comScore

जयवर्धने ने पूछा, अंतिम एकादश से बाहर का खिलाड़ी कैसे मैच फिक्सिंग कर सकता है?

June 20th, 2020 20:30 IST
 जयवर्धने ने पूछा, अंतिम एकादश से बाहर का खिलाड़ी कैसे मैच फिक्सिंग कर सकता है?

हाईलाइट

  • जयवर्धने ने पूछा, अंतिम एकादश से बाहर का खिलाड़ी कैसे मैच फिक्सिंग कर सकता है?

कोलंबो, 20 जून (आईएएनएस)। श्रीलंका के पूर्व कप्तान महेला जयवर्धने ने देश के पूर्व खेल मंत्री महिंदानंद अल्थगमागे के उस बयान के बाद उनकी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने रूपष्ट करते हुए कहा था कि वह 2011 के विश्व कप फाइनल में मैच फिक्सिंग में शामिल किसी भी खिलाड़ी पर आरोप नहीं लगा रहे हैं।

अल्थगमागे ने आरोप लगाया था कि मुंबई में मेजबान भारत और श्रीलंका के बीच खेला गया विश्व कप 2011 का फाइनल मुकाबला फिक्स था। उनके बयान के बाद सरकार ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पूर्व खेल मंत्री ने बाद में कहा कि वह मैच बेचने के लिए अधिकारियों पर आरोप लगा रहे हैं।

अल्थगमागे के इस बयान के बाद जयवर्धने और 2011 विश्व कप फाइनल में श्रीलंका के कप्तान रहे कुमार संगकारा ने पूर्व खेल मंत्री के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि वे हैरान हैं कि कोई खिलाड़ी बिना खेले कैसे मैच फिक्सिंग कर सकता है।

जयवर्धने ने ट्विटर पर कहा, कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि हमने 2011 विश्व कप को बेच दिया था तो यह स्वाभाविक रूप से एक बड़ी बात है कि हम यह नहीं जानते कि अंतिम एकादश का हिस्सा नहीं होने के बाद कोई कैसे मैच फिक्स कर सकता है? उम्मीद है कि हम नौ साल बाद प्रबुद्ध हो जाएंगे।

अल्थगमागे ने कहा कि उन्होंने 2012 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) से इसकी शिकायत की थी और मामले की जांच की मांग की थी।

उन्होंने कहा था, मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत से फाइनल हारने के एक साल बाद ही कुछ क्रिकेट अधिकारियों ने कथित तौर पर कार कंपनियों को खरीदा और नए कारोबार शुरू किए।

उन्होंने कहा कहा कि महेला ने कहा है कि सर्कस शुरू हो चुका है। मैं नहीं समझ पाया कि क्यों महेला और संगकारा इस मामले को बड़ा बना रहे हैं। मैं अपने किसी खिलाड़ी का नाम नहीं ले रहा हूं।

- -आईएएनएस

कमेंट करें
gwD1Q
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।