अनशन का 13वां दिन: अमृता के न्योते पर जरांगे का जवाब - भाई जब आंदोलन के मैदान में हो तो ध्यान नहीं भटकाते, भाऊबीज पर खाने के लिए जरूर आऊंगा

अमृता के न्योते पर जरांगे का जवाब - भाई जब आंदोलन के मैदान में हो तो ध्यान नहीं भटकाते, भाऊबीज पर खाने के लिए जरूर आऊंगा
  • 13वें दिन भी अनशन जारी, मुंबई कूच का ऐलान तय
  • 12 सितंबर की बैठक में पेश करेंगे आंदोलन की अगली रणनीति

डिजिटल डेस्क, अंतरवाली सराटी। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील का अनशन गुरुवार को 13वें दिन भी जारी रहा। लगातार अन्नत्याग के चलते उनकी तबीयत बिगड़ रही है। बुधवार को उन्हें सलाइन भी चढ़ाई गई थी। इसी बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी। उन्होंने जरांगे पाटील को अपना ‘भाई’ बताते हुए उन्हें घर पर भोजन के लिए आमंत्रित किया था। इस निमंत्रण पर जरांगे ने कहा, ‘‘ताई ने बुलाया है, तो जेवायला पण जाऊंगा। लेकिन भाई जब मैदान में हो, आंदोलन कर रहा हो, तब बहन को उसे खाने के लिए नहीं बुलाना चाहिए। संकट के समय भाई का ध्यान भटकाने वाला कोई कदम बहन को नहीं उठाना चाहिए।’’ जरांगे ने आगे कहा कि वह भाऊबीज के मौके पर अमृता फडणवीस के घर जरूर जाएंगे। वह साड़ी-चोली भी लेकर जाएंगे।

मुंबई जाना तय है

जरांगे पाटील ने साफ किया कि सरकार के शिष्टमंडल के आने का वह इंतजार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुंबई जाना तय है और 12 सितंबर को अंतरवाली सराटी में होने वाली राज्यव्यापी बैठक के बाद आंदोलन की तारीख और आगे की दिशा घोषित की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार मराठा समाज की मांगों को लेकर किस तरह काम कर रही है, इसे भी देखा जाएगा। खासकर कुणबी प्रमाण-पत्रों के लिए लगाए जा रहे शिविरों पर नजर रखने की बात उन्होंने कही। जरांगे ने सवाल उठाया कि क्या आंदोलन शुरू होने के कारण ही ये शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

‘जैसी प्रवृत्ति होती है, वैसी ही भाषा इस्तेमाल करनी पड़ती है’

पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर अपनी हालिया तीखी टिप्पणियों को लेकर भी जरांगे ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि पहले वह तीन वर्षों तक शिंदे के साथ अच्छी भाषा में बात करते रहे, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। जरांगे ने कहा, ‘‘जैसी प्रवृत्ति होती है, वैसी ही भाषा इस्तेमाल करनी पड़ती है।’’ उन्होंने दावा किया कि मंत्री संजय शिरसाट की वजह से उनके और शिंदे के संबंध खराब हुए हैं। उनका कहना था कि शिंदे के लोगों को उनसे यह पूछना चाहिए कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि जरांगे को उनके खिलाफ बोलना पड़ रहा है।

दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से मराठा समाज की मांगों पर तेजी से काम किए जाने का दावा किया जा रहा है। मंत्री उदय सामंत और विधायक प्रसाद लाड ने कहा कि सरकार मराठा समाज को उसके न्यायसंगत अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

Created On :   10 Sept 2026 8:37 PM IST

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