West Bengal Assembly Election: पश्चिम बंगाल में बीजेपी का चला जादू, बंपर बहुमत से सरकार बनाने की ओर, ममता बनर्जी को इन पांच कारणों से लगा बड़ा झटका

डिजिटल डेस्क, कोलकाता। देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की मतगणना जारी है, जिसमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है। नतीजों से ये साफ जाहिर हो चुका है कि बीजेपी चुनाव जीत चुकी है और टीएमसी हार रही है। यानी तीन बार की सरकार बनाने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को करारी हार का शिकार हुई है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी राज्य में प्रचंड बहुमत के साथ पहली बार सरकार बनाने जा रही है। ऐसे में समझते हैं कि टीमएसी प्रमुख ममता बनर्जी को किन पांच कारणों से हार का सामना करना पड़ा है?
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SIR का असर
बंगाल में निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया था। जिसके चलते ऐसे वोटर्स के नाम काटे गए हैं, जिनका नाम एक से ज्यादा जगह दर्ज था। उनके अलावा मृत लोगों को नाम भी हटाए गए है। जिसका ममता बनर्जी ने विरोध भी किया है। इतना ही नहीं उन्होंने इस प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी। इसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। जानकारी के मुताबिक, एसआईआर के जरिए राज्य के 90 लाख लोगों के नाम काटे गए हैं। वहीं, इस प्रक्रिया के चलते बांग्लादेशी नागरिक भी अपने वतन वापस लौट गए।
हिंदू वोट बैंक का ध्रुवीकरण
इस बार के चुनाव में राज्य के हिंदू मतदाओं का झुकाव बीजेपी के तरफ देखने को मिला है। इस वजह से ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर जाने के लिए अहम माना जा रहा है। पिछले चुनाव में बीजेपी ने अच्छी टक्कर दी थी, लेकिन ममता बनर्जी चुनाव जीत गई थीं। टीएमसी की तीसरी बार सरकार बनाने के बाद जिस प्रकार हिंदू महिलाओं के साथ अभद्रता देखने को मिली थी। इससे हिंदू समुदाय के लोग डरे हुए थे और उन्हें चिंता सताने लगी थी कि अब उनका क्या होगा। वहीं, चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने हिंदुत्व का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।
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TMC का मुस्लिमों के प्रति झुकाव
इस विधानसभा के चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी की हार का सबसे बड़ी वजह बनी, मुस्लिम के प्रति झुकाव। उनके हर कार्यक्रम और संबोधन में मुस्लिमों के लिए प्यार देखने को मिला है। इस वजह से हिंदुओं में उनके खिलाफ एक अलग ही छवि बन गई थी। हालांकि, चुनाव के दौरान हिंदुओं वोटर्स साइलेंट रहे और बीजेपी को मतदान कर दिया। बता दें कि साल 2025 में राज्य के मुर्शिदाबाद और मालदा जिले में हिंसा हुई थी, इस दौरान हिंदुओं को टारगेट बनाया गया था। इस दौरान राज्यपाल सीवी आनंद बोस अप्रैल, 2025 में हिंदु पीड़ितों से मुलाकात करने पहुंचे थे और टीएमसी सरकार को घेराने का काम किया था, लेकिन सरकार ने उनके समर्थन में कोई कदम नहीं उठाया।
ममता बनर्जी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप
टीएमसी सरकार पर राशन घोटाला, भर्ती घोटाला समेत कई गंभीर आरोप लगे थे। इस वजह से जमीनी स्तर पर मतदाता बदलाव के मूड में दिखाई दिए। राज्य के राशन घोटाले की बात करें तो यह बड़ा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) घोटाला है, इसके चलते गरीब लोगों का राशन खुले बाजार में अवैध रूप से बेचने के आरोप है। इस घोटाले में लगभग 9000 से 10000 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग बताया जा रहा है। इसी तरह भर्ती में भी घोटाला हुआ है। इसके चलते बंगाल में टीएमसी सरकार के प्रति 'एंटी-इनकंबेंसी' बन गई।
संगठन के भीतर टूट
चुनाव से पहले ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही थी कि टीएमसी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था। संगठन के भीतर आपसी तालमेल नहीं बैठ पा रहा था। जिसको चुनाव में ममता बनर्जी संभाल नहीं पाई थी। इस वजह से पार्टी नेता और कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल हो गए। इसे भी हार का सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है।
Created On :   4 May 2026 5:35 PM IST












