Mumbai News: जैन समाज को अल्पसंख्यक दर्जे से बाहर आने का समय- लोढ़ा

जैन समाज को अल्पसंख्यक दर्जे से बाहर आने का समय- लोढ़ा
  • मंत्री मंगलप्रभात बोले- जैन धर्म हिंदू संस्कृति का ही हिस्सा है
  • कहा- व्यापक सहमति बनी तो कानूनी प्रक्रिया पर करेंगे विचार

Mumbai News भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा प्रदेश के कौशल्य, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने जैन समाज से अल्पसंख्यक दर्जे को छोड़ने की वकालत की है। लोढ़ा ने कहा कि जैन धर्मियों की पूजा पद्धति अलग है। लेकिन जैन धर्म मूल रूप से हिंदू संस्कृति का ही हिस्सा है। जैन समाज को अब अल्पसंख्यक दर्जे से बाहर आने पर विचार करना चाहिए। यह फैसला जैन समाज के लोगों को करनी है।

पत्रकारों से बातचीत में लोढ़ा ने कहा कि इस मुद्दे पर कई जैन मुनियों और समाज के प्रमुख लोगों से चर्चा हुई है। अल्पसंख्यक दर्जे से बाहर आने के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श जारी है। यदि इस पर व्यापक सहमति बनती है, तो आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पर भी विचार किया जाएगा। लोढ़ा ने कहा कि भारत में विभिन्न जातियों और धर्मों के लिए लोग हैं। इन लोगों की जड़े एक ही सांस्कृतिक विचारधारा से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक केशव बलीराम हेडगेवार के विचार विचार अब भी प्रासंगिक हैं। जिसमें उन्होंने कहा था कि जब तक हिंदू समाज एकजुट नहीं होगा। तब तक सशक्त राष्ट्र निर्माण संभव नहीं है।

लोढ़ा ने कहा कि इतिहास में मुगलों और अंग्रेजों ने फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई थी। इससे समाज में विभाजन पैदा हुआ। लेकिन देश की आजादी के बाद भी कांग्रेस ने इसी नीति को आगे बढ़ाया है। कांग्रेस ने हिंदू समाज को जाति और धर्म के आधार पर बांटने का काम किया। लोढ़ा ने कहा कि कांग्रेस ने जैन और हिंदू समाज के बीच भी राजनीतिक कारणों से दूरी बनाई। लेकिन मुस्लिम समाज में भी अनेक जातियां हैं, लेकिन कांग्रेस ने इस प्रकार का विभाजन नहीं किया बल्कि उन्हें जोड़ने का काम किया है।

जैन समाज की आबादी घटी : लोढ़ा ने कहा कि एक समय में जैन समाज की जनसंख्या 22-23 प्रतिशत थी, जो अब घटकर लगभग 3 प्रतिशत रह गई है। यह एक तरीके से राजनीतिक षड्यंत्र का परिणाम है।


Created On :   4 April 2026 7:18 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story