महारेरा: जीवन भर की कमाई से खरीदा घर, अब तक नहीं मिला पजेशन - 139 बिल्डरों के खिलाफ 560 मामले लंबित

जीवन भर की कमाई से खरीदा घर, अब तक नहीं मिला पजेशन - 139 बिल्डरों के खिलाफ 560 मामले लंबित
  • सैकड़ों परिवार इसी दर्द से गुजर रहे हैं
  • बैंक से कर्ज लिया, हर महीने ईएमआई भी भर रहे हैं,
  • सपनों के घर की चाबी अब तक नहीं मिली

Nagpur News. जिंदगी भर की कमाई लगाई, बैंक से कर्ज लिया, हर महीने ईएमआई भी भर रहे हैं, लेकिन अपने सपनों के घर की चाबी अब तक नहीं मिली है। नागपुर में सैकड़ों परिवार इसी दर्द से गुजर रहे हैं। महाराष्ट्र रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (महारेरा) में बिल्डरों के सैकड़ों मामले लंबित हैं। इनमें कई शिकायतें वर्षों पुरानी हैं। खरीदारों का आरोप है कि पहले तो सपनों का घर दिखाया गया। पर जब कब्जा देने की बारी आई तो बिल्डरों द्वारा टालमटोल जवाब दिया जा रहा है। इन शिकायतों में शहर के कई बड़े और चर्चित प्रोजेक्ट के नाम भी शामिल हैं।

बड़े प्रोजेक्ट भी विवादों में

महारेरा में नागपुर जिले के 139 बिल्डरों के खिलाफ 560 मामले लंबित हैं। ये मामले मुख्य रूप से घर का कब्जा देने में देरी, निर्माण कार्य अधूरा रहने, अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन और परियोजनाओं में वादा की गई सुविधाएं नहीं मिलने से जुड़े हैं। इन मामलों में शहर के कई बड़े और चर्चित आवासीय प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। कई परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं, जिससे खरीदारों का भरोसा प्रभावित हुआ है।

आर्थिक व मानसिक परेशानी

कई खरीदारों ने घर खरीदने के लिए अपनी वर्षों की बचत खर्च की। कुछ लोगों ने बैंक से बड़ा कर्ज लेकर फ्लैट बुक किया। एक तरफ वे हर महीने ईएमआई भर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें किराए के मकान में भी रहना पड़ रहा है। इससे उन पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। लंबे इंतजार, बढ़ते खर्च और अनिश्चितता के कारण कई परिवार मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। घर का सपना पूरा नहीं होने से खरीदारों में निराशा बढ़ रही है।

बढ़ता दबाव, लंबा इंतजार

महारेरा अधिकारियों के अनुसार लंबित मामलों की नियमित सुनवाई की जा रही है। रियल एस्टेट से जुड़े मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके कारण शिकायतों के निपटारे में भी समय लग रहा है। शिकायत सही पाए जाने पर बिल्डर को घर का कब्जा देने, ब्याज सहित राशि लौटाने या परियोजना पूरी करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। आदेश का पालन नहीं होने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है।

कई कारणों से देरी

अशोक रूघवानी, पूर्व सदस्य, क्रेडाई ने कहा कि सभी मामलों में बिल्डरों की गलती नहीं होती। कई परियोजनाएं सरकारी मंजूरियों में देरी, पर्यावरण स्वीकृति, वित्तीय चुनौतियों और बदलते नियमों के कारण प्रभावित होती हैं। कुछ मामलों में खरीदारों और डेवलपर्स के बीच अनुबंध की शर्तों को लेकर भी विवाद पैदा हो जाते हैं। हालांकि, अधिकांश डेवलपर्स समय पर परियोजनाएं पूरी करने का प्रयास करते हैं।


Created On :   25 Jun 2026 7:47 PM IST

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