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मनपा परिवहन विभाग: चलो ऐप को किए गए भुगतान की होगी पूरी जांच, परिवहन सभापति मंगला खेकड़े ने दी जानकारी

Nagpur News. मनपा के परिवहन विभाग द्वारा आपली बस के संचालन के लिए निजी एजेंसी चलो ऐप मोबिलिटी के साथ किए गए अनुबंध और कंपनी को किए गए अतिरिक्त भुगतान की पूरी जांच कराई जाएगी। यह जानकारी परिवहन सभापति मंगला खेकड़े ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान दी। उन्होंने कहा कि शहर में बसों और यात्रियों की संख्या बढ़ने के कारण कंपनी को अतिरिक्त भुगतान किए जाने की संभावना बनी है। हालांकि, इस संबंध में अधिकारियों से औपचारिक अनुमति लेने और आवश्यक दस्तावेजों के बारे में पूछे जाने पर सभापति स्पष्ट जवाब नहीं दे सकीं।
मंगला खेकड़े ने बताया कि परिवहन विभाग ने 11 मार्च 2024 को चलो मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड को कार्यादेश जारी किया था। इसके बाद 11 जुलाई 2024 को विभाग और कंपनी के बीच पांच वर्ष के लिए 216.30 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया। इस अनुबंध के तहत कंपनी को सलाहकार सेवा के लिए 60 प्रतिशत हिस्से के रूप में 113.40 करोड़ रुपये तथा तीन गुणात्मक मूल्यांकन के आधार पर 40 प्रतिशत हिस्से के रूप में 102.90 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है।
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उन्होंने बताया कि प्रारंभिक अनुबंध के अनुसार न्यूनतम वेतन श्रेणी के तहत 479 रुपये प्रतिदिन की दर से 1,000 कंडक्टर उपलब्ध कराने का प्रावधान था। लेकिन संचालन शुरू होने तक यह दर बढ़कर 590 रुपये हो गई। इसके साथ ही बसों की संख्या भी 500 से बढ़कर लगभग 725 हो गई है। वहीं कंडक्टरों की संख्या बढ़कर करीब 1,800 हो गई है और उन्हें वर्तमान में 732 रुपये प्रतिदिन की दर से न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है। इसके चलते कंपनी को प्रतिमाह 1.88 करोड़ रुपये के बजाय 2.79 करोड़ रुपये तथा जीएसटी सहित लगभग 3.26 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा रहा है।
लीपापोती का प्रयास
परिवहन विभाग के ऑपरेशन प्रबंधक राजीव घाटोले भी उपस्थित थे। उन्होंने चलो ऐप को अतिरिक्त भुगतान का कारण बसों और यात्रियों की संख्या में वृद्धि बताया। हालांकि, ई-बसों के संचालन के लिए राज्य और केंद्र सरकार से समय-सीमा बढ़ने के बावजूद प्रशासक से आवश्यक मंजूरी लेने संबंधी सवालों का वे संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।
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स्थिति यह रही कि शहर में प्रतिदिन संचालित बसों, यात्रियों की वास्तविक संख्या तथा नियुक्त कंडक्टरों के संबंध में भी अधिकारियों के पास स्पष्ट और अद्यतन आंकड़े उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि प्रस्तावित विशेष लेखा परीक्षण (स्पेशल ऑडिट) में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
Created On :   14 July 2026 9:24 PM IST











