जबलपुर न्यूज: एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम भी देरी की भेंट चढ़ा

एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम भी देरी की भेंट चढ़ा
परीक्षा के बाद अब परिणाम का इंतजार, दिसंबर 2025 में होनी थीं प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं, अगस्त में हुईं; अक्टूबर तक परिणाम घोषित नहीं

डिजिटल डेस्क जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में परीक्षा और परिणामों में देरी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत संचालित एक वर्षीय स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी भी विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था में हो रही देरी से परेशान हैं। हालात यह हैं कि जिन विद्यार्थियों के दोनों सेमेस्टर की परीक्षाएं जून 2026 तक पूरी हो जानी चाहिए थीं, वे अक्टूबर तक प्रथम सेमेस्टर के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। इससे विद्यार्थियों के सामने आगे की पढ़ाई, शैक्षणिक योजनाओं और समय पर पाठ्यक्रम पूरा होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं दिसंबर 2025 में आयोजित होनी थीं, लेकिन विश्वविद्यालय ने इन परीक्षाओं का आयोजन जुलाई-अगस्त 2026 में किया। विश्वविद्यालय के 17 जुलाई 2026 के परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार, एमए अंग्रेजी, हिंदी, मनोविज्ञान, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, इतिहास, अर्थशास्त्र सहित विभिन्न विषयों की प्रथम सेमेस्टर परीक्षाएं 29 जुलाई से शुरू हुईं। वहीं, एमकॉम और विभिन्न एमएससी पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं भी इसी अवधि में निर्धारित की गई थीं। कई विषयों की परीक्षाएं 5 अगस्त 2026 तक चलीं।

दो सेमेस्टर पूरे होने थे, पहले का परिणाम भी नहीं आया-

एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम की निर्धारित समय-सीमा के अनुसार जून 2026 तक दोनों सेमेस्टर की परीक्षाएं पूरी हो जानी चाहिए थीं। लेकिन प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा ही निर्धारित समय से कई महीने बाद आयोजित हुई। अब अक्टूबर 2026 बीतने को है, इसके बावजूद प्रथम सेमेस्टर का परिणाम घोषित नहीं हुआ है। ऐसे में दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा और परिणाम की समय-सीमा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

योजनाओं पर असर-

परीक्षा और परिणाम में लगातार हो रही देरी का सीधा असर विद्यार्थियों की शैक्षणिक योजनाओं पर पड़ता है। एक वर्षीय पाठ्यक्रम का उद्देश्य कम समय में स्नातकोत्तर शिक्षा पूरी करने का अवसर देना है, लेकिन परीक्षा चक्र ही समय पर पूरा नहीं होने से पाठ्यक्रम की निर्धारित अवधि और उसके उद्देश्य पर सवाल उठने लगे हैं। विद्यार्थियों को आशंका है कि यदि परिणाम और अगले सेमेस्टर की प्रक्रिया में इसी तरह देरी होती रही, तो एक वर्षीय पाठ्यक्रम भी निर्धारित समय-सीमा से आगे खिंच सकता है।


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