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उदासीनता: मेडिकल में हेलीपैड निर्माण के दो प्रस्ताव अधर में अटके, घायल जवानों को तत्काल उपचार देने बनी थी योजना

Nagpur News. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में घायल जवानों को तत्काल उपचार मिल सके, इसलिए दो बार प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन सरकार की उदासीनता के चलते यह योजना साकार नहीं हो पायी। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल (मेडिकल) में हेलीपैड बनाने की योजना थी। इसका पहला प्रस्ताव साल 2013 में तत्कालीन डॉ. दीप्ति डोणगांवकर के कार्यकाल में और दूसरा प्रस्ताव 2016 में तत्कालीन अधिष्ठाता डॉ. अभिमन्यु निसवाडे के कार्यकाल में भेजा गया था। लेकिन दोनों ही प्रस्ताव की अनदेखी की गई है।
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‘गोल्डन ऑवर’ में उपचार देने की थी संकल्पना
सूत्रों के अनुसार गडचिरोली और छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में अक्सर नक्सलियों द्वारा जवानों पर हमले होते रहते हैं। इन हमलों में घायल जवानों को तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है, इसलिए उन्हें सड़कमार्ग की बजाय हवाईमार्ग से तत्काल उपचार सुविधा उपलब्ध हो सकती है। इस संकल्पना के साथ नागपुर के मेडिकल में हेलीपैड बनाने की योजना तैयार की गई थी। इस योजना के दो बार प्रस्ताव बनाकर भेजे गए थे। हमलों में घायल जवानों को समय पर इलाज के लिए नागपुर लाने में भारी दिक्कतें आती हैं। कई बार एंबुलेंस से लंबी दूरी तय करने में देरी हो जाती है। जिससे ‘गोल्डन ऑवर’ में उपचार देना मुश्किल हो जाता है। इसे गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन स्वयं राज्य सरकार ने मेडिकल परिसर में हेलीपैड बनाने के निर्देश दिए थे, ताकि आपात स्थिति में हेलीकॉप्टर सीधे अस्पताल में उतर सके। यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया। अब जरूरत पड़ने पर नागपुर एयरपोर्ट का ही उपयोग करना पड़ रहा है। वहां से मेडिकल तक आने में यातायात व अन्य समस्याओं के चलते विलंब होता है।
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ट्रॉमा के बाद भी पूरी नहीं हुई योजना
मेडिकल के ट्रॉमा केयर सेंटर को अत्याधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण करने के दौरान 2016 में हेलीपैड का प्रस्ताव रखा गया था, ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों के गंभीर मरीजों को तुरंत उपचार मिल सके, लेकिन यह प्रस्ताव भी अधूरा रह गया। ट्रॉमा सेंटर के शुरू होने के बाद उम्मीद थी कि गडचिरोली जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के मरीजों को इसका बड़ा लाभ मिलेगा, लेकिन हेलीपैड नहीं बनने से यह सुविधा मिल पाना नामुमकिन हो चुका है।
Created On :   26 April 2026 7:30 PM IST












