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इंद्रधनुष ओपन माइक: सुरों में सजी शाम, नए और अनुभवी कलाकारों को मिला अपने हिस्से का आसमान, 28 से अधिक कलाकारों ने बांधा समां

Nagpur News. इस भागदौड़ भरी जिंदगी में जब मन थकने लगता है, तब संगीत ही वह सहारा बनता है जो सुकून की छांव देता है। कुछ ऐसा ही सुकून भरा माहौल रविवार को गांधीबाग उद्यान में देखने को मिला, जहां ‘इंद्रधनुष’ ओपन माइक के मंच ने नए और अनुभवी कलाकारों को अपनी प्रतिभा बिखेरने का अवसर दिया।
इस नि:शुल्क मासिक आयोजन में शहर के 28 से अधिक कलाकारों ने हिस्सा लिया और अपनी सुरमयी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि यहां पुराने सुनहरे गीतों से लेकर नए दौर के नग्मों तक का खूबसूरत संगम देखने को मिला। हर प्रस्तुति के साथ दर्शकों की तालियों की गूंज माहौल को और भी जीवंत बनाती रही।
गायक विजय शेणमारे ने कहा कि आज के तनावपूर्ण समय में ऐसे मंच न केवल कलाकारों को पहचान देते हैं, बल्कि लोगों को मानसिक राहत भी प्रदान करते हैं। संगीत के माध्यम से लोगों के चेहरे पर मुस्कान लौट आती है, यही इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता है।
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने “आने से उसके आए बहार”, “सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं”, “पुकारता चला हूं मैं”, “अभी ना जाओ छोड़कर”, “ओ साथी रे” और “तेरे मेरे सपने” जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति दी, जिन पर श्रोता देर तक झूमते रहे।
इस रंगारंग शाम में राजश्री मसमारे, हेमलता उखारे, शीला शिरपुरकर, अनिता तायडे, कांचन लोखंडे, बबन सोनकुसरे, सुरेश मोरस्कर, वासुदेव मौंदेकर, वृंदा पालेवार, दिलीप पराते, चंदु निपाने, विमल पौनीकर, अशोक हिंगणेकर और एस.सी. बोरकर सहित कई कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया।
उद्यान में हल्की हवा के साथ जैसे संगीत की सरगम घुल रही थी। रोजमर्रा की भागदौड़, तनाव और शोर से दूर, यहां हर कोई कुछ पल सुकून के तलाश में आया था और ‘इंद्रधनुष’ ओपन माइक ने उन पलों को यादगार बना दिया। ‘इंद्रधनुष’ का यह मंच सच में अपने नाम को सार्थक करता नजर आया—जहां हर रंग, हर सुर और हर प्रतिभा को खुलकर चमकने का मौका मिला।
Created On :   26 April 2026 8:00 PM IST












