नागपुर मनपा: दमकलों के लिए हाइड्रेंट नहीं, कैसे बुझेगी आग - बैठक में कई मुद्दों पर विपक्षी नगरसेवकों को मिला सत्तापक्ष का समर्थन

दमकलों के लिए हाइड्रेंट नहीं, कैसे बुझेगी आग - बैठक में कई मुद्दों पर विपक्षी नगरसेवकों को मिला सत्तापक्ष का समर्थन
  • पानी के लिए दूर तक लगानी पड़ती है दौड़
  • विरोध के बावजूद सभापतियों को मिलेंगे वाहन
  • हंगामे के बीच हुई स्थायी समिति की बैठक
  • अधिकारियों का दावा- सभी संसाधन उपलब्ध हैं

Nagpur News. गर्मी का मौसम है। आग लगने की घटनाएं कहीं भी, कभी भी हो सकती हैं, लेकिन शहर के अग्निशमन विभाग की हालत यह है कि दमकल वाहनों को पानी भरने की सुविधा के लिए हाइड्रेंट ही नहीं है। वाहनों को पानी भरने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता है। ऐसे में यदि कोई घटना होती है, तो उस पर कितना जल्दी काबू पाया जा सकता है, यह सोचनीय है। हालांकि मनपा प्रशासन अग्निशमन विभाग को पर्याप्त संसाधन और सुविधा देने का दावा कर रहा है, दूसरी तरफ जलप्रदाय विभाग से किसी भी फायर स्टेशन में हाइड्रेंट नहीं दिया गया है।

अधिकारियों में हुआ विवाद

शुक्रवार को स्थायी समिति की बैठक में 55 लाख 32 हजार रुपए की लागत से 33 नए फायर हाइड्रेंट लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव पर जलप्रदाय विभाग और अग्निशमन दल के अधिकारियों में बहस भी हो गई। जलप्रदाय विभाग की अधीक्षक अभियंता श्वेता बनर्जी बैठक में निशाने पर रहीं। शहर में अग्निशमन वाहनों को आग बुझाने के लिए नजदीकी इलाकों में हाइड्रेंट लगाने के मुद्दे पर जलप्रदाय विभाग बचाव मुद्रा में नजर आया। इस मामले में कांग्रेस के नगरसेवक वसीम खान, अभिजीत झा, अभिषेक शंभरकर के तीखे सवाल से अधीक्षक अभियंता बनर्जी परेशान नजर आईं।

97 हाइड्रेंट की आवश्यकता

मनपा के अग्निशमन दल से शहर के सघन आबादी वाले और व्यावसायिक इलाकों में आग से सुरक्षा और तत्काल आपदा प्रबंधन के लिए हाइड्रेंट को लगाने की जरूरत बताई गई है। ऐसे में अग्निशमन विभाग द्वारा साल 2015 में 119 हाइड्रेंट की शहर में आवश्यकता बताई गई थी। इसमें से 97 हाइड्रेंट को ओसीडब्ल्यू ने मंजूरी दी थी, लेकिन निविदा प्रक्रिया में कोई भी ठेका एजेंसी से हाइड्रेंट को तैयार करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई गई है। ऐसे में अब नए सिरे से 33 हाइड्रेंट लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

पेयजल ही देना होगा

शहर में फायर हाइड्रेंट को पेयजल आपूर्ति की जा रही है। ऐसे में विकल्प के रूप में हाइड्रेंट के लिए सार्वजनिक कुंए और तालाबों का पानी इस्तेमाल करने पर भी जलप्रदाय विभाग के अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं। इस सवाल पर अधिकारियों का तर्क था कि कम दबाव से हाइड्रेंट से दमकल वाहनों में पर्याप्त रूप में पानी नहीं पहुंच पाएगा। इसके चलते पेयजल को ही हाइड्रेंट के लिए देना होगा।

विरोध के बावजूद सभापतियों को मिलेंगे वाहन, हंगामे के बीच हुई स्थायी समिति की बैठक

स्थायी समिति की बैठक में सत्ताधारी और विपक्षी नगरसेवकों के बीच विषय सभापतियों को वाहन, 33 स्थानों पर हाइड्रेंट लगाने में देरी और भूसंपादन सलाहकार के कार्यकाल में बढ़ोतरी पर हंगामेदार बहस हुई। हालांकि सभी प्रस्ताव पारित कर लिए गए, लेकिन करीब 1 घंटे तक बैठक में विपक्षी नगरसेवकों के साथ सत्तापक्ष के नगरसेवक भी समर्थन में नजर आए।

गैरकानूनी है वाहन की मंजूरी

स्थायी समिति की बैठक में विषय समिति सभापतियों को वाहन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव का कांग्रेस नगरसेवक अभिजीत झा द्वारा कड़ा विरोध जताने के बाद भी मंजूर किया गया। बैठक में अभिजीत झा ने कहा कि महाराष्ट्र महानगर पालिका अधिनियम के तहत विषय समिति सभापतियों को वाहन देने का वैधानिक प्रावधान नहीं है। 2 जुलाई 2021 को स्थायी समिति ने स्वास्थ्य एवं स्थापत्य समितियों के सभापति को वाहन देने का प्रस्ताव वैधानिक नियम नहीं होने के आधार पर खारिज कर दिया था। ऐसे में अब बगैर ठोस कारण और नियम के 10 समितियों के सभापति को वाहन देने से मनपा पर आर्थिक बोझ के साथ ही गलत परंपरा बन जाएगी। 17 सितंबर 2025 को राज्य सरकार से भी आवश्यक, उचित और व्यावहारिक कारण होने पर वाहन की खरीद अथवा किराए पर लेने का निर्देश दिया गया है। तीनों नियमों की अनदेखी कर प्रति वाहन करीब 28 हजार रुपए प्रतिमाह के अनुपात में 10 वाहनों पर सालाना खर्च 60 लाख रुपए होगा। अगले पांच वर्ष में करीब 5 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ कमजोर आर्थिक स्थिति वाली मनपा पर पड़ेगा।

नियमों की अनदेखी का आरोप

कांग्रेस के नगरसेवक वसीम खान ने प्रमोद गावंडे को साल 2021 में निवासी उपयोग में आरक्षित 1622 वर्ग फीट जगह पर व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए बहुमंजिला इमारत की अनुमति दी है। इस मामले में तत्कालीन नगर रचना विभाग के अधिकारी प्रमोद गावंडे पर नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है। इस मामले में विधायक प्रवीण दटके और विकास ठाकरे ने विधानसभा में मुद्दा भी उठाया है। मनपा में प्रमोद गांवडे को 3 अक्टूबर 2024 को भूसंपादन सलाहकार के रूप में ठेका पद्धति पर लिया गया है। कई मर्तबा कार्यकाल बढ़ोतरी के बाद एक बार फिर से 6 माह के लिए 31 अक्टूबर तक कार्यकाल को बढ़ाने का प्रस्ताव स्थायी समिति में रखा गया। इस प्रस्ताव को स्थाई समिति ने विरोध के साथ मंजूर किया है।

Created On :   11 April 2026 6:29 PM IST

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