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भास्कर लाइव: कोचिंग क्लासेस की हकीकत - लखनऊ हादसे के बाद भी नहीं खुल रही है नींद, अभिभावकों को सता रहा डर बच्चे फंसे - तो बचेंगे कैसे

Nagpur News. लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में आग की घटना ने कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में 15 की मौत की खबर के बाद ने पूरे देश को झकझोर दिया, लेकिन उपराजधानी में हालात इससे अलग नहीं दिखते। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि शहर के कई बड़े कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी केवल कागजों तक सीमित है, जबकि जमीनी हकीकत बेहद खतरनाक और लापरवाह है। शहर के प्रमुख कोचिंग हब सीताबर्डी स्थित ‘विदर्भ साहित्य संघ’ की बिल्डिंग में 5 से 7 कोचिंग क्लासेस संचालित हो रही हैं, जहाँ 7वीं से 12वीं, नीट, जेईई, एमपीएससी और यूपीएससी तक की तैयारी कराई जाती है।
अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है कि उनके बच्चों की कोचिंग में आग लगने, भगदड़ मचने या किसी अन्य आपात स्थिति में सुरक्षित बाहर निकलने की व्यवस्था वास्तव में है भी या नहीं।
विनर इंस्टीट्यूट: ‘अपॉइंटमेंट’ के बिना नहीं दिखाएंगे सुरक्षा
शहर के कोचिंग हब में स्थित विनर इंस्टीट्यूट की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं दिखी। यह कोचिंग एक ही बिल्डिंग के दो फ्लोर पर संचालित हो रही है, नीचे ऑफिस और ऊपर क्लासेस। यहां की सभी क्लासेस पूरी तरह से बंद, साउंडप्रूफ कमरों में संचालित की जाती हैं। ऐसे में जब हमने वास्तविक स्थिति जानने और क्लासरूम देखने की बात की, तो वहां मौजूद फैकल्टी ने साफ शब्दों में मना कर दिया। जिस प्रकार की संरचना यहां नजर आती है, उसमें आग लगने की स्थिति में ये कमरे खुद एक “ट्रैप” बन सकते हैं।
अभी क्लास नहीं दिखा सकते
रजत राठौड़, सेंटर मैनेजर, विनर इंस्टीट्यूट ने कहा कि हमारे यहां सभी क्लासेस फिलहाल चल रही हैं, इसलिए अभी निरीक्षण संभव नहीं है। आप अगली बार अपॉइंटमेंट लेकर आएं, तब हम आपको पूरी व्यवस्था दिखाएंगे। हमने एनएमसी को अग्निशमन का कॉन्ट्रैक्ट दिया है, वे 1-2 साल में एक बार जांच करते हैं। पिछले 6 साल में 2 बार फायर सेफ्टी डेमो हुआ है।
सेकंड फ्लोर पर स्थित ‘आईआईटी पॉइंट’ में 4 क्लासरूम, 1 रीडिंग रूम और 1 ऑफिस है। ऑफिस के पास एक फायर सिलेंडर लगा जरूर है, लेकिन गार्ड को उसे चलाना तक नहीं आता। अंदर के हिस्से में जहां क्लासेस चलती हैं, वहां निर्माण कार्य के कारण सभी फायर सिलेंडर हटाकर रख दिए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह कि फायर एग्जिट के दरवाजों के सामने व्हाइट बोर्ड रखे गए हैं। यानी इमरजेंसी में पहले रास्ता साफ करना पड़ेगा, फिर जान बचाने की कोशिश होगी। मुख्य एग्जिट गेट पर ताला लगा हुआ मिला।
यह सफाई ... काम चल रहा है, इसलिए फायर सिलेंडर को हटाया गया है
मिलिंद उपाध्याय, सेंटर हेड, आईआईटी पॉइंट के कहा कि हमने अग्निशमन के लिए निजी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया है, जो साल में 3-4 बार विजिट करती है। हमारे पास 5-6 फायर सिलेंडर हैं, लेकिन फिलहाल पेंटिंग और कंस्ट्रक्शन के कारण उन्हें हटाया गया है। 1-2 हफ्तों में फिर से लगा दिए जाएंगे। स्टाफ को एक बार ट्रेनिंग दी गई है, हालांकि यहां कोई फायरमैन नहीं है क्योंकि अब तक जरूरत नहीं पड़ी।
‘रेसोनेंस’ में हर जगह स्प्रिंकलर लगे हुए हैं, जो धुआं होने पर पानी छोड़ते हैं। लेकिन यहां सबसे बड़ी खामी यह है कि किसी भी क्लासरूम में इमरजेंसी एग्जिट नहीं है। कुल 10 क्लास रूम हैं। हर कमरे में प्रवेश और निकासी के लिए एक ही दरवाजा हैं।
स्प्रिंकलर हमारी सुरक्षा
पल्लवी कापगते, सेंटर मैनेजर,रेसोनेंस के मुताबिक कई वर्षों पहले हुए सूरत अग्निकांड से सीख लेते हुए हमने सभी क्लासेस में स्प्रिंकलर लगाए हैं, जो धुआं होते ही सक्रिय हो जाते हैं। इस बिल्डिंग में अलग से इमरजेंसी एग्जिट नहीं है, इसलिए हर क्लासरूम में हमने भी सिर्फ एक ही दरवाजा रखा। हम साल में दो बार फायर सेफ्टी चेकिंग करवाते हैं और स्टूडेंट्स व स्टाफ को ट्रेनिंग भी देते हैं।
बाहर पाइपलाइन, अंदर लापरवाही का साम्राज्य
विदर्भ साहित्य संघ की इस बिल्डिंग में बाहर से बड़ी-बड़ी फायर पाइपलाइन नजर आती हैं, लेकिन अंदर कई हिस्सों में बिना फायर इक्विपमेंट के क्लासेस और दुकानें चल रही हैं। यह केवल दिखावे की सुरक्षा है, असल में जोखिम ही जोखिम है।
सीताबर्डी में ही विदर्भ साहित्य संघ सामने स्थित ‘विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन’ की बिल्डिंग बाहर से पूरी तरह फायर सेफ्टी से लैस दिखती है। लेकिन इसी के अंदर पहली मंजिल पर स्थित ‘स्पंदन करियर इंस्टीट्यूट’ में सभी फायर एग्जिट दरवाजे बंद पाए गए। बिल्डिंग द्वारा लगाए गए फायर सिलेंडर भी हटाए गए हैं। सबसे गंभीर बात यह कि बिल्डिंग के नए एग्जिट गेट पर दुकानों का अतिक्रमण है, जिससे आपातकाल में फायर ब्रिगेड का प्रवेश भी मुश्किल हो सकता है।
बिल्डिंग में है पूरी व्यवस्था
योगेश शर्मा, जनरल मैनेजर, विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन बताया कि हमने बिल्डिंग के लिए एएमसी कॉन्ट्रैक्ट लिया है और फायर ब्रिगेड की एंट्री के लिए बड़े गेट बनाए हैं। अंदर और बाहर दोनों तरफ सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। 3-4 गार्ड भी तैनात हैं ताकि किसी भी इमरजेंसी में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
Created On :   25 Jun 2026 8:56 PM IST









