विधानसभा चुनाव 2027: अब्दुल को नेता बनाने वाले बयान पर घिरे ओवैसी, कांग्रेस ने पूछा, तेलंगाना में अब्दुल का क्या हुआ?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी मुस्लिम वोटरों को एकजुट करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि नेहरू-गांधी परिवार या यादवों पर निर्भर रहना छोड़कर अपने समुदाय के भीतर से ही नेता तैयार करें। ओवैसी के इसी बयान को लेकर कांग्रेस ने उन पर आरोप लगाया कि वे ऐसा फॉर्मूला दूसरों को बता रहे हैं, जिसे उन्होंने खुद अपने राज्य में कभी लागू नहीं किया।
यूपी विधानसभा चुनाव में ओवैसी उन सीटों पर जनसभा कर रहे हैं, जहां मुसलमान निर्णायक की भूमिका में हैं। इनमें से अधिकांश सीटें सपा के कब्जे में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी के इस कदम से कांग्रेस-सपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए कांग्रेस अब फ्रंटफुट पर आकर ओवैसी के बयान का काउंटर कर रही है।
क्या है कांग्रेस का आरोप?
कांग्रेस ने ओवैसी पर तेलंगाना में मुसलमानों के प्रतिनिधित्व को सीमित करने का आरोप लगाया है। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में कांग्रेस के हैदराबाद लोकसभा सीट के प्रभारी मोहम्मद वलीउल्लाह समीर के हवाले से कहा, "ओवैसी एक ऐसा नेतृत्व फॉर्मूला बता रहे हैं, जिसे उन्होंने खुद हैदराबाद या तेलंगाना में कभी लागू नहीं किया। ओवैसी के मुस्लिम नेतृत्व वाले बयान पर कांग्रेस ने पूछा कि "तेलंगाना में दशकों तक राजनीतिक दबदबा रहने के बावजूद AIMIM ने अपने पारंपरिक गढ़ों के बाहर असल में कितने स्वतंत्र मुस्लिम नेता तैयार किए हैं?"
तेलंगाना में अब्दुल का क्या हुआ?
उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक रैली के दौरान ओवैसी ने सपा- कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था, "उनकी दिक्कत यह है कि वे नहीं चाहते कि कोई अब्दुल नेता बने। अब्दुल का बस यही काम है कि वह नेहरू-गांधी या यादव परिवार के लोगों के लिए कालीन बिछाए ताकि वे उस पर अपने तकिए रखकर आराम कर सकें। अब्दुल इस दुनिया में सिर्फ कालीन बिछाने के लिए नहीं आया है।"
ओवैसी के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा, "ओवैसी उत्तर प्रदेश में मुसलमानों से कह रहे हैं कि अब्दुल को अब दूसरों के लिए कालीन नहीं बिछाना चाहिए, बल्कि खुद नेता बनना चाहिए। ठीक है। लेकिन आजमगढ़ या रामपुर में यह सलाह देने से पहले उन्हें हमें बताना चाहिए कि तेलंगाना में अब्दुल का क्या हुआ? उसे कुछ चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों से आगे क्यों नहीं बढ़ने दिया गया?"
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