विधान परिषद: महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने मिलेगा कर्ज, पुणे विभाग के अधिकारियों को जबरन छुट्टी पर भेजेंगे, सोशल मीडिया पर यौन उत्पीड़न माना जाएगा अपराध

महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने मिलेगा कर्ज, पुणे विभाग के अधिकारियों को जबरन छुट्टी पर भेजेंगे, सोशल मीडिया पर यौन उत्पीड़न माना जाएगा अपराध
  • उपसभापति के सातारा एसपी निलंबन निर्देश पर ली जाएगी कानूनी राय – सभापति
  • पुणे विभाग के 13 मामले में लिप्त अधिकारियों को जबरन छुट्टी पर भेजा जाएगा
  • सोशल मीडिया पर यौन उत्पीड़न अब माना जाएगा अपराध

Mumbai News. राज्य सरकार के विभिन्न महामंडलों की योजनाओं को एकत्रित करके व्यवसाय के लिए कर्ज सुविधा से जोड़ा जाएगा। विधान परिषद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह आश्वासन दिया। बुधवार को प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक अभिजीत वंजारी ने वसंतराव नाईक विमुक्त जाति व घुमंतू जनजाति विकास महामंडल के माध्यम से सीधे कर्ज योजना शुरू करने को लेकर सवाल पूछा था। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के विभिन्न महामंडलों की योजनाओं को एकत्रित करके लाडली बहन योजना से जोड़ने के लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिए जाएंगे। इससे महिलाओं को छोटे- छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए कर्ज मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि लाडली बहन योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं को प्रति महीने 1500 रुपए दिए जा रहे हैं। लेकिन यह आर्थिक सहायता केवल खर्च के लिए नहीं है बल्कि कई महिलाओं ने इस राशि से लघु उद्योग शुरू किया है

उपसभापति के सातारा एसपी निलंबन निर्देश पर ली जाएगी कानूनी राय – सभापति

विधान परिषद में उपसभापति नीलम गोर्हे के सातारा पुलिस अधीक्षक (एसपी) तुषार दोशी के निलंबित करने के लिए दिए गए निर्देश पर संविधान और कानून विशेषज्ञों की राय ली जाएगी। इसके बाद विधान परिषद के सभापति राम शिंदे सदन में अंतिम फैसला घोषित करेंगे। दरअसल, बुधवार को सभापति ने कहा कि सरकार सातारा जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव में मतदान के समय हुए हंगामे और मंत्रियों के साथ हुई हाथापाई मामले में जांच करके दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करें। सभापति के इस निर्देश पर प्रदेश के पर्यटन मंत्री शुंभराज देसाई और प्रदेश के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने ऐतराज जताया। हंगामे के कारण सभापति ने सदन की कार्यवाही 30 मिनट के लिए स्थगित कर दी। फिर सदन का कामकाज शुरू होने पर सभापति ने कहा कि मैं इस मामले में कानूनी राय लेकर अंतिम फैसला घोषित करूंगा। इससे पहले बीते 24 मार्च को विधान परिषद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि विधानमंडल के पीठासीन अधिकारी सरकार को निर्देश दे सकते हैं। लेकिन पीठासीन अधिकारी का निर्देश राज्य सरकार के लिए ब्रह्मवाक्य नहीं है। सरकार किसी भी मामले में जांच करने के बाद ही संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करेगी। वहीं बीते 23 मार्च को सदन में उपसभापति ने सातारा जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव के समय हुई घटना को लेकर सातारा पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी को निलंबित करने का आदेश दिया था। लेकिन उसी दिन दोपहर के समय सभापति शिंदे ने संबंधित निर्देश पर रोक लगा दी थी।

राजस्व विभाग घोटाला प्रकरण - पुणे विभाग के 13 मामले में लिप्त अधिकारियों को जबरन छुट्टी पर भेजा जाएगा

