बॉम्बे हाई कोर्ट: पीओपी की गणपति बप्पा की मूर्तियों के बनाने और विसर्जन के कानूनी पहलुओं पर उठाए सवाल

पीओपी की गणपति बप्पा की मूर्तियों के बनाने और विसर्जन के कानूनी पहलुओं पर उठाए सवाल
  • अदालत के सवालों का सीपीसीबी नहीं दे सका जवाब
  • 16 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की गणपति बप्पा की मूर्तियों के बनाने और विसर्जन के कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाए। अदालत ने राज्य सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से पूछा कि पीओपी की मूर्तियों को बनाने और विसर्जन को लेकर कानून पहलू क्या है? सीपीसीबी द्वारा दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए पीओपी की मूर्तियों को क्या बनाया जा रहा है? अदालत ने इन सवालों का जवाब राज्य सरकार और सीपीसीबी नहीं दे सके।

न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ के समक्ष रोहित मनोहर जोशी की ओर से वकील रोनिता भट्टाचार्य की दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मिहिर देसाई ने पीठ को बताया कि राज्य में पीओपी की बनी बड़ी मूर्तियों को प्राकृतिक जल निकायों में विसर्जन किया जाता है। उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध लालबाग के राजा का जिक्र करते हुए बताया कि सार्वजनिक गणपति मंडलों द्वारा 15 से 16 फीट के गणपति बप्पा की मूर्तियों का विसर्जन प्राकृतिक तालाबों और समुद्र में किया जाता है। इससे जल प्रदूषण हो रहा है।

उन्होंने यह भी दलील दी कि पीओपी मूर्तियों से संबंधित सीपीसीबी ने पहले जो गाइडलाइन जारी किया था, उसमें संशोधित गाइडलाइन नई गाइडलाइन जारी किया है। इसमें दावा किया गया कि उसकी ओर से पीओपी की मूर्तियों को प्राकृतिक जलाशयों में विसर्जित के दिशा-निर्देश जारी किए गए सलाह दी हैं। जबकि सीपीसीबी की पहले की गाइडलाइन में प्राकृतिक जलाशयों में पीओपी की मूर्तियों के विसर्जन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया था। इसको लेकर पीठ ने स्पष्ट किया कि हम सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाएंगे। 16 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई रखी गई है।

Created On :   15 July 2026 8:54 PM IST

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