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दिग्गज जिन्होंने दूसरे खेलों में भी आजमाई किस्मत

October 12th, 2019 17:30 IST
 दिग्गज जिन्होंने दूसरे खेलों में भी आजमाई किस्मत

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। उसेन बोल्ट, पीटर चेक, इयान बॉथम और माइकल जॉर्डन किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। अपने-अपने खेलों में इन दिग्गजों का शानदार करियर रहा लेकिन ये यहीं नहीं रुके और आगे चलकर दूसरे खेलों में भी अपनी किस्मत आजमाई। इन सबके अलावा कई ऐसे दिग्गज हुए हैं, जिन्होंने दूसरे खेलों में हिस्सा लिया। ऐसी ही कुछ दिग्गजों पर एक नजर :

पीटर चेक (चेल्सी और आर्सेनल के लिए खेल चुके फुटबाल खिलाड़ी) :

इंग्लिश प्रीमियर लीग के शीर्ष क्लबों में से एक चेल्सी और आर्सेनल के लिए खेल चुके चेक गणराज्य के पेटर चेक ने हाल ही में आइस हॉकी की ओर अपना रुख किया है। चेक ने 2018-19 सीजन की समाप्ति के बाद फुटबाल से सन्यास ले लिया था और अब वह आइस हॉकी में अपना जलवा दिखाएंगे।

चेक ने नेशनल आइस हॉकी लीग में खेलने वाली टीम गुइलफोर्ड फीनिक्स के साथ करार किया है। फिनिक्स की टीम ब्रिटिश आइस हॉकी के दूसरे स्तर की लीग में खेलती है।

पीटर ने कहा, मैं आशा करता हूं कि मैं इस टीम को उसका लक्ष्य हासिल करने में मदद करुंगा। 20 साल तक पेशेवर फुटबाल का अनुभव लेने के बाद एक ऐसे खेल को खेलना बहुत मजेदार होगा जिसमें मैं बचपन से देखा और खेला है।

चेल्सी के महान गोलकीपर रह चुके चेक अपने करियर के अंतिम कुछ वर्षो में लंदन स्थित क्लब आर्सेनल के लिए भी खेले। चेक ने चेल्सी के साथ चार ईपीएल, पांच एफए कप, तीन लीग कप, एक चैम्पियंस लीग और यूरोपा लीग का खिताब जीता है। वह फिलहाल, चेल्सी के तकनीकी निदेशक हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि वह अपनी नौकरी नहीं बदल रहे हैं बल्कि खाली समय में आइस हॉकी खेलेंगे।

चेक ने कहा, कुछ लोगों को लगता है कि मैंने अपनी नौकरी बदल ली है। ऐसा नहीं है। सौभाग्य से चेल्सी में मेरा काम मुझे खाली समय में आइस हॉकी खेलने से नहीं रोकता। पेशेवर फुटबाल में होने के कारण मैं यह खेल नहीं खेल सकता था, लेकिन अब मैं ऐसा कर सकता हूं।

इयान बॉथम (इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेट कप्तान और सर्वकालिक महान हरफनमौला खिलाड़ियों में से एक) :

इंग्लैंड के बॉथम को क्रिकेट के सबसे महान हरफनमौला खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। वह शायद एकमात्र ऐसे क्रिकेटर हैं, जिन्होंने क्रिकेट के साथ-साथ फुटबाल में भी अपनी किस्मत आजमाई।

बॉथम ने 1981 और 1985 में इंग्लैंड को आस्ट्रेलिया के खिलाफ प्रतिष्ठित एशेज सीरीज दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। इस दौरान इंग्लैंड के फुटबाल क्लब स्कनथ्रॉप युनाइटेड के लिए भी खेले।

बॉथम बचपन से फुटबाल और क्रिकेट दोनों खेलते थे। उन्होंने क्रिकेट को अपने करियर के रूप में चुना, लेकिन फुटबाल को अपने दिल से कभी नहीं निकाल सके। उन्होंने स्कनथ्रॉप युनाइटेड के लिए एक सेंटर हॉफ के रूप में फुटबाल लीग में 11 मैच खेले। बॉथम के नाम टेस्ट क्रिकेट में 8565 रन और 383 विकेट हैं।

उसेन बोल्ट (विश्व रिकार्डधारी दुनिया के महानतम फर्राटा धावक)

