Maharashtra Politics: ‘वंदे मातरम’ पर सियासी संग्राम तेज, भाजपा-कांग्रेस ने एक-दूसरे पर लगाए आरोप

‘वंदे मातरम’ पर सियासी संग्राम तेज, भाजपा-कांग्रेस ने एक-दूसरे पर लगाए आरोप
‘वंदे मातरम’ को लेकर देश में चल रहा राजनीतिक विवाद अब महाराष्ट्र से लेकर हिमाचल प्रदेश तक पहुंच गया है।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। ‘वंदे मातरम’ को लेकर देश में चल रहा राजनीतिक विवाद अब महाराष्ट्र से लेकर हिमाचल प्रदेश तक पहुंच गया है। भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने एक-दूसरे पर राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर सवाल उठाए हैं। भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि हिमाचल प्रदेश विधानसभा के स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन में राष्ट्रगान के दौरान भाजपा विधायकों के व्यवहार पर सवाल खड़े किए। वहीं, महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता अतुल लोंढे ने भाजपा नेता किरीट सोमैया के आरोपों का जवाब देते हुए इतिहास का हवाला दिया।

भाजपा विधायक ने कांग्रेस के फैसले पर उठाए सवाल

मुंबई से भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कांग्रेस कार्यसमिति की ओर से ‘वंदे मातरम’ को लेकर लिए गए फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के एक कार्यक्रम में राष्ट्रगीत के दौरान सोनिया गांधी की ओर से इसे बीच में रोकने का प्रयास किया गया था।

उपाध्याय ने कहा कि इसके बाद कांग्रेस ने अपने कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के सिर्फ दो पद गाने का निर्णय लिया। उन्होंने सवाल किया कि जब संसद ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगीत के रूप में मान्यता दी है और इसके पूरे गीत को गाने पर कोई रोक नहीं है, तो कांग्रेस केवल दो पदों तक इसे सीमित क्यों रखना चाहती है।

1937 के घटनाक्रम का किया जिक्र

संजय उपाध्याय ने अपने आरोपों के समर्थन में 1937 के राजनीतिक घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय मुस्लिम लीग की आपत्तियों के बाद कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम’ के कुछ हिस्सों से दूरी बनाई थी।

भाजपा विधायक ने इसी मुद्दे को देश के विभाजन और पाकिस्तान के गठन से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि क्या आज ‘वंदे मातरम’ के पूरे स्वरूप पर आपत्ति जताकर कांग्रेस फिर उसी राजनीतिक सोच की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कांग्रेस से राष्ट्रगीत के सम्मान और इसके पूर्ण स्वरूप को लेकर अपना रुख साफ करने की मांग की।

हिमाचल में स्पीकर ने भाजपा पर किया पलटवार

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने भाजपा विधायक के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने विधानसभा में राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही की शुरुआत राष्ट्रगान से होती है, जबकि ‘वंदे मातरम’ का गायन अंत में किया जाता है।

पठानिया ने दावा किया कि जिस दिन विवाद हुआ, उस दिन सदन की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई थी। उनके अनुसार, राष्ट्रगान शुरू होने के साथ ही भाजपा के कुछ सदस्य अपनी सीटों पर बैठने के बजाय नारे लगाने लगे।

स्पीकर ने सवाल उठाया कि ऐसे में राष्ट्रगान के सम्मान से जुड़े सवाल भाजपा से ही क्यों नहीं पूछे जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम को देखने के बाद जनता खुद तय कर सकती है कि राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के सम्मान का उल्लंघन किस तरफ से हुआ।

अतुल लोंढे ने भाजपा के इतिहास पर उठाए सवाल

महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता अतुल लोंढे ने भाजपा नेता किरीट सोमैया के ‘वंदे मातरम’ और दो-राष्ट्र के सिद्धांत से जुड़े सवालों का जवाब दिया। उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए हिंदू महासभा और उससे जुड़े नेताओं की राजनीतिक भूमिका का उल्लेख किया।

लोंढे ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी और विनायक दामोदर सावरकर से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा को कांग्रेस पर विभाजन की राजनीति के आरोप लगाने से पहले अपने वैचारिक इतिहास पर भी चर्चा करनी चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि बंगाल, पंजाब और सिंध में उस दौर में हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग के बीच अलग-अलग समय पर राजनीतिक सहयोग देखने को मिला था। उन्होंने सावरकर के 1937 के कथित ‘द्विराष्ट्र सिद्धांत’ से जुड़े बयान का भी उल्लेख किया।

कांग्रेस ने कहा- देश की एकता थी प्राथमिकता

अतुल लोंढे ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और आचार्य कृपलानी जैसे नेताओं ने हमेशा देश की एकता को महत्व दिया। उनके अनुसार, ‘वंदे मातरम’ के दो छंदों को लेकर कांग्रेस का फैसला भी इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए।

लोंढे ने कहा कि कांग्रेस का तर्क था कि गीत के उन हिस्सों को प्राथमिकता दी जाए जिन्हें देश के सभी वर्गों के बीच व्यापक रूप से स्वीकार किया जा सके। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह ‘वंदे मातरम’ जैसे मुद्दों के जरिए हिंदू-मुस्लिम विवाद को राजनीतिक बहस में बार-बार लाने की कोशिश कर रही है।

इस तरह ‘वंदे मातरम’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राष्ट्रगीत के सम्मान से आगे बढ़कर कांग्रेस और भाजपा के बीच पुराने राजनीतिक और ऐतिहासिक मुद्दों की बहस में बदल गया है।

Created On :   22 Aug 2026 1:04 AM IST

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