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सर्दियों में अंदरुनी गर्माहट जरूरी, 'गोंद की बर्फी' में छुपा सेहत का खजाना

November 13th, 2019 12:03 IST
सर्दियों में अंदरुनी गर्माहट जरूरी, 'गोंद की बर्फी' में छुपा सेहत का खजाना

डिजिटल डेस्क, मुम्बई। तापमान में गिरावट के साथ ठंड की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में खुद का ध्यान रखना ज्यादा जरुरी सा हो गया। खुद को गर्म रखने के लिए हम गर्म कपड़े तो पहन लेते हैं, लेकिन उससे अंदरुनी गर्माहट नहीं मिल पाती। ऐसे में कुछ गर्म चीजों का सेवन जरुरी हो जाता है, जो हमारे शरीर को अंदर से गर्म रख सके। इसलिए हम आपको बता रहे हैं 'गोंद की बर्फी' बनाने की रेसिपी, जो ठंड में आपके शरीर को गर्म रखेगी और स्वाद से भरपूर भी रखेगी।

गोंद की बर्फी बनाने के लिए आपको चाहिए।

- 50 ग्राम गोंद 
- 100 ग्राम मखाना 
- 50 ग्राम बादाम
- 50 ग्राम काजू
- 25 ग्राम खरबूजे के बीज 
- 1 कप कद्दूकस करा हुआ सुखा नारियल 
- 1 कप घी (गोंद तलने के लिए)
- 2 कप चीनी
- 1/2 छोटा चम्मच छोटी इलाइची का पाउडर 
- 2 कप पानी

इस तरह बनाएं गोंद की बर्फी।

एक कढाई को गरम करे उसमे खरबूजे के बीज डाल के भूने जब बीज फूल जाये तो उसे बाहर निकाल ले। उसी कढाई में मखाने डाल के भून के निकाल ले। फिर कद्दूकस करा हुआ नारियल धीमी आंच पर 1-2 मिनट तक भूने के निकाल ले। गोंद के टुकड़े अगर बहुत बड़े हो तो उसे तोड़ के थोडा छोटा कर ले। कढाई में घी डाल के गरम करे। गोंद को गरम घी में डाल के मध्यम आंच पर तले, जब गोंद फूल के बड़े हो जाये तो तुरंत कढाई से बाहर निकाल ले। गोंद बहुत जल्दी जल के कड़वा हो जाता है।

काजू, बादाम, और बीज को मिला के दरदरा पीस ले। मखाने को भी दरदरा पीस ले। गोंद को भी दरदरा पीस ले। अब एक कढाई में पानी और चीनी मिला के गरम करे, जब एक तार की चाशनी बन जाये तो चाशनी में पिसे हुए मेवे, नारियल, मखाना, गोंद और इलाइची पाउडर डाल के अच्छे से मिलाये, जब मिश्रण थोडा सूखने लगे तो गैस बंद कर दे।

एक थाली में घी लगा के चिकना कर ले। बर्फी का सारा मिश्रण थाली में डाल के गीले हाथ से या फिर कलछुल के फैला के बराबर कर दे। फिर ठंडा होने दे। ठंडा होने के बाद मनचाहे आकार में काट के सबको खिलाये।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।