जिंदगी से खिलवाड़: दूध-पनीर समेत खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों पर लगेगा मकोका, गैर जमानती धाराओं में अपराध दर्ज करने के निर्देश

दूध-पनीर समेत खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों पर लगेगा मकोका, गैर जमानती धाराओं में अपराध दर्ज करने के निर्देश
  • मिलावटखोर सीधे नागरिकों और बच्चों की जिंदगी से कर रहे खिलवाड़
  • गैर जमानती धाराओं में अपराध दर्ज करने के निर्देश

Mumbai News. राज्य में दूध, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सरकार अब सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने निर्देश दिए हैं कि नागरिकों के स्वास्थ्य, खासकर छोटे बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों के खिलाफ संगठित अपराध के तहत कार्रवाई की जाए। उन्होंने ऐसे मामलों में मकोका के तहत कार्रवाई करने और गैर जमानती धाराओं में मामले दर्ज करने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए। सह्याद्री अतिथिगृह में हुई बैठक में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के मंत्री और अधिकारियों के साथ बैठक में शिंदे ने खाद्य पदार्थों में मिलावट के मुद्दे पर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।

मिलावट सिर्फ अपराध नहीं, लोगों की जान से खिलवाड़

एकनाथ शिंदे ने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करना केवल सामान्य अपराध नहीं है, बल्कि यह सीधे नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चे बड़े पैमाने पर दूध का सेवन करते हैं। नकली पनीर, मिलावटी दूध और अन्य मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि मिलावटखोर अपने आर्थिक लाभ के लिए बच्चों और आम नागरिकों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे अपराधियों के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। सरकार को ऐसे अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई कर उनमें कानून का डर पैदा करना होगा।

गैर जमानती मामले दर्ज करने के निर्देश

उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई करते समय गैर जमानती धाराओं में मामला दर्ज करने की कानूनी संभावनाओं का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जाए, ताकि आरोपी कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर आसानी से बच न सकें। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में केवल छापेमारी और गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अदालत में मुकदमे की प्रक्रिया को भी मजबूत बनाया जाना जरूरी है। शिंदे ने निर्देश दिया कि मिलावटखोरों के खिलाफ चलने वाले मामलों में अदालत की प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की कानूनी कमी नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए नामचीन और वरिष्ठ विधि विशेषज्ञों की मदद लेने तथा तत्काल एक विशेष लीगल टीम गठित करने को कहा गया है।

Created On :   11 Aug 2026 9:37 PM IST

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