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नहीं रहीं बोमन ईरानी की मां, निधन से पहले मांगे थे मलाई कुल्फी और कुछ आम 

नहीं रहीं बोमन ईरानी की मां, निधन से पहले मांगे थे मलाई कुल्फी और कुछ आम 

डिजिटल डेस्क,मुंबई।  बॉलीवुड जगत से एक बार फिर बुरी खबर है। हाल ही में एक्टर बोमन ईरानी की मां जेरबानू का निधन हो गया है। जेरबानू की उम्र 94 वर्ष थी। इस बात की जानकारी बोमन ने सोशल मीडिया के जरिए साझा की है। हालांकि, उनकी मां का निधन किस वजह से हुआ हैं,ये बात अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। बोमन की मां को बॉलीवुड के तमाम सितारें और उनके फैंस सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे है। एक्टर ने अपनी मां के निधन पर एक इमोशनल नोट शेयर किया, जिसमें उन्होंने लिखा,कल रात उनने मलाई कुल्फी और कुछ आम मांगे। वह चाहती तो चांद और तारे मांग सकती थीं। दरअसल, बोमन अपनी मां के काफी करीब थे और उनकी मां भी बोमन से बहुत प्यार करती थी। बता दें कि, बोमन के पिता नहीं थे इसलिए मदर ईरानी ने ही बोमन को मां और पिता दोनों का प्यार दिया। 

बोमन ईरानी हर साल फादर्स डे पर अपने पिता की जगह मां को विश किया करते थे क्योंकि, जब एक्टर 32 साल के थे तब उनके पिता ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था और अब 94 साल की उम्र में मां भी नहीं रहीं। बोमन ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर मां की एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि, मदर ईरानी का आज सुबह नींद में ही शांति से निधन हो गया। जेर 94 वर्ष की थी। उन्होंने मेरे लिए माता और पिता दोनों की भूमिका निभाई, जब वह 32 वर्ष की थीं। वह अद्भुत आत्मा थी। मजेदार कहानियों से भरी हुई, जो केवल वह ही बता सकती थी। सबसे लंबी भुजा जो हमेशा अपनी जेब में कुछ न कुछ टटोलता था, तब भी जब वहाँ बहुत कुछ नहीं था। जब उन्होंने मुझे फिल्मों में भेजा, तो कहा कि 'पॉपकॉर्न मत भूलना'। वह अपने भोजन और अपने गीतों से प्यार करती थी और वह एक फ्लैश में विकिपीडिया और आईएमडीबी की तथ्य-जांच करती रहती थी। तीक्ष्ण, तीक्ष्ण, तीक्ष्ण, अंत तक। वह हमेशा कहती थीं, ''आप ऐसे अभिनेता नहीं हैं, जो लोग आपकी तारीफ करें। आप केवल एक अभिनेता हैं इसलिए आप लोगों को स्माइल दे सकते हैं।" "लोगों को खुश करो" उन्होंने कहा। कल रात उन्होंने मलाई कुल्फी और कुछ आम मांगे। वह चाहती तो चाँद और तारे माँग सकती थी। वह थी, और हमेशा रहेगी......एक स्टार।

बोमन की मां से पहले 'द लंचबॉक्स' की कास्टिंग डायरेक्टर सहर अली लतीफ का भी निधन हो चुका है। सहर महज 40 साल की थी। रिपोर्ट्स की मानें तो उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुई थी। उनकी किडनी ने काम करना बंद कर दिया था, जिसकी वजह से उन्हें मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती करवाया गया। लगभग 8 दिनों तक जिंदगी और मौत से लड़ते हुए सहर ने अस्पताल में अंतिम सांसें ली। बता दें कि, सहर ने 'द लंचबॉक्स' के अलावा 'दुर्गामती' जैसी फिल्मों में भी काम किया था। फिल्म 'द लंचबॉक्स' की एक्ट्रेस निम्रत कौर ने अपनी और सहर अली लतीफ की एक फोटो शेयर की और लिखा था कि, "मुंबई के सबसे दयालु, सबसे प्यारे लोगों में से एक ने मुझे अपना जीवन उपहार में दिया। अभी भी इस असत्य समाचार को समझने का प्रयास कर रही हूं....मेरे सबसे प्यारे, सबसे प्यारे सेहर के प्रकाश में यात्रा करो। जीवन की अप्रत्याशित, भयानक कमी चकरा देने वाली बनी हुई है... दूसरी तरफ आपसे मिलने का इंतजार है।"

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।