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विधान परिषद: सीएम बोले - उपसभापति का निर्देश ब्रह्मवाक्य नहीं, महाजन ने कहा- खडसे लोगों को ब्लैकमेल करने सवाल भेजते हैं क्या, केंद्र से कपास खरीदी अवधि बढ़ाने की मांग

Mumbai News. विधान परिषद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विधानमंडल के पीठासीन अधिकारी की ओर से दिया निर्देश राज्य सरकार के लिए ब्रह्मवाक्य नहीं है। उन्होंने कहा कि विधान परिषद के सभापति, उपसभापति, तालिका सभापति अथवा विधानसभा के पीठासीन अधिकारी किसी मामले में परिस्थिति के अनुरूप सरकार को निर्देश दे सकते हैं। लेकिन उनका निर्देश मतलब सरकार के लिए ब्रह्मवाक्य नहीं है। सरकार संबंधित मामले में वास्तविकता के आधार पर ही कार्रवाई करेगी। मंगलवार को सदन में शिवसेना (उद्धव) विधायक अनिल परब ने इस बारे में मुद्दा उठाया था। परब ने कहा कि सातारा जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव में मतदान के समय हुए हंगामे और मंत्रियों के साथ हुई हाथापाई मामले में सोमवार सुबह उपसभापति नीलम गोर्हे ने सातारा पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी को निलंबित करने का आदेश दिया था। इसके बाद दोपहर के समय सदन के सभापति राम शिंदे ने संबंधित निर्देश पर रोक लगा दी थी। सभापति ने इस मामले में फैसला आरक्षित रखा है। इसलिए यह साफ होना चाहिए कि उपसभापति के पास निलंबित करने का अधिकार है अथवा नहीं ? इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं सभापति से माफी मांगते हुए कहना चाहता हूं कि सभापति अथवा विधानसभा अध्यक्ष कार्यपालिका के दायरे में हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं। पीठासीन अधिकारी को कार्यपालिका में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक आईएएस अधिकारी कैबिनेट मंत्री के पास ब्रिफिंग के लिए नहीं आए थे। इसलिए विधानसभा में तालिका अध्यक्ष ने उस आईएएस अधिकारी को निलंबित करने का निर्देश दिया था। बाद में उनका निलंबन वापस लिया गया। लेकिन यह घटना विधायिका के परिसर में हुई थी। इसलिए मुझे लगता है कि तालिका अध्यक्ष का उस समय का आदेश सही था। लेकिन सातारा जिला परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव की घटना विधानमंडल के बाहर हुई थी। इसलिए इस मामले में वास्तविकता के आधार पर कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी मामले में सच्चाई और तथ्य नहीं होगा तो सरकार को विधानमंडल के पीठासीन अधिकारी को यह स्पष्ट कहने का अधिकार है कि संबंधित मामले में कार्रवाई संभव नहीं है। इसके बाद सभापति ने कहा कि मैं इस मामले में फैसला उचित समय पर घोषित करूंगा
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केंद्र सरकार से कपास खरीद की अवधि बढ़ाने की मांग, विप में विपणन मंत्री रावल ने दी जानकारी
प्रदेश में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कपास खरीदने के लिए केंद्र सरकार से खरीद प्रक्रिया की अवधि बढ़ाने की मांग की गई है। विधान परिषद में प्रदेश के विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने यह जानकारी दी। सदन में नियम 97 के तहत राकांपा (अजित) के विधायक संजय खोडके ने कपास खरीद का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में रावल ने कहा कि राज्य में किसानों से 137 लाख क्विंटल कपास 10,883 करोड़ रुपए का खरीदा गया है। पिछले साल के 128 तुलना में इस साल के लिए 168 खरीद केंद्र मंजूर किए गए थे। जिसमें से 162 खरीद केंद्रों पर कपास खरीदी हुई है। रावल ने कहा कि पहले 15 फरवरी तक कपास खरीदी की अवधि थी। जिसके बाद 15 मार्च तक अवधि बढ़ाने के बाद 9.90 लाख क्विंटल अतिरिक्त कपास खरीदा गया है। अब राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से एक बार फिर कपास खरीदी की अवधि बढ़ाने का आग्रह किया है।
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नई सहकारिता नीति बनाएगी सरकार – पाटील
प्रदेश में सर्वसमावेशीय नई सहकारिता नीति बनाई जाएगी। विधान परिषद में प्रदेश के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटील ने यह जानकारी दी। मंगलवार को सदन में भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर ने नियम 97 के तहत सहकारिता क्षेत्र को गति देने का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में पाटील ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का मॉडल है। इससे राज्य के सहकारिता क्षेत्र को अधिक सक्षम, पारदर्शी और गति देने के लिए जल्द ही नई सहकारिता नीति बनाई जाएगी। नई सहकारिता नीति का मसौदा बनाने के लिए 15 सदस्यीय समिति गठित की गई है। पाटील ने कहा कि कई लोगों को लगता है कि मुंबई जैसे शहर का सहकारिता विभाग से कुछ संबंध नहीं है। लेकिन मुंबई में 1 लाख 25 हजार सहकारी संस्था पंजीकृत है। जबकि राज्य भर में लगभग 2.33 लाख सहकारी संस्था कार्यरत है। पाटील ने बताया कि राज्य में 128 सहकारी और 134 निजी चीनी कारखाना है।
खडसे लोगों को ब्लैकमेल करने के लिए विप में सवाल भेजते हैं क्या - महाजन
विधान परिषद में प्रदेश के जलसंसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने प्रश्नकाल में राकांपा (शरद) के विधायक एकनाथ खडसे के अनुपस्थित रहने पर सवाल खड़े किए। मंगलवार को महाजन ने कहा कि सदन में लगातार खडसे के प्रश्नकाल के सवाल और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव आ रहा है। लेकिन खडसे बजट अधिवेशन में एक भी दिन सदन में नजर नहीं आए। आखिर जब उन्हें किसी कारण से सदन में आना नहीं है तो वह प्रश्नकाल के लिए सवाल और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव क्यों भेजते हैं? इसके पीछे उनका उद्देश्य क्या है ? खडसे लोगों को ब्लैकमेल करने के लिए विधान परिषद में सवाल भेजते हैं क्या ? इसके जवाब में राकांपा (शरद) विधायक शशिकांत शिंदे ने कटाक्ष करते हुए कहा कि खडसे बीमार हैं। उन्हें कमजोरी महसूस हो रही है। विधान परिषद में वह सवाल पूछने वाले थे। इसलिए कुछ लोगों ने नाशिक के कथित ज्योतिषि अशोक खरात के पास जाकर खडसे पर जादूटोना किया है क्या ? इसकी जांच की मांग एसआईटी से की जाएगी। शिंदे ने कहा कि महाजन का खडसे के प्रति काफी प्रेम है। इसलिए खडसे सदन में नहीं रहते हैं तो महाजन बेचैन हो जाते हैं।
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Created On :   24 March 2026 8:53 PM IST