पुणे विभाग में महाराष्ट्र जमीन राजस्व कानून की धारा -155 समेत अन्य धाराओं का दुरुपयोग कर आदेश पारित करने के अतिगंभीर 13 मामले में लिप्त अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से जबरन छुट्टी पर भेजा जाएगा। विधान परिषद में प्रदेश के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने यह घोषणा की। बावनकुले ने कहा कि पुणे विभाग में 38 हजार 27 मामलों की जांच की गई थी। जिसमें 424 अनियमितता के मामले सामने आए हैं। इसमें अ वर्ग के अतिगंभीर 13 मामले, ब वर्ग के गंभीर 247 मामले और क वर्ग के छोटे 164 मामले का समावेश है। इन सभी मामले में लिप्त अधिकारियों को 15 दिन की नोटिस दी जाएगी। बावनकुले ने कहा कि अतिगंभीर 13 मामले में लिप्त में सभी अधिकारियों के खिलाफ जबरन छुट्टी पर भेजने की की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही बाकी अधिकारियों के खिलाफ भी जल्द ही फौजदारी अथवा निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। बावनकुले ने कहा कि अब राज्य के पुणे विभाग के अलावा बाकी विभागों में छह महीने में जांच की जाएगी। इस जांच के बाद अवैध रूप से कब्जा की गई जमीनों को किसानों को वापस लौटाई जाएगी। इस जांच की रिपोर्ट सदन में भी पेश की जाएगी। बावनकुले ने कहा कि महाराष्ट्र जमीन राजस्व कानून की धारा -155 का दुरुपयोग को रोकने के लिए मानसून अधिवेशन में संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा। इससे पहले बीते 18 मार्च 2026 को विधान परिषद में बावनकुले ने कहा था कि राजस्व विभाग में इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला हुआ है। महाराष्ट्र जमीन राजस्व कानून की धारा -155 का दुरुपयोग करके राजस्व विभाग के अधिकारियों ने किसानों की वर्ग एक की जमीन वर्ग दो में करने, जमीन का मालिकाना हक बदलने, जमीन के क्षेत्र को बढ़ाने व घटाने और दस्तावेजों पर से जमीन मालिक का नाम हटाने का कारनामा किया है।

सोशल मीडिया पर यौन उत्पीड़न अब माना जाएगा अपराध

महाराष्ट्र में सोशल मीडिया, ईमेल और ऑनलाइन मंच पर महिलाओं से यौन उत्पीड़न करने वालों को तीन साल की सजा होगी। इसके लिए बुधवार को विधान परिषद में भारतीय न्याय संहिता (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक 2026 सर्वसम्मति से मंजूर हो गया है। विधान परिषद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह विधेयक पेश किया। यह विधेयक विधानसभा में भी पारित हुआ है। इस विधेयक में दो नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। इससे अब एसिड (तेजाब) हमले की पीड़िताओं के नामों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकेगा। इसके साथ ही फोन, ईमेल, सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मंच, महिलाओं का अश्लील व आपत्तिजनक ऑडियो और वीडियो इलेक्ट्रॉनिक और अन्य माध्यमों पर अपलोड करने अथवा प्रसारित करने को यौन उत्पीड़न अपराध माना जाएगा। इसके लिए आरोपी को तीन साल की कैद और जुर्माना की सजा का प्रावधान है। सदन में मुख्यमंत्री ने कहा कि साल 2020 में महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों में शक्ति विधेयक पारित हुआ था। लेकिन इस विधेयक को राष्ट्रपति ने वापस लौटा दिया था। जुलाई 2024 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) लागू है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में शक्ति विधेयक के दो प्रावधानों को छोड़कर सभी प्रावधानों को शामिल किया गया है। इसलिए अब संबंधित दो प्रावधानों को भारतीय न्याय संहिता (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक में शामिल किया है। इससे अब शक्ति विधेयक के सभी प्रावधानों का समावेश हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विधेयक का कानून में रूपांतरित होने के बाद इसको प्रभावी रूप से दुरुपयोग रोकने राज्य के पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी। इस समिति में एक महिला अफसर को शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में कानून का दुरुपयोग करने वाले चार से पांच प्रतिशत लोग होते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कानून ही न बनाया जाए।

पुरुषों के खिलाफ अत्याचार के खिलाफ हो कार्रवाई का प्रावधान - हेमंत पाटील

शिवसेना (शिंदे) विधायक हेमंत पाटील ने कहा कि इस विधेयक में पुरुषों के खिलाफ होने वाले अत्याचार के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रावधान होना चाहिए। इस पर सभापति राम शिंदे ने कहा कि आपके साथ कोई प्रसंग हुआ होगा तो आप सदन में साझा कर सकते हैं।इस पर पाटील ने कहा कि मैं अखबारों में खबरें पढ़कर यह बात बोल रहा हूं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे मैराथन में दौड़ने वाले एक ग्रुप का हमेशा बोर्ड नजर आता है। जिसमें लिखा होता है पत्नी पीड़ित पति। हमें न्याय दीजिए।

Created On :   25 March 2026 10:08 PM IST

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