बॉथम की तरह जमैका के महान फर्राटा धावक उसेन बोल्ट का भी दूसरा प्यार फुटबाल है। 100 मीटर की रेस को महज 9.58 सेकेंड में पूरा करने का रिकॉर्ड बनाने वाले और आठ बार के ओलम्पिक स्वर्ण पदक विजेता बोल्ट ने पिछले साल एथलेटिक्स से सन्यास लेने के बाद पेशेवर फुटबाल में अपनी किस्मत आजमाई।

बोल्ट ने आस्ट्रेलिया की ए-लीग में खेलने वाली टीम सेंट्रल कोस्ट मैरिनर्स के साथ ट्रेनिंग की और एक विंगर के रूप में खेले। उन्होंने मैरिनर्स के लिए एक गोल भी किया, लेकिन क्लब ने उनके साथ पेशेवर करार करने से इंकार कर दिया। इसके बाद, बोल्ट ने पेशेवर फुटबाल से पीछे हट गए।

एंड्रयू फ्लिंटॉफ (इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान)

इंग्लैंड के एक अन्य ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने भी क्रिकेट के अलावा, दूसरे खेल में अपना करियर बनाने का प्रयास किया। 2005 एशेज सीरीज में इंग्लैंड के हीरो रहे फ्लिंटॉफ ने 2010 में क्रिकेट से सन्यास लिया और दो साल बाद बॉक्सिंग रिंग में कदम रखा।

फ्लिंटॉफ ने नवंबर 2012 में अमेरिका के रिचर्ड डॉसन से प्रतिस्पर्धा की। इंग्लैंड के खिलाड़ी को मुकाबले में हार झेलनी पड़ी और वह दोबारा रिंग में नहीं उतरे। फ्लिंटॉफ के नाम टेस्ट क्रिकेट में 6197 रन और 226 विकेट हैं।

माइकल जॉर्डन (महानतम बास्केटबॉल खिलाड़ियों में से एक)

जॉर्डन का नाम वो इंसान भी जानता है जो अमेरिका में खेली जाने वाली बास्केटबॉल लीग-एनबीए नहीं देखता। शिकागो बुल्स से खेल चुके अमेरिका के करिश्माई बास्केटबॉल खिलाड़ी जॉर्डन 1994 में पहली बार खेल से सन्यास लेने की घोषणा की। इसके चार महीने बाद, उन्होंने बेसबॉल टीम शिकागो व्हाइट शॉक्स के साथ करार किया।

वह शॉक्स के सम्बद्ध क्लब बर्मिघम बैरन के लिए खेले। वह 127 मैचों में केवल तीन होम रन ही मार पाए और बेसबॉल में उनका करियर समाप्त हो गया। जॉर्डन अमेरिका के लिए बास्केटबॉल में ओलम्पिक गोल्ड भी जीत चुके हैं और उन्होंने इस खेल से तीन बार खेल से सन्यास लिया।

जस्टिन गैटलिन (अमेरिका के विश्व विजेता फर्राटा धावक)

अमेरिका के स्टार धावक और हाल में समाप्त हुए विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में रजत पदक जीतने वाले जस्टिन गैटलिन पर डोपिंग के कारण 2006 में चार साल का प्रतिबंध लगा था। 100 मीटर में बोल्ट के प्रतिद्वंद्वी रहे गैटलिन ने इस दौरान अमेरिकन फुटबॉल खेला। उन्होंने एनएफएल की टीम ह्यूस्टन टैक्सन्स के साथ ट्रेनिंग की और टैम्पा बे बुकानीर्स के लिए ट्रायल भी दिए।

हालांकि, टैम्पा की टीम ने उनके साथ करार नहीं किया और गैटलीन बैन समाप्त होने के बाद ट्रैक पर वापस आ गए।

पाब्लो माल्दीनी (दुनिया के बेहतरीन फुटबाल डिफेंडरों में से एक)

इटली के दिग्गज क्लब एसी मिलान से खेल चुके पाब्लो माल्दीनी को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ डिफेंडर माना जाता है। माल्दीनी ने इटली के क्लब के लिए 25 सीजन में कुल 902 मैच खेले और पांच बार यूरोपीय चैम्पियंस लीग का खिताब भी जीता।

वह हमेशा शौक के तौर पर टेनिस खेलते थे और फुटबाल से सन्यास लेने के बाद उन्होंने पेशेवर टेनिस में कदम रखने का मन बनाया। वह मिलान में हुए एटीपी चैलेंजर टूर्नामेंट में युगल वर्ग में खेले, लेकिन केवल 43 मिनट में 1-6, 1-6 से मैच हार गए।

