प्रदर्शन: महाराष्ट्र की समृद्ध हथकरघा परंपरा का प्रदर्शन, फैशन सो में दिखी राज्य की पारंपरिक साड़ी की समृद्ध विरासत

महाराष्ट्र की समृद्ध हथकरघा परंपरा का प्रदर्शन, फैशन सो में दिखी राज्य की पारंपरिक साड़ी की समृद्ध विरासत
  • राष्ट्रीय राजधानी में रंग-रेशा: महाराष्ट्र के धागे, भारत के रंग का हुआ आयोजन
  • दिखी राज्य की पारंपरिक साड़ी की समृद्ध विरासत

New Delhi News. महाराष्ट्र की हथकरघा विरासत और पारंपरिक साड़ी की सुंदरता का एक अनूठा उत्सव राष्ट्रीय राजधानी स्थित महाराष्ट्र सदन में मनाया गया। ' रंग-रेशा: महाराष्ट्र के धागे, भारत के रंग' नामक इस फैशन शो का आयोजन हथकरघा विकास आयुक्त और महाराष्ट्र सदन की स्थानिक आयुक्त रेजिडेंट द्वारा, ‘शिखा की कारीगरी’ के सहयोग से किया गया। महाराष्ट्र सदन की स्थानिक आयुक्त आर. विमला ने इस कार्यक्रम के बारे में कहा कि रंग-रेशा महाराष्ट्र की विरासत बुनाई और भारत के कलात्मक रंगों को एक साथ लाता है। यह साड़ी को एक ‘पहनने योग्य कला’ के रूप में मनाता है, जहाँ हर साड़ी की पहनने के तरीके की एक अलग कहानी बयां करती है। रैंप पर एक सांस्कृतिक यात्रा के रूप में परिकल्पित यह प्रस्तुति, महाराष्ट्र की हथकरघा परंपराओं की समृद्धि को उजागर करने का प्रयास करती है, साथ ही साड़ी को कलात्मक अभिव्यक्ति के एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में पुनः परिभाषित करती है।

विमला ने आगे कहा कि महाराष्ट्र की एक जीवंत और विशिष्ट हथकरघा विरासत है, और ‘रंग-रेशा’ उस विरासत को एक गरिमापूर्ण और समकालीन तरीके से मनाने का एक प्रयास है। फैशन शो का उद्देश्य न केवल सुंदर साड़ियों को प्रदर्शित करना है, बल्कि उन बुनकरों, कारीगरों और रचनात्मक प्रतिभाओं का सम्मान करना भी है, जिनका काम इन परंपराओं को जीवित रखता है।

इस शो की परिकल्पना जानी-मानी कलाकार और फैशन डिज़ाइनर शिखा अजमेरा ने की , जिनका हाथ से बनाया गया कलेक्शन इस प्रस्तुति के दौरान दिखाया गया।

'शिखा की कारीगरी'

यह एक अनोखा क्रिएटिव लेबल है, जो हथकरघा साड़ियों को पहनने लायक कला के कैनवस में बदलने के लिए जाना जाता है। यह ब्रांड पारंपरिक वस्त्र विरासत और हाथ से बनाई गई कलात्मक अभिव्यक्ति को एक साथ लाता है, जिससे ऐसी साड़ियां बनती हैं जो अपनी जड़ों में तो पारंपरिक हैं, लेकिन दिखने में आधुनिक हैं। "शिखा की कारीगरी" हर साड़ी की अपनी अलग पहचान का जश्न मनाटी है। अपने काम के ज़रिए, यह ब्रांड हथकरघा को सिर्फ़ एक कपड़ा ही नहीं, बल्कि एक कलात्मक और सांस्कृतिक अनुभव के तौर पर बढ़ावा देना चाहता है।

विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने कहा कि 'रंगरेशा' सिर्फ़ एक फैशन शो से कहीं ज़्यादा होने का वादा करता है; यह बुनकरों, कलाकारों और साड़ी की कभी न खत्म होने वाली सुंदरता को एक श्रद्धांजलि है। महाराष्ट्र के धागों और भारत के रंगों को एक साथ लाकर, यह परंपरा की सुंदरता का जश्न एक आधुनिक और प्रभावशाली रूप में मनाता है।

Created On :   22 March 2026 8:15 PM IST

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