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विश्वास की महफिल और मीडिया पार्टनर हम: कहीं मौका जाए ना छूट - दिल थाम के रखिए, 5 अप्रैल को आ रहे है शब्दों के जादूगर कुमार विश्वास लेकर बेहतरीन रचनाएं
Mumbai News. आप और हम, "हम" यानी दैनिक भास्कर जो खास आपके लिए साझा रहे हैं, डॉ. कुमार विश्वास रचनाओं से सजी महफिल। तो चलिए मायानगरी की इस भागदौड़ वाली दुनिया में एक छोटा सा ठहराव लेते हैं। वो ठहरा जो सुकून दे। 5 अप्रैल को शब्दों के जादूगर और नई पीढ़ी को काव्यों के वैभव से जोड़ने वाले डॉ. कुमार विश्वास पहली बार नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर के ग्रैंड थिएटर में प्रस्तुति देने जा रहे हैं। यह शाम केवल काव्य-पाठ नहीं, बल्कि भारतीय मेधा और भाषाई सौंदर्य का एक विराट संगम होगी। खास बात, आपका अपना अखबार और डिजिटल प्लेटफार्म दैनिक भास्कर कार्यक्रम का मीडिया पार्टनर है।
डॉ. कुमार विश्वास साहित्य और मंचीय काव्य-पाठ के ऐसे लोकप्रिय कवि हैं, जिन्होंने सरल, भावनात्मक और प्रभावशाली शैली से लाखों लोगों के दिलों में जगह खास बनाई है। वे एक कुशल वक्ता, शिक्षक और सामाजिक चिंतक भी हैं।
कुमार विश्वास का जन्म 10 फरवरी 1970 को उत्तर प्रदेश में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने हिंदी साहित्य में उच्च शिक्षा प्राप्त की और पीएचडी की उपाधि हासिल की। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने एक प्राध्यापक के रूप में की, लेकिन उनकी असली पहचान कवि सम्मेलनों के मंच से बनी। वे देश-विदेश में आयोजित अनेक कवि सम्मेलनों में भाग लेकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते रहे हैं।
वे प्रेम, विरह, देशभक्ति और सामाजिक विषयों को अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हैं। उनकी खास रचना “कोई दीवाना कहता है” आज भी युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। इस कविता में उन्होंने प्रेम की संवेदनाओं को बड़े ही सरल और हृदयस्पर्शी शब्दों में व्यक्त किया है। इसके अलावा “तुम्हारी याद आती है”, “मैं हिंदुस्तान हूं” और “एक पगली लड़की के बिन” जैसी रचनाएं खूब सराही गई हैं।
कुमार विश्वास को यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों लोगों ने देखा - सुना और जमकर सराहा है। विशेष रूप से युवाओं में उनकी रचनाएं अत्यधिक लोकप्रिय हैं, क्योंकि वे दिल की भावनाओं को सरल और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करते हैं।
कुमार विश्वास ने उस दौर में हिंदी कविता को जन-जन की मुख्यधारा में वापस खड़ा किया जब इसे केवल अकादमिक चर्चाओं तक सीमित माना जाने लगा था। वह जब मंच पर होते हैं, तो महज़ पंक्तियां नहीं पढ़ते, बल्कि समकालीन परिवेश, सामाजिक विसंगतियों और मानवीय संवेदनाओं का एक जीवंत शब्द-चित्र बुनते हैं। उनके काव्य में जहां मीरा और कबीर की आध्यात्मिक तड़प है, वहीं आज के दौर के युवाओं की बेचैनी और प्रेम का अल्हड़पन भी समाहित है।
हृदय से संवाद: हास्य की मिठास और दर्शन की गहराई
इस विशेष कार्यक्रम में दर्शकों को उनकी सोच और सहज प्रस्तुति का अनुभव मिलेगा। वह जीवन के गंभीर दर्शन को भी हास्य और व्यंग्य के साथ इस तरह परोसते हैं कि श्रोता मुग्ध होकर कब जीवन की बड़ी सच्चाइयों से रूबरू हो जाता है, उसे पता भी नहीं चलता।
आंसू अगर लफ़्ज़ों में बह निकले तो आदमी शायर!
कला और संवेदनाओं के इसी अटूट रिश्ते को रेखांकित करते हुए डॉ. कुमार विश्वास ने कहा, ‘आंसू आंखों से निकले तो कायर, और आंसू अगर लफ़्ज़ों में बह निकले तो आदमी शायर! कविता मेरे लिए महज मंच का व्यवसाय नहीं, बल्कि अपने पुरखों की विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का उत्तरदायित्व है।’
'काव्य-लहर' का जादू
इस कार्यक्रम को एक 'इमर्सिव एक्सपीरियंस' की तरह डिजाइन किया गया है, जहां हंसी के फव्वारे भी होंगे और भावुक कर देने वाले पल भी। चाहे आप उनके गीतों के दीवाने हों या उनके तार्किक संवादों के प्रशंसक, 5 अप्रैल को एनएमएसीसी में होने वाली यह जुगलबंदी आपके दिलो-दिमाग पर एक अमिट छाप छोड़ने के लिए तैयार है।
https://youtu.be/K5cAQZ6uVVU?si=xyPK5iOwJEiltm6W
कुमार विश्वास की लोकप्रिय रचनाओं में एक
“कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है…”
Created On :   23 March 2026 7:51 PM IST