इस हार ने उनके पेशेवर टेनिस करियर को भी समाप्त कर दिया।

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राजस्थान में सियासी घमासान फिर तेज, मंत्रिमंडल विस्तार पर गहलोत-पायलट आमने सामने


डिजिटल डेस्क, जयपुर। पंजाब में जब से कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर कांग्रेस प्रदेश कमेटी का अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को बनाया है, तब से राजस्थान में पायलट गुट का भी जोश हाई है। अब पायलट गुट के दबाव के कारण मंत्रिमंडल पर नए सिरे से चर्चा हो रही है। मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच तलवारें खिंच गईं हैं,  दोनों गुट आमने-सामने आ गये हैं। फिलहाल विस्तार की कोई तारीख तय नहीं है लेकिन यह माना जा रहा है कि अगले महीने इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है। अभी गहलोत कैबिनेट में 9 पद खाली हैं। अगर कांग्रेस 'एक व्यक्ति एक पद' के फॉर्मूले को मानती है तो शिक्षा राज्य मंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा को अपना पद छोड़ना होगा। वैसे गोविंद डोटासरा ने यह कहकर कि 'मैं दो-चार दिन का मेहमान हूं' अपने जाने के संकेत दे दिये हैं। एक पद विधानसभा उपाध्यक्ष का भी खाली है।   
 
आंकड़ों के हिसाब से गहलोत कैबिनेट में कुल 11 पद खाली हैं। लेकिन इन सभी पदों पर फिलहाल मंत्री नहीं बनाए जाएंगे। अंदेशा है कि विस्तार के बाद भी नाराजगी रह सकती है। उन हालातों का सामना करने के लिए फिलहाल कैबिनेट में दो या तीन पद खाली ही रखे जाएंगे। 
मत्रिमंडल विस्तार पर अगर पूरी तरह गहलोत हावी रहे तो 2 या 3 ही मंत्रियों की छुट्टी होगी। पर ये फैसला लेना भी गहलोत के लिए आसान नहीं होगा,  क्योंकि उन्हें उन लोगों के बीच फैसला लेना होगा जिन लोगों ने मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया था। 
अगर विस्तार पर पायलट गुट का दबाव रहा तो फिर 6 से 7 मंत्री आउट होना तय माने जा रहे हैं। और, अगर आलाकमान ने प्रदर्शन को आधार माना तो कई मंत्रियों को जाना पड़ सकता है, लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है। हालांकि, अजय माकन का 28-29 को जयपुर दौरा है। जिसमें वह जयपुर आकर हर विधायक से बात करेंगे। उसके बाद यह तय होगा कि कौन रहेगा और कौन जाएगा?   

इन मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा


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इनकी हो सकती मंत्रिमंडल में एंट्री- पायलट गुट के 3 और गहलोत गुट के 7 चहेरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 

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डोटासरा के बयान से उनके जाने के संकेत

प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाऐं जारी हैं उस बीच शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर छा गया है। इसमें उनको राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जारोली से कहते सुना जा सकता हैं- ‘मेरे पास एक घंटे फाइल नहीं रुकेगी, आप सोमवार को आ जाओ। एक मिनट में निकाल दूंगा, जितनी कहोगे। मैं दो-पांच दिन का ही मेहमान हूं। मुझसे जो कराना है करा लो।’ इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली ने हाथ जोड़कर कहा कि मैं आता हूं सर। इस वायरल वीडियो के बाद से ये कयास तेज हो गए हैं कि मंत्रिमंडल से डोटासरा की रवानगी तय है। 
 

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Habibganj Railway Station: भारत का पहला वर्ल्ड क्लास हबीबगंज रेलवे स्टेशन आपके लिए तैयार, यहां की सेफ्टी, सिक्योरिटी और फैसिलिटी सबसे अलग


डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भारत का पहला वर्ल्ड क्लास हबीबगंज रेलवे स्टेशन बनकर तैयार हो चुका है। री-डेवलपमेंट के बाद इस स्टेशन पर ऐसी सुविधाएं मिलेंगी जो मौजूदा समय में भारत के किसी भी रेलवे स्टेशन पर नहीं है। हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, अस्पताल, मॉल, स्मार्ट पार्किंग, हाई सिक्योरिटी समेत कई सुविधाएं मिलेंगी। इसके लोकार्पण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। अगले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस स्टेशन का लोकार्पण कर सकते हैं। आइये जानते हैं कैसे एक सामान्य रेलवे स्टेशन बना वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन...

