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Nagpur News: विद्यार्थियों पर महंगी पढ़ाई का यह कैसा दबाव, कोचिंग का बढ़ा कारोबार शिक्षा काे बनाया बाजारू

Nagpur News. शहर में इन दिनों 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं। बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों के सामने एक और महत्वपूर्ण चुनौती प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी है। 10वीं और 12वीं के बाद इंजीनियरिंग में प्रवेश लेने के इच्छुक विद्यार्थी जेईई की तैयारी करते हैं, जबकि मेडिकल क्षेत्र में जाने वाले विद्यार्थी नीट की तैयारी पर ध्यान देते हैं। कई बार कॉलेजों में 11वीं में प्रवेश लेते समय विद्यार्थियों और अभिभावकों को यह आश्वासन दिया जाता है कि संस्थान में जेईई या नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अतिरिक्त कक्षाएं या विशेष मार्गदर्शन दिया जाएगा, लेकिन व्यवहार में अक्सर ऐसा नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप विद्यार्थियों को निजी कोचिंग संस्थानों का सहारा लेना पड़ता है। आर्थिक रूप से सक्षम अभिभावक अपने बच्चों को महंगे कोचिंग संस्थानों में दाखिला दिला देते हैं, वहीं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन जाती है।
छात्रों पर भारी दबाव
11वीं-12वीं साइंस के विद्यार्थियों के लिए कोचिंग का चलन तेजी से बढ़ा है। इन कक्षाओं के लिए कोचिंग की वार्षिक फीस लगभग 40 हजार से 1 लाख रुपये तक पहुंच रही है। वहीं जेईई और नीट की तैयारी के लिए पूरे कोर्स का पैकेज 70 हजार से 2.5 लाख रुपये तक बताया जाता है।
महाविद्यालयों में ही मिले प्रतियोगी परीक्षाओं का मार्गदर्शन
डॉ. जयंत जांभुलकर, पूर्व मंडल सदस्य, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षा मंडल के मुताबिक 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को महाविद्यालयों में ही जेईई और नीट जैसे कोर्स की आधारभूत तैयारी कराई जानी चाहिए। दिवाली अवकाश, ग्रीष्मकालीन अवकाश जैसी छुट्टियों में इन परीक्षाओं के लिए क्रैश कोर्स आयोजित किए जा सकते हैं। इसके लिए सरकार को पहल करनी चाहिए, जिससे गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को भी समान अवसर मिल सके।
शिक्षा का बाजारीकरण खतरनाक
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कोचिंग संस्थानों का बढ़ता व्यवसाय शिक्षा के बाजारीकरण का संकेत है। कई छात्र स्कूल-कॉलेज से अधिक समय कोचिंग में बिताने लगे हैं और अभिभावकों को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। महंगी कोचिंग के कारण कई प्रतिभाशाली छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से पीछे हट जाते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकारी पुस्तकालय, डिजिटल प्लेटफॉर्म और छात्रवृत्ति आधारित कोचिंग योजनाओं को बढ़ावा देकर सभी वर्गों के विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
Created On :   16 March 2026 8:32 PM IST












