बड़ा फैसला: सरकारी कामकाज में मराठी का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी, 15 निजी अनुवादकों का पैनल गठित

सरकारी कामकाज में मराठी का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी, 15 निजी अनुवादकों का पैनल गठित
  • गोपनीय दस्तावेज रहेंगे बाहर
  • प्रति शब्द के हिसाब से मिलेगा पारिश्रमिक

Mumbai News. राज्य सरकार ने सरकारी कामकाज में मराठी भाषा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और विभिन्न विभागों में बढ़ते अनुवाद कार्य के बोझ को कम करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मराठी भाषा विभाग ने अंग्रेजी से मराठी और मराठी से अंग्रेजी अनुवाद के लिए 15 निजी अनुवादकों का नया पैनल गठित किया है। यह पैनल तीन साल या सरकार के अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगा। हालांकि महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेजों का अनुवाद निजी अनुवादकों से नहीं कराया जाएगा। ऐसे दस्तावेजों की जिम्मेदारी पहले की तरह भाषा संचालनालय की अनुवाद शाखा के पास ही रहेगी।

भाषा संचालनालय पर बढ़ रहा था काम का बोझ

महाराष्ट्र राजभाषा अधिनियम, 1964 के तहत विधानसभा की कार्यवाही, बजट प्रकाशन, सरकारी विधेयक, केंद्र और राज्य के कानून तथा अधिसूचनाओं जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों का मराठी में अनुवाद करना आवश्यक है। इन दस्तावेजों का अनुवाद वर्तमान में भाषा संचालनालय द्वारा किया जाता है। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रशासनिक विभागों, सरकारी एवं अर्ध-सरकारी कार्यालयों और स्वायत्त संस्थाओं की ओर से सामान्य प्रशासनिक दस्तावेज भी बड़ी संख्या में अनुवाद के लिए भाषा संचालनालय को भेजे जा रहे थे। इनमें विभागीय नीतियां, सरकारी योजनाएं, विशेषज्ञ समितियों की रिपोर्ट और अन्य प्रशासनिक दस्तावेज शामिल हैं। अतिरिक्त अनुवाद कार्य के कारण भाषा संचालनालय के कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ रहा था। इसका असर उनके अनिवार्य और संवेदनशील कार्यों पर पड़ने की आशंका को देखते हुए सरकार ने निजी अनुवादकों का पैनल बनाने का फैसला किया।

प्रति शब्द के हिसाब से मिलेगा पारिश्रमिक

निजी अनुवादकों के भुगतान की दर भी तय की गई है। अनुवाद और टाइपिंग दोनों को मिलाकर पहले 5 हजार शब्दों के लिए 1.50 रुपए प्रति शब्द का भुगतान किया जाएगा। वहीं 5 हजार से अधिक शब्दों के अनुवाद के लिए 1.40 रुपए प्रति शब्द की दर निर्धारित की गई है। अनुवाद पूरा होने के बाद संबंधित विभाग या कार्यालय की जिम्मेदारी होगी कि अनुवादक का पारिश्रमिक जल्द से जल्द अदा किया जाए। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी निजी अनुवादक का काम संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उसकी पैनल में नियुक्ति रद्द की जा सकती है।

Created On :   11 Aug 2026 8:33 PM IST

Tags

Next Story