16 अप्रैल 1853 बॉम्बे से 14 कोच और 400 यात्रियों के साथ भारत की पहली ट्रेन ठाणे के लिए रवाना हुई। इस ट्रेन ने 34 किलोमीटर की दूरी तय की। इसके बाद भारत ने नए युग की ओर पहला कदम तब रखा जब उसने स्टीम इंजनों का निर्माण शुरू किया। राजपूताना मालवा के अजमेर वर्कशॉप में पहला स्टीम लोको नंबर F-734 1895 बनाया गया था। इसके बाद बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए 1901 में रेलवे बोर्ड का गठन किया गया।

आजादी के बाद भारत को विरासत में मिले रेल नेटवर्क में काफी सुधार की जरूरत थी। महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ने के लिए कई लाइनों को री-रूट किया गया और नई लाइन का निर्माण किया गया। भारत की 42 रियासतों के स्वामित्व वाले रेलवे को जोड़कर इंडियन रेलवे का गठन हुआ। 1947 में आजादी के बाद भारतीय रेल का 55 हजार किलोमीटर का नेटवर्क था। 1952 में मौजूदा रेल नेटवर्क को एडमिनिस्ट्रेटिव पर्पज के लिए 6 ज़ोन में डिवाइड किया गया। 

भारतीय इकोनॉमी के समृद्ध होने के साथ भारतीय रेलवे ने सभी प्रोडक्शन देश में ही करना शुरू कर दिया। 1985 के बाद धीरे-धीरे स्टीम इंजनों की जगह बिजली और डीजल लोकोमोटिव्स ने ले ली। कई सालों तक इलेक्ट्रिफिकेशन से लेकर ट्रैक और स्टेशनों के डेवलपमेंट पर काम हुआ। फिर आई 14 जुलाई 2016 की तारीख। भारतीय रेल के लिए ऐतिहासिक दिन। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत इंडियन रेलवे ने 1979 में तैयार हुए हबीबगंज स्टेशन के मॉडर्नाइजेशन के लिए पहला कॉन्ट्रेक्ट किया। 

5 सालों तक चले मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट के बाद जुलाई 2021 में हबीबगंज स्टेशन बनकर तैयार हो गया। इस स्टेशन में वर्ल्ड क्लास सुविधाएं है जिसके लिए करीब 100 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। हबीबगंज स्टेशन पर 5 प्लेटफॉर्म है, जिन्हें अलग-अलग शेडों से कवर किया गया है। यात्रियों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो उसे ध्यान में रखते हुए सुविधाएं देने की कोशिश की गई है। दिव्यांगों के लिए अलग से शौचालय बनाए गए हैं। आने वाले समय में स्टेशन को ब्रिज के जरिए तैयार हो रहे मेट्रो स्टेशन से भी जोड़ा जाएगा।

हबीबगंज स्टेशन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि प्रवेश करने और ट्रेनों से उतरकर बाहर निकलने वाले यात्री एक-दूसरे से नहीं टकराएंगे। प्रवेश करने वाले यात्री दोनों तरफ मुख्य भवनों से प्रवेश करेंगे। लिफ्ट, ट्रेवलेटर, एस्केलेटर से एयर कॉन्कोर पर पहुंचेंगे। वहां आराम करेंगे और ट्रेन के आने पर प्लेटफार्म पर उतरकर यात्रा शुरू करेंगे। दूसरें शहरों से हबीबगंज पहुंचने वाले यात्री ट्रेन से उतरेंगे और अंडरग्राउंड सब-वे से बाहर निकल जाएंगे। 

स्टेशन पर एक साथ 1100 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है। इस स्टेशन पर साफ-सुथरे AC वेटिंग रूम से लेकर रिटायरिंग रूम और डोर्मिटरी की सुविधा है। वीआईपी लाउंज भी बनाया गया है। एयरपोर्ट टर्मिनल्स पर जिस तरह की शॉप्स होती है उसी तरह की सुविधाओं के लिए यहां रिटेल स्पेस का प्रोविजन किया गया है। 

स्टेशन और लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है। इसके लिए यहां 162 हाई रिजोल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं। कंट्रोल रूम में बैठकर पूरे स्टेशन पर नजर रखी जाती है। इन कैमरों के डेटा को डेढ़ सौ टेराबाइट के सर्वर पर एक महीने तक स्टोर किया जाता है। फायर डिटेक्टर से लेकर सुरक्षा से जुड़े अन्य उपकरण यहां इंस्टॉल किए गए हैं। स्टेशन के बाहर के इलाके को 300 करोड़ रुपए की लागत से डेवलप किया जा रहा है जहां मॉल समेत अन्य सुविधाएं होंगी। 

