोकसभा में चर्चा जारी है। केंद्र सरकार का इन तीनों बिलों को लेकर लक्ष्य है कि साल 2029 के लोकसभा चुनाव तक इन्हें लागू करना है। अगर यह बिल लागू हो जाते हैं तो लोकसभा की मौजूदा सीटें 543 से बढ़कर 850 तक होने के प्रावधान और महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण के लिए रास्ता साफ हो जाएगा। इसके लिए जनगणना और परिसीमन की प्रोसेस बहुत अहम मानी जा रही है।
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क्या है बिल पास कराने का नंबर गेम?
इस बीच विपक्ष के सूत्रों ने बताया कि इस बिल को सदन से पास कराने के लिए कम से कम 345 सांसदों का समर्थन होना जरूरी है। लेकिन उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में सरकार के पास करीब 302 सांसदों का ही सपोर्ट है। इस वजह से इन्हें लागू कराने के लिए सरकार के पास जरूरी आंकड़ा कम है। सरकार के पास कम बहुमत होने की वजह से आने वाले समय में राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।
अनुप्रिया पटेल ने क्या कहा?
अपना दल (एस) की सांसद अनुप्रिया पटेल ने इन तीनों बिलों का सपोर्ट किया है और इसके साथ ही कहा कि लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी ज्यादा नहीं है। उन्होंने आगे बताया कि आज भी सदन में सिर्फ 14 प्रतिशत महिलाएं हैं, वो भी निराशाजनक स्थिति में है, जिसे बदलने की बहुत जरूरी है।
Created On :   17 April 2026 5:43 PM IST










