अंदरूनी मतभेद: पुणे शिक्षक सीट से निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को एकनाथ शिंदे ने दिया खुला समर्थन

पुणे शिक्षक सीट से निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को एकनाथ शिंदे ने दिया खुला समर्थन
  • शिंदे बोले- कुछ सीटों पर अपवाद और मैत्रीपूर्ण मुकाबला संभव
  • महायुति में मतभेद हुए उजागर

डिजिटल डेस्क, मुंबई. महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव से पहले सत्तारूढ़ महायुति में अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। अमरावती में शिवसेना (शिंदे) के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ भाजपा के बागी उम्मीदवार के मैदान में उतरने के बाद अब पुणे शिक्षक सीट पर भी गठबंधन के भीतर सियासी खींचतान तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पुणे से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे सचिन सानप को शिवसेना (शिंदे) का समर्थन देने की घोषणा की है। इस सीट पर भाजपा ने कौस्तुभ गावडे को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में शिंदे की घोषणा को भाजपा के लिए राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम ने महायुति के भीतर सीटों के बंटवारे और सहयोगी दलों के बीच तालमेल को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। शिंदे ने अपने फैसले को कुछ सीटों पर अपवाद और मैत्रीपूर्ण मुकाबले की स्थिति बताते हुए महायुति के एकजुट रहने का दावा भी किया है।

फडणवीस के ऐलान के दो दिन बाद शिंदे का अलग फैसला

महायुति में मतभेद की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दो दिन पहले ही विधान परिषद चुनाव एक साथ गठबंधन के रूप में लड़ने की बात कही थी। उनके इस बयान से सहयोगी दलों के बीच समन्वय और संयुक्त रणनीति का संदेश दिया गया था। लेकिन अब पुणे शिक्षक सीट पर शिंदे की शिवसेना ने निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को समर्थन देकर अलग राजनीतिक रुख जाहिर किया है। पत्रकारों से बातचीत में एकनाथ शिंदे ने कहा कि महायुति मिलकर चुनाव लड़ रही है, लेकिन पुणे शिक्षक सीट पर उनका समर्थन सचिन सानप को है। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर अपवाद हो सकते हैं और कुछ सीटों पर मैत्रीपूर्ण मुकाबला भी होगा। इसके बावजूद उन्होंने दावा किया कि विधान परिषद की सभी पांचों सीटों पर महायुति के उम्मीदवार जीतेंगे। शिंदे के इस बयान से साफ है कि गठबंधन की एकजुटता का दावा बरकरार रखते हुए भी कुछ सीटों पर सहयोगी दलों की रणनीति अलग-अलग हो सकती है।

पुणे में भाजपा के कौस्तुभ गावडे के सामने सानप की चुनौती

पुणे शिक्षक सीट से भाजपा ने कौस्तुभ गावडे को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर सचिन सानप निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। शिवसेना (शिंदे) ने सानप को समर्थन देने का फैसला किया है, जिससे इस सीट पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। सानप राज्य सरकार में मंत्री उदय सामंत के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) के रूप में काम कर चुके हैं। ऐसे में शिंदे गुट के साथ उनके पुराने संबंधों को भी इस फैसले की अहम वजह माना जा रहा है।

अमरावती में भाजपा के बागी ने बढ़ाई शिंदे गुट की मुश्किलें

अमरावती शिक्षक सीट पर भाजपा के बागी दिलीप कडू ने शिवसेना (शिंदे) के आधिकारिक उम्मीदवार किरण सरनाईक के सामने चुनौती पेश की है। इस बगावत ने महायुति के भीतर उम्मीदवारों को लेकर सहमति की कमी उजागर कर दी है। दिलीप कडू पहले उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निजी सहायक रह चुके हैं। राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, उन्हें राकांपा (अजित) के विधायक संजय खोडके का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में अमरावती में मुकाबला केवल भाजपा के बागी और शिंदे के आधिकारिक उम्मीदवार के बीच नहीं रह गया है, बल्कि गठबंधन के भीतर राजनीतिक समीकरणों की परीक्षा भी बन गया है।

Created On :   16 Oct 2026 9:06 PM IST

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