हबीबगंज रेलवे स्टेशन की बिल्डिंग को इनवॉयरमेंट फेंडली बनाया गया है। बिजली की खपत को कम करने के लिए स्टेशन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि दिन में लाइट की जरुरत ही नहीं है। टेंप्रेचर को कंट्रोल करने के लिए छत पर इंसुलेटड शीटिंग की गई है। इसके अलावा बिजली की आपूर्ति के लिए प्लेटफॉर्म के शेड पर सोलर पैनल लगाए गए हैं। इस स्टेशन को बनाते समय कंस्ट्रक्शन टीम को कई तरह के इंजीनियरिंग चैलेंजेज का भी सामना करना पड़ा।

अब सवाल उठता है कि क्या इतनी सारी सुविधाओं से युक्त ये स्टेशन आम लोगों की पहुंच से दूर हो गया है? क्या अब इस स्टेशन पर रेलवे का कोई कंट्रोल नहीं है? क्या ये स्टेशन प्राइवेट है? इसे समझने के लिए हमे समझना होगा पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी को।स्टेशन पूरी तरह तैयार है। जैसे ही यात्रियों का दबाव बढ़ेगा, लिफ्ट, ट्रेवलेटर, एस्केलेटर शुरू कर दिए जाएंगे। अभी न के बराबर यात्री आ रहे हैं, इसलिए ये सुविधाएं बंद हैं।

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ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया से आए हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के अलावा जर्मन की महिला जिमनास्टिक्स ने फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपने मन के कपड़े पहनने की आजादी को अपने खेल के जरिए प्रमोट करने का फैसला किया है, जिससे उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness

जर्मनी की महिला जिमनास्ट रविवार को हुए टोक्यो ओलंपिक मुकाबले में फुल बॉडी सूट पहने नजर आई। खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूट को फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी को बढ़ावा देने साथ ही महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है जिसे पहनकर महिला खिलाड़ी आरामदायक महसूस कर सकें।

Germany's gymnasts wear body-covering unitards, rejecting 'sexualization' of sport - CNN 
 

जर्मनी की 4 जिमनास्ट जिनके नाम है पॉलीन शेफर-बेट्ज, सारा वॉस, एलिजाबेथ सेट्ज और किम बुई लाल और सफेद रंग के इस यूनिटार्ड सूट में नजर आई जो लियोटार्ड और लेगिंग्स को मिलाकर बनाया गया था। खिलाड़ी इसी को पहन कर मैदान में उतरीं थी। 

German gymnastics team, tired of 'sexualisation,' wears unitards | Deccan Herald
 

जर्मनी की टीम ने अपनी ट्रेनिंग में भी इसी तरह के कपड़े पहने हुए थे और अपने कई इंटरव्यूज में खिलाड़ियों ने कहा था कि इस साल फाइनल कॉम्पटीशन में भी वो फ्रीडम ऑफ चॉइस को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगी। खिलाड़ी सारा वॉस ने द जापान टाइम्स को बताया था यूनिटार्ड को फाइनल करने से पहले उन्होंने इस पर चर्चा भी की थी। सारा ने ये भी कहा कि जैसे जैसे एक महिला बड़ी होती जाती है, वैसे ही उसे अपने शरीर के साथ सहज होने में काफी मुश्किल होती हैं। हम ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसमें हम अच्छे भी दिखे और सहज भी महसूस करें। चाहे वो कोई लॉन्ग यूनिटार्ड हो या फिर शॉर्ट। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness
 

सारा ने यह भी बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में भी इसी तरह का फुल बॉडी सूट पहना था और इसका उद्देश्य सेक्सुलाइजेशन को कम करना है। हम लोगों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहते थे जिससे वो हमे फॉलो कर सकें। जर्मन के खिलाड़ियों की लोग काफी प्रशंसा भी कर रहे हैं। 


ओलंपिक प्रतियोगिताओं में जिमनास्ट महिलाओं को फुल या हाफ बाजू के पारंपरिक लियोटार्ड ही पहनना होता है साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुल कपड़े पहनने की अनुमति तो है लेकिन किसी भी महिला जिमनास्ट ने इस तरह के कपड़े नहीं पहने थे। यह पहली बार था जब जर्मन खिलाड़ी महिलाओं ने इस तरह के कपड़े पहने थे। 
बीते कुछ सालों में खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं के शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों को देख महिला खिलाड़ियो की चिंता बढ़ती जा रही है अब एथलीटों की सुरक्षा को देखते हुए नए सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं।