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राजनीतिक हलकों में चर्चा: परिसीमन विधेयक को समर्थन देने पर सुप्रिया सुले ने कहा, अगर प्रस्ताव मिला तो 24 घंटे के भीतर करेंगे स्पष्ट भूमिका

Mumbai News. संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले चुनावी परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक को लेकर राजनीतिक हलकों में तेज चर्चा के बीच राकांपा (शरद) की कार्याध्यक्ष एवं सांसद सुप्रिया सुले ने बुधवार को स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई अधिकृत बयान जारी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि मीडिया में चल रही खबरें केवल सूत्रों के हवाले से प्रकाशित की गई हैं और पार्टी ने अब तक इस विषय पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया है। मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि परिसीमन विधेयक को लेकर सरकार की ओर से परिसीमन संबंधी कोई लिखित प्रस्ताव उनके पास नहीं आया है। यदि ऐसा कोई प्रस्ताव प्राप्त होता है तो हमारी पार्टी 24 घंटे के भीतर अपनी आधिकारिक भूमिका स्पष्ट करेगी।
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सुले ने कहा कि पार्टी के समर्थन संबंधी खबरों से कार्यकर्ताओं और महाविकास आघाड़ी के सहयोगी दलों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है। इसी कारण उन्होंने पार्टी अध्यक्ष शरद पवार, वरिष्ठ नेता जयंत पाटील, प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे तथा पार्टी के सांसदों और विधायकों से चर्चा करने के बाद सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से इस विषय पर अभी तक कोई अधिकृत वक्तव्य जारी नहीं किया गया है और जब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव प्राप्त नहीं होता, तब तक पार्टी किसी भी प्रकार की अंतिम राय व्यक्त नहीं करेगी। सुले ने यह भी बताया कि उन्होंने बुधवार सुबह महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, कांग्रेस नेता सतेज पाटील तथा शिवसेना (उद्धव) सांसद संजय राऊत से भी इस विषय पर चर्चा की।
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सुले ने परिसीमन विधेयक की पृष्ठभूमि पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि संसद में महिला आरक्षण विधेयक सर्वसम्मति से पारित होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें, शिवसेना (उद्धव) के सांसद अरविंद सावंत और एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी को चर्चा के लिए आमंत्रित किया था। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के कई राज्यों ने जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किए जाने का विरोध जताया था। उनका मानना था कि यदि केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण किया गया तो दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होगा। सुप्रिया सुले ने कहा कि उनकी पार्टी ने भी इस चिंता को उचित माना और सरकार से पूछा कि क्या परिसीमन का कोई वैकल्पिक फार्मूला अपनाया जा सकता है।
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सुले के अनुसार, इस चर्चा के दौरान रिजिजू ने एक वैकल्पिक प्रस्ताव रखा था, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश के सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत वृद्धि करने का सुझाव दिया गया था। सुले ने कहा कि यदि पूरे देश में समान रूप से 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव लाया जाता है तो इसका विरोध करने का कोई कारण नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था जनसंख्या आधारित परिसीमन की तुलना में अधिक संतुलित और न्यायसंगत प्रतीत होती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में इसी प्रकार का संशोधित प्रस्ताव सरकार की ओर से लाया जाता है तो पार्टी इस विषय पर पहले इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ विस्तृत चर्चा करेगी और उसके बाद ही समर्थन या विरोध का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
Created On :   15 July 2026 9:04 PM IST
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