बड़ा दावा : देश में एससी-एसटी और ओबीसी समाज को कमजोर करने की सोची समझी साजिश - खड़गे

January 25th, 2023

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर नाम लिए बगैर आरएसस-भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आज देश में एससी, एसटी और ओबीसी समाज को कमजोर करने की सोची समझी साजिश चल रही है। गरीबों को उनके अधिकारों से वंचित करने के साथ धर्म के नाम पर लोगों को बांटने और एक समुदाय के लोगों को दूसरे समुदाय से लड़ाने का काम चौबीस घंटे चल रहा है। ऐसे में हमें संविधान के बुनियादी सिद्धांतों को सुरक्षित करने की जरूरत है।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जारी बयान में खडगे ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने न्याय, समानता, आज़ादी, परस्पर भाईचारा, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद की मूल भावनाओं को आधार बनाकर इस देश के नागरिकों को समान अवसर एवं समान सुरक्षा प्रदान की है और आज हमें सबसे ज्यादा जरूरत संविधान के इन्हीं बुनियादी सिद्धांतों को सुरक्षित करने की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संविधान के खिलाफ कार्य कर रहे है। उन्होंने संविधान पर ना कभी यकीन किया है और ना इसका सम्मान किया है। आज वही लोग हर एक संवैधानिक संस्था को कमजोर करने में जुटे हुए हैं। पिछले दरवाजे से चुनी हुई सरकारों को गिरा रहे है। संस्थाओं का दुरुपयोग कर विपक्ष को डराते-धमकाते हैं, झूठे मुकदमों में फंसा रहे हैं। विश्वविद्यालयों में छात्रों के बीच नफरत के बीज बोया जा रहा है। अपने अरबपति मित्रों को देश की संपत्ति बेचते है।

उन्होंने कहा कि उन्हीं की मदद से मीडिया को अपने चंगुल में करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे सरकार की सच्चाई लोगों के सामने उजागर ना हो पाए। खड़गे ने कहा कि देश का हर एक संस्थान जो स्वतंत्र रूप से संविधान के अनुरूप चल रहा था, उसमें अपने लोगों को बैठाकर उसे अपने वश में करने का षड्यंत्र जारी है। जानबूझकर न्यायपालिका से टकराव करने के लिए हमले कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता के आंकडे मोदी सरकार की विफलताओं को बयां कर रहे हैं। इतना ही नहीं एससी, एसटी और ओबीसी समाज को कमजोर करने की सोची समझी साजिश चल रही है। धर्म के नाम पर लोगों को बांटना और एक समुदाय के लोगों को दूसरे समुदाय से लड़ाने का काम चौबीस घंटे चल रहा है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे मिलजुल कर अपने संविधान और संवैधानिक संस्थानों को मजबूत बनाने और न्यायपालिका पर हो रहे आक्रमण के खिलाफ खड़े हों।