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सुशांत के पिता की याचिका खारिज, अभिनेता पर आधारित फिल्म 11 जून को होगी रिलीज

सुशांत के पिता की याचिका खारिज, अभिनेता पर आधारित फिल्म 11 जून को होगी रिलीज

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के पिता की याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने सुशांत पर आधारित फिल्में न बनने और रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी। लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने केके सिंह की याचिका को खारिज कर दिया और अब फिल्म 'न्याय: द जस्टिस' 11 जून को रिलीज की जाएगी।

बता दें कि, 14 जून 2021 को सुशांत की पहली पुण्यतिथि के पहले फिल्म को रिलीज कर दिया जाएगा। सुशांत के पिता और उनकी बहनें नहीं चाहते हैं कि, अभिनेता के नाम पर, उनकी जिंदगी के किसी भी हिस्से पर या उनकी मौत पर आधारित कोई भी फिल्म बनाई जाए। परिवार का मानना हैं कि, ऐसा करने से ये फिल्में उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन करेंगी और इससे सुशांत की मौत पर चल रही जांच भी कही न कही प्रभावित होगी। फिल्मों की बात करें तो "न्याय: द जस्टिस, शशांक, सुसाइड या मर्डर: ए स्टार वाज लॉस्ट" जैसी फिल्में कथित तौर पर सुशांत की मौत पर आधारित है। 

फैसले के बाद बहन का रिएक्शन 

सुशांत के पिता की याचिका खारिज होने बाद अभिनेता की बहन प्रियंका सिंह का पहला रिएक्शन सामने आया है। दरअसल, प्रियंका सिंह ने एक ट्वीट करते हुए लिखा कि, "सबसे बर्बाद और शब्दों से परे हैरान करने वाला #SSR........" बता दें कि, प्रियंका कोर्ट के इस फैसले से बेहद दुखी हैं और उन्होंने सुशांत के लिए न्याय की भी मांग की है। 

हाल ही में सुशांत की बहन मीतू सिंह ने ट्वीट के जरिए उन लोगों को फटकार लगाई थी, जो सुशांत के नाम पर फिल्म, किताब और बिजनेस कर रहे है। दरअसल, सुशांत की मौत के बाद से कई लोगों ने उनके नाम पर फंड रेजिंग का काम शुरु कर दिया और अवैध धंधे चलाकर मासूम लोगों से पैसे लेना शुरु कर दिया है,जिसको लेकर मीतू सिंह ने लिखा था कि, "हम यह बात सभी के ध्यान में लाना चाहते हैं कि, परिवार ने एसएसआर के नाम पर किसी को दान या धन जुटाने के लिए अधिकृत नहीं किया है और किसी को भी एसएसआर के बारे में या उससे संबंधित कुछ भी करने की सहमति नहीं है, चाहे वो फिल्म हो, किताब हो या एक व्यापार।" अपने दूसरे ट्वीट मे मीतू लिखती हैं कि, "दुर्भाग्य से, यह हमारे संज्ञान में आया है कि कुछ लोग अपने निजी लाभ के लिए इस स्थिति का लाभ उठा रहे हैं जो कि एक अमानवीय कृत्य है। इन सभी लोगों को ऐसा करने से बचना चाहिए।"

अपने तीसरे ट्वीट में मीतू ने लिखा कि, हमारे परिवार को इस विनाशकारी समय को लाभ में बदलने का शौक नहीं है और हम किसी को ऐसा नहीं करने देंगे। #JusticeForSushantSinghRajput #SSRians #SushantSinghRajput....बता दें कि, 14 जून साल 2020 को सुशांत सिंह राजपूत अपने मुंबई के फ्लैट में मृत पाए गए थे, जिसके बाद से उनके केस की जांच की जा रही है लेकिन मौत की वजह अब तक साफ नहीं हो पाई है। हालांकि, उस वक्त मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया था, जिस पर परिवार वालों का कहना हैं कि, सुशांत कभी आत्महत्या नहीं कर सकते है। 


 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।