MPPCB अध्यक्ष की कुर्सी पर विवाद!: अनिरुद्ध मुखर्जी के निलंबन की मांग, RTI एक्टिविस्ट अजय दुबे ने नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के अध्यक्ष अनिरुद्ध मुखर्जी की नियुक्ति और पदभार ग्रहण करने की प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। RTI एक्टिविस्ट अजय दुबे ने उनकी नियुक्ति पर गंभीर सवाल उठाते हुए निलंबन, पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और कथित अनियमितताओं के दौरान लिए गए फैसलों की समीक्षा की मांग की है। शिकायत में नियुक्ति प्रक्रिया से लेकर आर्थिक लेन-देन और प्रशासनिक फैसलों तक कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
यह भी पढ़े -भ्रष्टाचार के पोस्टर से इंदौर में मचा बवाल, कैलाश विजयवर्गीय ने पुलिस से कहा- पकड़कर गाड़ी में बैठाओ
बिना अनुमति के पदभार संभालने के आरोप
अजय दुबे का आरोप है कि अनिरुद्ध मुखर्जी ने मुख्यमंत्री की अनुमति और निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के बिना ही जुलाई 2026 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष का पदभार संभाल लिया। उनका दावा है कि इस नियुक्ति के संबंध में आवश्यक राजपत्र अधिसूचना भी जारी नहीं हुई। इसके बावजूद वर्ष 2022 के पुराने नियमों और आदेशों का हवाला देकर पदभार ग्रहण को उचित ठहराया जा रहा है।
नियुक्ति के नियमों में बदलाव
शिकायत में जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 और अध्यक्ष की नियुक्ति से संबंधित नियमों का हवाला दिया गया है। आरोप है कि वर्ष 2022 में नियमों में संशोधन कर प्रमुख सचिव, पर्यावरण विभाग को अध्यक्ष बनाने का प्रावधान समाप्त कर दिया गया था। वहीं, फरवरी 2024 में केंद्र सरकार द्वारा अधिनियम में संशोधन किया गया। इसके बाद मध्यप्रदेश सरकार ने भी अप्रैल 2026 में अधिसूचना जारी कर संशोधित प्रावधान लागू किए।
कब मिली अतिरिक्त प्रभार की जिम्मेदारी?
दरअसल, अनिरुद्ध मुखर्जी 1993 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं। जून 2026 में उन्हें पर्यावरण विभाग और EPCO का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, लेकिन जारी आदेश में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष का पद शामिल नहीं था। इसके बावजूद 6 जुलाई 2026 को उनके द्वारा अध्यक्ष का पदभार संभालने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
यह भी पढ़े -कैबिनेट: नगरीय निकायों की खरीदी पर मुख्यमंत्री ने कहा विपक्ष को सही से जवाब दें, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करें
शिकायत पत्र में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की पदोन्नति, कथित रिश्वतखोरी, आर्थिक अनियमितताओं और बजट के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। अजय दुबे ने आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारियों से पदोन्नति के नाम पर लाखों रुपये की मांग की गई। इसके अलावा बोर्ड के बजट के खर्च और औद्योगिक इकाइयों से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
निलंबन और उच्चस्तरीय जांच की मांग
अजय दुबे ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, नियुक्ति प्रक्रिया की वैधानिकता की पड़ताल करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि नियमों की अनदेखी कर लिए गए फैसलों की भी जांच होनी चाहिए।
अध्यक्ष ने नहीं दिया अपना पक्ष
इस मामले में मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष अनिरुद्ध मुखर्जी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इन गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं और मामले में जांच के आदेश दिए जाते हैं या नहीं।
Created On :  

