Jabalpur News: अब दसवीं में 5 नहीं 6 विषयों में पास होना जरूरी होगा, बेस्ट ऑफ फाइव बंद

बेस्ट आफ 5 से बढ़ गया था रिजल्ट प्रतिशत, अब शिक्षकों और प्राचार्यों के लिए रहेगी अच्छे परिणाम लाने की चुनौती, 12 वीं में देने होंगे 6 पेपर

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। अभी तक दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में केवल 5 विषयों में पास होकर ही छात्र-छात्राओं को उत्तीर्ण मान लिया जाता था लेकिन अब उन्हें 7 विषयों में पास होना जरूरी होगा। इसका मूल कारण यह है कि शिक्षा विभाग ने 10 वीं की परीक्षा में बेस्ट ऑफ फाइव योजना समाप्त कर दी है। इससे शिक्षा सत्र का परीक्षा परिणाम प्रभावित होने की भी आशंका जताई जा रही है। यही वजह है कि शिक्षा विभाग स्कूलों की कड़ी निगरानी करेगा ताकि बच्चों को बेहतर तरीके से पढ़ाया जा सके जिससे वे सभी विषयों में पास हो सकें।

माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित दसवीं की बोर्ड परीक्षा के लिए शिक्षण सत्र 2026-27 के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है। छात्र-छात्राएं 9 सालों से जिस बेस्ट ऑफ फाइव सिस्टम के सहारे छात्र बोर्ड परीक्षाओं में अधिक नंबर ला रहे थे अब उसे समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। नए पैटर्न के तहत कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों को 6 की जगह 7 और 12वीं के विद्यार्थियों को 5 की जगह 6 विषयों की परीक्षा देनी होगी। यह बदलाव इस वजह से किया जा रहा है क्योंकि छात्र परीक्षा तो पास कर ले रहे हैं लेकिन विषयों की गहराई से जानकारी न होने के कारण सरकारी नौकरियों की दौड़ में पिछड़ रहे हैं। बोर्ड ने यह प्रस्ताव लोक शिक्षण संचालनालय को भेजा है,जहां से हरी झंडी मिलने के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा।

कुछ इस तरह रहेगा बदलाव का समीकरण

10वीं में अब 6 के बजाय 7 पेपर देने होंगे। इसमें हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान के साथ एनएसक्यूएफ व्यावसायिक कोर्स अनिवार्य रूप से जुड़ जाएगा। रिजल्ट बेस्ट ऑफ सिक्स यानी 7 में से 6 श्रेष्ठ अंक के आधार पर बनेगा। वहीं 12वीं में अब 5 के बजाय 6 पेपर देने होंगे और रिजल्ट बेस्ट ऑफ फाइव 6 में से 5 श्रेष्ठ अंक के आधार पर बनेगा। जानकारों का कहना है कि 2017 में जब 10वीं का रिजल्ट गिरकर 49.86 प्रतिशत रह गया था, तब छात्रों को राहत देने के लिए यह सिस्टम लाया गया था। इससे उत्तीर्ण प्रतिशत बढ़ गया और वर्ष 2018 में रिजल्ट 66.54 प्रतिशत रहा, लेकिन छात्रों ने गणित, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे कठिन विषयों को पढ़ना छोड़ दिया।

पहले ऐसी थी योजना

बेस्ट फाइव प्रणाली में यदि किसी छात्र ने 6 विषयों की परीक्षा दी है, तो मार्कशीट बनाते समय उन 6 में से जिनमें सबसे ज्यादा अंक आए हैं, ऐसे सिर्फ 5 विषयों के अंकों को जोड़ा जाता है, यदि कोई छात्र 6 में से 5 विषयों में पास है और किसी एक विषय में फेल हो जाता है या उसमें कम अंक आते हैं, तब भी उसे बेस्ट ऑफ फाइव नियम के तहत पास मान लिया जाता है। जिस विषय में सबसे कम अंक होते हैं, उसके अंकों को कुल प्रतिशत की गणना में शामिल नहीं किया जाता।

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