RK Sinha's Death: इंदिरा गांधी से टकराव के बाद गई थी नौकरी, आगे चलकर बने अटल-आडवाणी के करीबी, कैसा रहा आरके सिन्हा का करियर?

डिजिटल डेस्क, पटना।भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को नोएडा में उनका निधन हो गया। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे। ब्रेन स्ट्रोक आने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई थी और वह लंबे समय तक कोमा में रहे। करीब 75 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके जाने की खबर से बीजेपी समेत पूरे राजनीतिक जगत में दुख का माहौल है। कई बड़े नेताओं ने उन्हें याद करते हुए दुख जताया है। उनके अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर पटना लाया जाएगा जहां लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे।
लंबे समय से चल रहा था इलाज
आपको बता दें कि, आरके सिन्हा को कुछ समय पहले ब्रेन स्ट्रोक आया था। इसके बाद उनकी तबीयत लगातार खराब रहने लगी। वह लंबे समय तक कोमा में थे। शुक्रवार को नोएडा में उन्होंने अंतिम सांस ली। परिवार ने उनके निधन की जानकारी देते हुए लोगों से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने की अपील की है। साथ ही इस मुश्किल समय में परिवार को हिम्मत देने की भी बात कही है।
जनसंघ से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर
मालूम हो कि, आरके सिन्हा का नाम बीजेपी के पुराने और बड़े नेताओं में शामिल था। वह जनसंघ के समय से ही राजनीति में सक्रिय थे। उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी का करीबी माना जाता था। साल 2014 में वह पहली बार राज्यसभा पहुंचे। 2020 तक उन्होंने सांसद के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाई। राजनीति के अलावा उन्होंने SIS ग्रुप की शुरुआत की थी। यह कंपनी सुरक्षा और दूसरी सेवाएं देने के लिए जानी जाती है। वह इसके संस्थापक और चेयरमैन भी थे।
यह भी पढ़े -बिहार में 8 में से 2 सीटों के नतीजे घोषित, प्रशांत किशोर को बड़ा झटका, बरेली-मुरादाबाद में बीजेपी के हरि सिंह ढिल्लों की जीत
इंदिरा गांधी की नीतियों का किया विरोध, फिर चली गई नौकरी
रविंद्र किशोर सिन्हा यानी आरके सिन्हा का जन्म 22 सितंबर 1951 को बिहार के बक्सर में हुआ था। उनके पिता पटना में नौकरी करते थे, इसलिए उनका परिवार भी पटना में रहने लगा। पढ़ाई के साथ ही आरके सिन्हा ने पत्रकारिता में कदम रख दिया। वह बिहार के मशहूर अखबार ‘सर्चलाइट-प्रदीप’ में काम करते थे। उस समय उन्हें हर महीने सिर्फ 230 रुपये मिलते थे।
साल 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। आरके सिन्हा ने इस युद्ध की खबरें एक पत्रकार के तौर पर लोगों तक पहुंचाईं। युद्ध से लौटने के बाद उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के फैसलों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। वह अपने लेखों में उनकी नीतियों की आलोचना करते थे। आरके सिन्हा का मानना था कि इंदिरा गांधी वामपंथी नेताओं के असर में आकर कुछ ऐसे फैसले ले रही थीं जो उन्हें सही नहीं लगते थे। इसी विरोध के चलते उन्हें अपनी नौकरी भी गंवानी पड़ी।
Created On :  

