Maharashtra Politics: सहकारी बैंकों की संपत्ति पर घमासान, संजय राउत ने केंद्र पर साधा निशाना

सहकारी बैंकों की संपत्ति पर घमासान, संजय राउत ने केंद्र पर साधा निशाना
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र के शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र के शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 और मुंबई में राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त विकास निगम (NUCFDC) के कार्यालय के उद्घाटन को लेकर आपत्ति जताई है।

राउत ने यह पत्र 20 अगस्त 2026 को लिखा। इसकी एक प्रति महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राष्ट्रीय सहकारी समिति के अध्यक्ष शरद पवार को भी भेजी गई है। पत्र में उन्होंने शहरी सहकारी बैंकों की संपत्तियों से जुड़े हालिया फैसलों पर चिंता जाहिर की है।

मराठी में पत्र लिखने की बताई वजह

संजय राउत ने कहा कि उन्होंने पत्र मराठी भाषा में जानबूझकर लिखा है, ताकि महाराष्ट्र की जनता इस पूरे मामले को आसानी से समझ सके। उनका आरोप है कि राज्य के शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के साथ केंद्र सरकार के स्तर पर भेदभाव किया जा रहा है।

विधेयक जल्दबाजी में पास करने का आरोप

राउत ने दावा किया कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को संसद में पर्याप्त चर्चा और जांच के बिना जल्दबाजी में पारित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एनयूसीएफडीसी के जरिए महाराष्ट्र और गोवा के शीर्ष शहरी सहकारी बैंक की संपत्ति उसके सदस्यों की सहमति के बिना अपने नियंत्रण में ली गई।

उन्होंने इस कदम को महाराष्ट्र के लंबे समय से चले आ रहे सहकारी आंदोलन के लिए नुकसानदायक बताया।

पुराने बैंक के मुख्यालय को लेकर सवाल

राउत ने 8 अगस्त 2026 को मुंबई में एनयूसीएफडीसी कार्यालय के उद्घाटन पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, जिस परिसर में नया कार्यालय शुरू किया गया है, वह पहले महाराष्ट्र और गोवा के शीर्ष शहरी सहकारी बैंक का मुख्यालय था।

उन्होंने कहा कि यह संस्था स्थानीय सहकारी संस्थाओं के सहयोग और वित्तीय योगदान से संचालित होती रही है। बैंक लंबे समय से परिसमापन की प्रक्रिया में है और उसकी संपत्तियों के वितरण का इंतजार कर रहीं सदस्य समितियां इससे प्रभावित हो रही हैं।

माधवपुरा बैंक मामले का भी जिक्र

संजय राउत ने अपने पत्र में माधवपुरा मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस बैंक से संबंधित वसूली के दावे सुप्रीम कोर्ट में अभी लंबित हैं। ऐसे में संबंधित संपत्तियों को लेकर लिए गए फैसलों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सदस्यों से सहमति नहीं लेने का आरोप

राउत का कहना है कि परिसर को एनयूसीएफडीसी को दिए जाने से पहले महाराष्ट्र के सहकारी बैंक सदस्यों से कोई उचित सलाह-मशविरा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी सहमति भी नहीं ली गई।

उन्होंने यह भी दावा किया कि सहकारिता मंत्रालय और केंद्रीय रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज की वेबसाइट पर संपत्ति के हस्तांतरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज और आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

एनयूसीएफडीसी में महाराष्ट्र को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर सवाल

राउत ने एनयूसीएफडीसी की संरचना को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह दिल्ली में पंजीकृत एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) के रूप में काम करती है। उनके अनुसार, महाराष्ट्र से महत्वपूर्ण पूंजी मिलने के बावजूद इसके निदेशक मंडल में राज्य के शहरी सहकारी बैंकों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। राउत ने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करने और महाराष्ट्र के सहकारी क्षेत्र के हितों की रक्षा करने की मांग की है।

Created On :   22 Aug 2026 12:54 AM IST

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