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विधानसभा: अजित की मौत की सीबीआई जांच की मांग को लेकर हंगामा, आरटीई के तहत छात्रों से किसी भी नाम पर फीस वसूलना गैरकानूनी, बनेगा सोशल मीडिया नियंत्रण पर कानून

Mumbai News. विधानसभा में बजट सत्र के दौरान अंतिम सप्ताह की चर्चा के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार मौत प्रकरण को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। राकांपा (अजित) विधायक रोहित पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बावजूद अब तक केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच को मंजूरी नहीं दी है। रोहित ने इसे संवेदनहीनता बताते हुए कहा कि इस मामले में न्याय के लिए प्रयास नहीं हो रहे हैं, यही कारण है कि अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को भी अपने पति की मौत की सीबीआई जांच के लिए केंद्र सरकार से गुहार लगानी पड़ रही है। विपक्ष के आरोपों पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार और अमित साटम ने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए ऐसे मामलों को उठाकर ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। इस मामले को लेकर सोमवार को चर्चा हुई लेकिन इस समय इसे उठाने का कोई औचित्य नहीं है। इस मुद्दे को लेकर सदन में कुछ देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। विपक्ष जहां जांच की मांग को लेकर आक्रामक नजर आया, वहीं सत्ता पक्ष ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया। फिलहाल, इस मामले में सीबीआई जांच को लेकर केंद्र सरकार के फैसले का इंतजार किया जा रहा है, जिस पर आगे की सियासत निर्भर करेगी।
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आरटीई के तहत छात्रों से किसी भी नाम पर फीस वसूलना गैरकानूनी: दादाजी भुसे
राज्य में आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत प्रवेश लेने वाले छात्रों से किसी भी प्रकार की फीस या ‘सामग्री’ के नाम पर पैसे वसूलना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसा करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी। यह जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने विधानसभा में दी। भाजपा सदस्य योगेश सागर द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में मंत्री भुसे ने कहा कि आरटीई कानून 2009 के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटों पर वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य है और उनकी फीस की भरपाई सरकार करती है। इसके बावजूद कुछ स्कूल अभिभावकों से अन्य नामों पर पैसे वसूल रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ है। भुसे ने बताया कि इस संबंध में 1 जुलाई 2015 को ही सभी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। यदि किसी स्कूल ने नियमों का उल्लंघन कर अभिभावकों से शुल्क लिया है, तो उसे वापस कराने के निर्देश दिए जाएंगे और संबंधित स्कूलों को नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य स्तर पर करीब 2 हजार 900 करोड़ रुपए की प्रतिपूर्ति बकाया है। हालांकि सरकार चरणबद्ध तरीके से यह भुगतान करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूल बंद करने का कोई प्रस्ताव नहीं है, लेकिन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
टास्क फोर्स की रिपोर्ट के बाद ही बनेगा सोशल मीडिया नियंत्रण पर कानून : आशिष शेलार
राज्य में नाबालिग बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर नियंत्रण के लिए सरकार टास्क फोर्स की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इसके बाद ही कोई ठोस नीति या कानून बनाया जाएगा। यह जानकारी सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री आशिष शेलार ने मंगलवार को विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान दी। विधानसभा में भाजपा सदस्य राजेश पवार ने सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग का बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया था। इस पर जवाब देते हुए मंत्री शेलार ने बताया कि अन्य राज्यों में केवल घोषणाएं हुई हैं, लेकिन ठोस कानून अब तक लागू नहीं हो पाए हैं। शेलार ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने 2 फरवरी 2026 को एक टास्क फोर्स का गठन किया है, जो नाबालिगों के सोशल मीडिया उपयोग, उसके मानसिक, शारीरिक और शैक्षणिक प्रभावों के साथ-साथ डिजिटल विज्ञापनों के असर का अध्ययन कर रही है। यह टास्क फोर्स राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नियमों का भी विश्लेषण कर अपनी सिफारिशें देगी। मंत्री शेलार ने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया या मोबाइल के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि शिक्षा में इंटरनेट की अहम भूमिका है। इसलिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। टास्क फोर्स को तीन महीने का समय दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार उम्र वेरिफिकेशन, स्क्रीन टाइम लिमिट, आईटी कानूनों में संशोधन और स्कूलों में डिजिटल सुरक्षा शिक्षा जैसे उपायों पर निर्णय लेगी। साथ ही छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाने की योजना है।
Created On :   24 March 2026 8:44 PM IST











