समय में बदलाव: मौसम के साथ बदला जंगल सफारी का समय, सुबह आधा घंटा देरी से शुरु और शाम आधा घंटा पहले बंद

मौसम के साथ बदला जंगल सफारी का समय, सुबह आधा घंटा देरी से शुरु और शाम आधा घंटा पहले बंद
  • उमरेड-पवनी-करांडला और पेंच व्याघ्र प्रकल्प में नया समय लागू
  • ठंड के चलते सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में बदलाव को देखते हुए लिया निर्णय

डिजिटल डेस्क, नागपुर। मौसम में बदलाव के साथ ही नागपुर के आसपास स्थित जंगलों में सफारी का समय भी बदल दिया गया है। वन विभाग ने उमरेड-पवनी-करांडला अभयारण्य और पेंच व्याघ्र प्रकल्प में सफारी का नया समय घोषित किया है। अब पर्यटकों को नए समय के अनुसार ही अपनी सफारी की बुकिंग करनी होगी। नए समय के तहत सुबह की सफारी अब 6:00 बजे के बजाय 6:30 बजे से शुरू होकर 10:30 बजे तक चलेगी। वहीं, शाम की सफारी दोपहर 2:00 बजे से शुरू होकर शाम 6:00 बजे तक चलेगी। पहले शाम की सफारी 2:30 बजे से शुरू होकर 6:30 बजे तक चलती थी।

सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में बदलाव

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ठंड का मौसम शुरू होने के साथ सूर्योदय देरी से और सूर्यास्त जल्दी होने लगा है। शाम को अंधेरा जल्दी होने के कारण सफारी का समय आधा घंटा कम किया गया है। यह बदलाव पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यजीवों की सुविधा को ध्यान में रखकर किया गया है। उल्लेखनीय है कि बारिश के बाद अक्टूबर महीने से इन जंगलों में सफारी शुरू हुई थी। फरवरी से अक्टूबर के अंत तक दिन लंबे होने के कारण सुबह की सफारी आधा घंटा पहले शुरू होती थी, जबकि शाम की सफारी आधा घंटा अधिक समय तक चलती थी। अब सर्दियों में दिन छोटे होने के कारण समय में बदलाव किया गया है। वन विभाग मौसम के अनुसार सफारी का समय बदलता रहता है। गर्मियों में फिर से समय में बदलाव किया जाएगा।

बाघों के साथ कई वन्यजीवों का दीदार

नागपुर के आसपास स्थित दोनों जंगल पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। उमरेड-पवनी-करांडला अभयारण्य में बाघ, तेंदुआ, स्लॉथ बियर, विभिन्न प्रजातियों के हिरण और कई तरह के पक्षी देखने को मिलते हैं। वहीं, पेंच व्याघ्र प्रकल्प 'द जंगल बुक' की पृष्ठभूमि के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां बाघों के अलावा तेंदुए, जंगली कुत्ते, गौर और 300 से अधिक प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नए समय से पर्यटकों को वन्यजीवों को देखने का बेहतर अवसर मिलेगा। ठंड के मौसम में जानवर सुबह देर से और शाम को जल्दी पानी के स्रोतों के आसपास या खुले मैदानों में दिखाई देते हैं। विभाग ने पर्यटकों से सफारी के दौरान नियमों का पालन करने और जंगल में शोर नहीं मचाने की अपील की है।

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