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AusOpen: वर्ल्ड नंबर-1 नोवाक जोकोविच 8वीं बार टूर्नामेंट के फाइनल में, रोजर फेडरर को हराया

AusOpen: वर्ल्ड नंबर-1 नोवाक जोकोविच 8वीं बार टूर्नामेंट के फाइनल में, रोजर फेडरर को हराया

हाईलाइट

  • जोकोविच ने सेमीफाइनल में रोजर फेडरर को 7(7)-6(1), 6-4, 6-3 से मात दी
  • नडाल ने ऑस्ट्रेलियन ओपन के सेमीफाइनल में फेडरर को चौथी बार हराया है

डिजिटल डेस्क। सर्बिया के स्टार खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने गुरुवार को साल के पहले ग्रैंड स्लेम टेनिस टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में प्रवेश कर लिया है। जोकोविच 8वीं बार इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचे हैं। वर्ल्ड नंबर-1 जोकोविच ने मेंस सिंगल्स के सेमीफाइनल मुकाबले में वर्ल्ड नंबर-3 स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर को 7(7)-6(1), 6-4, 6-3 से मात देकर टूर्नामेंट के फाइनल में अपनी जगह पक्की की। दोनों खिलाड़ियों के बीच यह मुकबाला 2 घंटे 18 मिनट तक चला। 

जोकोविच ने अब तक 7 बार ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीता है। उन्होंने 2019 में स्पेन के राफेल नडाल को ही हराकर यह खिताब जीता था। वहीं फेडरर ने 2018 में टूर्नामेंट का खिताब जीता था। इस जीत के साथ ही जोकोविच ने फेडरर का 21वां ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने का सपना तोड़ दिया। अब रविवार को फाइनल में जोकोविच का सामना ऑस्ट्रिया के डोमिनिक थीम और जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा। 

नडाल ने टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में फेडरर को चौथी बार हराया
फेडरर अपने प्रतिद्वंद्वी जोकोविक से ऑस्ट्रेलियन ओपन में चौथी बार हारे हैं और ये सभी सेमीफाइनल मैच रहे हैं। जोकोविच ने इससे पहले 2008, 2011 और 2016 में फेडरर को टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में ही मात दी थी। 20 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन फेडरर का जोकोविक के खिलाफ करियर रिकॉर्ड अब 23-28 हो गया है। जोकोविच की नजर 17वें ग्रैंड स्लैम खिताब पर हैं। 19 ग्रैंड स्लैम जीत चुके वर्ल्ड नंबर-1 राफेल नडाल पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुके हैं। ऑस्ट्रिया के डोमिनिक थीम ने नडाल को क्वार्टरफाइनल में मात देकर टूर्नामेंट से बाहर किया था। 

जीत के बाद जोकोविक ने कहा, मैंने फेडरर को 20% बेहतर खिलाड़ी बनाया
मैच जीतने के बाद जोकोविक ने कहा, फेडरर के खिलाफ आप उच्च स्तर के टेनिस की उम्मीद करते हैं। वह कभी भी वापसी कर सकते हैं। मैंने कोशिश की मैं उनके साथ रैली में बना रहूं और उन्हें कोर्ट पर मूव कराता रहूं। फेडरर के साथ हुए 50 मुकाबलों के बारे में 16 बार के ग्रैंड स्लैम विजेता खिलाड़ी ने कहा, मुझे उम्मीद है कि मैंने उन्हें 20 फीसदी बेहतर खिलाड़ी बनाया होगा। राफा और फेडरर ने मेरे खेल को भी बेहतर बनाया है।

जोकोविच ने क्वार्टर फाइनल में मिलोस को मात दी थी
इससे पहले नोवाक जोकोविच ने क्वार्टर फाइनल मैच में कनाडा के मिलोस राओनिक को 6-4, 6-3, 7-6(1) से मात देकर सेमीफाइनल में अपना स्थान पक्का किया था। वहीं 20 बार के ग्रैंड स्लैम विजेता स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर ने क्वार्टर फाइनल मैच में अमेरिका के सैंडग्रेन को 6-3, 2-6, 2-6, 7-6(8), 6-3 से मात देकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। फेडरर इस टूर्नामेंट में 15वीं बार सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रहे थे। पिछली बार फेडरर 2018 में सेमीफाइनल में ही हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गए थे।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।