तेजी और सटीकता: पेड़ों की गिनती से लेकर ऊंचाई तक बताएगी एआई तकनीक, देश के 70 प्रस्तावों में सीएसआईआर-नीरी का प्रस्ताव अव्वल

पेड़ों की गिनती से लेकर ऊंचाई तक बताएगी एआई तकनीक, देश के 70 प्रस्तावों में सीएसआईआर-नीरी का प्रस्ताव अव्वल
  • 70 प्रस्तावों के बीच नीरी का आइडिया बना अव्वल
  • आकलन के लिए मैदानी सर्वेक्षण की जरूरत नहीं होगी

डिजिटल डेस्क, नागपुर. जैव विविधता केवल पेड़-पौधों और वन्यजीवों का समूह नहीं, बल्कि धरती पर जीवन के संतुलन का आधार है। किसी क्षेत्र में कितने पेड़ हैं, उनकी कौन-कौन सी प्रजातियां मौजूद हैं और उनका विकास किस गति से हो रहा है, इसकी सटीक जानकारी पर्यावरण संरक्षण की दिशा तय करती है। अब यही काम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकें पहले से कहीं अधिक तेजी और सटीकता से कर सकेंगी। खास बात यह है कि इस दिशा में नागपुर के सीएसआईआर-नीरी ने देश को एक नई तकनीकी राह दिखाई है। संस्थान ने पेड़ों की स्वचालित गणना, प्रजातियों की पहचान और उनकी ऊंचाई का अनुमान लगाने वाला अभिनव मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल को हाल ही प्रस्तुत कर राष्ट्रीय स्तर पर पहला पुरस्कार प्राप्त किया है।

70 प्रस्तावों के बीच नीरी का आइडिया बना अव्वल

सीएसआईआर-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-नीरी) नागपुर को राष्ट्रीय एआई-एमएल हैकाथॉन ऑन आरएंडडी-2026 में प्रॉब्लम स्टेटमेंट-2 के अंतर्गत प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका सीधा संबंध जैव विविधता के संरक्षण, वन संसाधनों के वैज्ञानिक आकलन और पर्यावरण के अनुकूल खनन व्यवस्था विकसित करने से है। ‘नेक्स्टजेन एआई फॉर स्मार्ट माइनिंग’ विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय हैकाथॉन में देशभर से कुल 70 प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। इनमें से चयनित प्रस्तावों को अपनी तकनीकी क्षमता और उपयोगिता प्रस्तुत करने का अवसर मिला। सीएसआईआर-नीरी के प्रस्ताव ने अपनी नवीनता और कोयला खनन क्षेत्र में उपयोग की व्यापक संभावनाओं के कारण निर्णायक मंडल ने प्रथम क्रमांक दिया। रायपुर स्थित मेफेयर लेक में आयोजित कोयला एवं लिग्नाइट खदानों के स्टार रेटिंग पुरस्कार समारोह के दौरान प्रदान किया गया। केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने सीएसआईआर-नीरी की ओर से डॉ. आशीष शर्मा, वैज्ञानिक-एफ एवं प्रमुख, आईटी एवं डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर यूनिट तथा सेंटर ऑफ एनवायरनमेंटल इंटेलिजेंस एंड डिजिटल सिस्टम्स और डॉ. कंचन कुमारी, वैज्ञानिक-एफ, सीएसआईआर-नीरी कोलकाता क्षेत्रीय केंद्र को पुरस्कार प्रदान किया।

पर्यावरणीय आकलन को तकनीक से जोड़ने की पहल

हैकाथॉन का आयोजन कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी तथा केंद्रीय कोयला मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय खान योजना एवं डिजाइन संस्थान लिमिटेड (सीएमपीडीआई) द्वारा किया गया था। नीरी का यह प्रस्ताव पारंपरिक वन सर्वेक्षण और पर्यावरणीय आकलन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत एआई, मशीन लर्निंग और जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) का उपयोग कर ऐसा डिजिटल मॉडल विकसित करने की योजना है, जो किसी क्षेत्र में मौजूद पेड़ों की संख्या का स्वतः आकलन कर सकेगा। इतना ही नहीं, यह मॉडल पेड़ों की प्रजातियों की पहचान करने के साथ उनकी ऊंचाई का भी अनुमान लगा सकेगा। इससे बड़े वन क्षेत्रों, खनन परियोजनाओं और उनके आसपास के हरित क्षेत्रों की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से संभव हो सकेगी।

आकलन के लिए मैदानी सर्वेक्षण की जरूरत नहीं होगी

अभी कई स्थानों पर पेड़ों की गणना, उनकी प्रजातियों का वर्गीकरण और ऊंचाई का आकलन करने के लिए व्यापक मैदानी सर्वेक्षण की जरूरत पड़ती है। इसमें समय, मानव संसाधन और खर्च अधिक लगता है। प्रस्तावित तकनीक इन प्रक्रियाओं को डिजिटल और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी। इससे खनन परियोजनाओं के बीच जैव विविधता की निगरानी होगी। आसान कोयला खनन के दौरान जमीन के उपयोग में बदलाव, वन क्षेत्र पर प्रभाव और स्थानीय जैव विविधता की स्थिति का आकलन बेहद जरूरी होता है। ऐसे में नीरी की तकनीक के माध्यम से खनन परियोजनाओं के आसपास मौजूद पेड़ों और वनस्पतियों की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करने, समय के साथ होने वाले बदलावों को समझने और हरित क्षेत्र के विकास का आकलन करने में सहायता मिल सकती है। इसका एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि पर्यावरणीय क्षति की पहचान और हरित क्षेत्र के संरक्षण की योजना अधिक वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर तैयार की जा सकेगी। इससे पर्यावरण-अनुकूल खनन और सतत विकास के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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