अपहरण और हत्या के मामले: अपहरण के बाद हत्या, पुराने जख्म आज भी हरे - सवाल है कि खौफनाक सिलसिला कब तक

अपहरण के बाद हत्या, पुराने जख्म आज भी हरे - सवाल है कि खौफनाक सिलसिला कब तक
  • वर्ष 2014 में युग चांडक हत्याकांड
  • 2017 में सुजल वासनिक हत्याकांड
  • वर्ष 2025 में जीत सोनेकर

Nagpur News. शहर में मासूम बच्चों के अपहरण और हत्या की इसके पहले भी हुईं घटनाएं कई सवाल छोड़ चुकी हैं। बीते कुछ वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां बच्चे अचानक लापता हुए और बाद में उनकी लाशें सुनसान जगहों पर मिलीं। इन घटनाओं के पीछे कभी फिरौती, कभी आपसी रंजिश तो कभी दरिंदगी भरे इरादे सामने आए।

वर्ष 2014 में युग चांडक हत्याकांड

साल 2014 का युग चांडक हत्याकांड आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। महज 8 साल का युग, 1 सितंबर 2014 को स्कूल से घर लौट रहा था, तभी घर के सामने से ही दो लोगों ने उसका अपहरण कर लिया गया। बेटे के घर न लौटने पर डॉ. मुकेश चांडक ने लकड़गंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पूरे शहर की नाकाबंदी कर पुलिस ने रात भर युग को तलाश किया। 2 सितंबर को युग का शव नागपुर से 25 किलोमीटर दूर लोणखैरी गांव के पास एक सुनसान स्थान पर सीमेंट पाइप के अंदर मिला। उसकी गला दबाकर हत्या की गई थी। जांच में खुलासा हुआ कि इस मासूम की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उसके पिता के क्लिनिक में काम कर चुके एक पूर्व कर्मचारी ने की थी।

2017 में सुजल वासनिक हत्याकांड

युग चांडक की मौत के महज तीन वर्ष बाद यानी वर्ष 2017 में 9 वर्षीय सुजल वासनिक का मामला सामने आया, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। सुजल के लापता होने के बाद अपहरणकर्ताओं ने 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा भयावह थी। पुलिस ने जाल बिछाकर आरोपियों को पकड़ा, पर तब तक मासूम की हत्या हो चुकी थी। हैरानी की बात यह रही कि इस साजिश में उसके ही पड़ोसी शामिल थे, जिन्होंने पैसों के लालच में यह खौफनाक कदम उठाया।

वर्ष 2025 में जीत सोनेकर

खापरखेड़ा में सितंबर 2025 में 11 वर्षीय बच्चे जीत सोनेकर के अपहरण और हत्या की एक दु:खद घटना सामने आई थी। पड़ोसियों ने जमीन के पैसे के लालच में बच्चे का अपहरण किया और फिरौती मांगने से पहले ही गला दबाकर हत्या कर दी और शव को झाड़ियों में फेंक दिया था। खापरखेड़ा पुलिस ने इस मामले में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था लेकिन इन घटनाओं ने बार-बार यही साबित किया है कि अपराधियों के लिए मासूमियत मायने नहीं रखती। हर बार एक परिवार बिखरता है, अपनों को खोने का दर्द जिंदगी भर पीछा नहीं छोड़ता। सवाल अब भी वही है-आखिर कब थमेगा यह खौफनाक सिलसिला?

Created On :   5 April 2026 7:25 PM IST

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