रोहित शेट्टी घर फायरिंग मामला: बिश्नोई गैंग के हैंडलर आरजू बिश्नोई ने की पूरे हमले की फंडिंग, पुणे और आगरा दोनों मॉड्यूल को लोनकर के जरिए मुहैया कराई थी लॉजिस्टिक सपोर्ट

बिश्नोई गैंग के हैंडलर आरजू बिश्नोई ने की पूरे हमले की फंडिंग, पुणे और आगरा दोनों मॉड्यूल को लोनकर के जरिए मुहैया कराई थी लॉजिस्टिक सपोर्ट
  • शूटर दीपक शर्मा ने यूट्यूब से सीखा था बंदूक चलाना
  • 3 लाख के लालच में वारदात को अंजाम देने के लिए हो गया था तैयार
  • 1600 मोबाइल नंबरों को खंगालकर और 8 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद गोलू पंडित तक पहुंची थी क्राइम ब्रांच

Mumbai News. दिवाकर सिंह. फिल्ममेकर रोहित शेट्टी के घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में जैसे जैसे जांच आगे बढ़ रही है, नए नए सनसनीखेज खुलासे सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में सबसे बड़ा खुलासा बिश्नोई गैंग के मौजूदा हैंडलर आरजू बिश्नोई को लेकर हुआ है। जांच में पता चला है कि रोहित शेट्टी के घर पर हमले की पूरी फंडिंग आरजू ने की थी। इतना ही नहीं, उसने इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए पुणे और आगरा में सक्रिय मॉड्यूल को अपने नेटवर्क के जरिए जोड़कर काम कराया। इन दोनों मॉड्यूल के बीच समन्वय और संसाधनों की आपूर्ति शुभम लोनकर के जरिए कराई गई, जिसने दोनों मॉड्यूल को आर्थिक और लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराया। इस दौरान आरजू ने कई बार पुणे और आगरा मॉड्यूल में शामिल आरोपियों से बातचीत भी की थी और उन्हें वारदात को अंजाम देने के लिए प्रोत्साहित भी किया था।

जांच में सामने आया है कि इस पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए आरजू के कहने पर दीपक शर्मा को शूटर के तौर पर गोलू पंडित ने चुना था। दीपक का कोई बड़ा आपराधिक बैकग्राउंड नहीं है, लेकिन 3 लाख के लालच में वह वारदात को अंजाम देने के लिए तैयार हो गया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दीपक ने बंदूक चलाना यूट्यूब वीडियो देखकर सीखा था। उसने ऑनलाइन वीडियो के जरिए हथियार चलाने की बारीकियां समझीं और उसी के आधार पर खुद को इस वारदात के लिए तैयार किया। पुलिस के मुताबिक, दीपक इस पूरे नेटवर्क से सीधे तौर पर नहीं जुड़ा था, बल्कि उसे बीच की कड़ी के तौर पर गोलू पंडित के जरिए इस साजिश में शामिल किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि गोलू और दीपक एक-दूसरे को पहले से जानते थे, जिससे इस साजिश को अंजाम देना आसान हो गया। पूरे नेटवर्क में कम्युनिकेशन के लिए सिग्नल ऐप का इस्तेमाल किया गया। यह ऐप एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के कारण सुरक्षित माना जाता है, जिससे पुलिस के लिए आरोपियों की बातचीत को ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो गया। सूत्रों के मुताबिक, गोलू पंडित लगातार इसी ऐप के जरिए आरजू और लॉरेंस बिश्नोई से बातचीत करता था। गोलू की लॉरेंस से बातचीत आरजू के जरिए ही होती थी। गोलू को बिश्नोई गैंग ने पैसे का लालच देकर शूटरों का रिक्रूटमेंट करने की जिम्मेदारी सौंपी थी, हालांकि उसे कितने पैसे मिले, इसकी जांच जारी है। क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गोलू पंडित को गिरफ्तार करने के लिए जांच टीमों ने बेहद बारीकी और धैर्य के साथ काम किया। टीम ने करीब 8 दिनों तक आगरा में लगातार ग्राउंड पर ऑपरेशन चलाया।

इस दौरान तकनीकी जांच के तहत करीब 1600 मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया गया। इनमें कई नंबर ऐसे थे जो हाल ही में एक्टिव हुए थे और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े पाए गए।मोबाइल टावर लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और नेटवर्क एनालिसिस के आधार पर पुलिस ने संदिग्धों की मूवमेंट को ट्रैक किया। इसी दौरान एक अहम मोबाइल नंबर सामने आया, जिसने इस केस को सुलझाने में निर्णायक भूमिका निभाई। इस सुराग के आधार पर क्राइम ब्रांच गोलू पंडित तक पहुंचने में सफल रही।सूत्रों के अनुसार, जब पुलिस टीम गोलू पंडित की लोकेशन पर पहुंची, तो उसने सरेंडर कर दिया।फिलहाल उससे पूछताछ जारी है। पूछताछ के दौरान इस केस में एक बड़ा पेंच हथियार को लेकर भी सामने आया है। दीपक का कहना है कि गोलू ने उसे बंदूक दी थी, जबकि गोलू का दावा है कि दीपक खुद हथियार लेकर मुंबई आया था। पुलिस अब इस विरोधाभास को सुलझाने के लिए फॉरेंसिक और टेक्निकल सबूत जुटा रही है। गोलू के जरिए अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है।

Created On :   23 March 2026 10:15 PM IST

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