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बॉम्बे हाई कोर्ट: जांच अधिकारी का कर्तव्य केवल पत्राचार करना नहीं, बल्कि समय पर प्रभावी और कानूनी जांच करना है

- फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने का मामला
- अदालत से जांच में लापरवाही बरतने वाले जांच अधिकारी को नहीं मिली राहत
- अदालत ने जांच अधिकारी के खिलाफ 4 सितंबर 2025 को नासिक डिविजनल पुलिस शिकायत प्राधिकरण द्वारा दिए कार्रवाई के आदेश पर रोक लगाने से किया इनकार
Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने के मामले की जांच में पुलिस के जांच अधिकारी के लापरवाही बरतने को लेकर अपने फैसले में कहा कि जांच अधिकारी का कर्तव्य केवल पत्राचार करना नहीं, बल्कि समय पर प्रभावी और कानूनी जांच करना है। जांच में अनावश्यक देरी और निष्क्रियता गंभीर कर्तव्यहीनता मानी जाएगी, विशेषकर जब मामला सरकारी नौकरी में फर्जी दस्तावेजों के उपयोग जैसा गंभीर हो।
न्यायमूर्ति मिलिंद एन. जाधव की एकल पीठ ने दीपक प्रकाश धोके की याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को अपराध का प्रभावी ढंग से अन्वेषण करना, आरोपियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कदम उठाना और जांच को आगे बढ़ाना चाहिए था। केवल पत्र भेजना पर्याप्त नहीं था। रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि लगभग 8 से 9 महीनों तक उन्होंने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे उनकी लापरवाही प्रथम दृष्टया सिद्ध होती है।
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पीठ ने पाया कि आरोपी निसार अहमद आरोपी मुख्तार अहमद ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी सेवा (मालेगांव महानगर पालिका के शिक्षा मंडल के जरिए महानगर पालिका में अध्यापक के तौर पर भर्ती) प्राप्त की थी और बाद में उन्हें प्रमोशन देकर प्रधानाध्यापक (हेड मास्टर) बनाया गया। नासिक के जिला अस्पताल ने पुष्टि की कि ऐसा कोई प्रमाणपत्र जारी ही नहीं किया गया था। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों और जांच अधिकारी दीपक प्रकाश धोके ने समय पर उचित कार्रवाई नहीं की।
पीठ ने कहा कि यह सार्वजनिक सेवा और कानून के शासन पर गंभीर प्रभाव डालने वाला मामला है। डिविजनल पुलिस शिकायत प्राधिकरण का आदेश तथ्यों और रिकॉर्ड पर आधारित, उचित एवं तर्कसंगत है। यदि ऐसे मामलों में जांच अधिकारियों की लापरवाही को नजरअंदाज किया जाए, तो समाज में गलत संदेश जाएगा। इसलिए इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया गया।
क्या है पूरा मामला
याचिकाकर्ता दीपक प्रकाश धोके (जांच अधिकारी) ने 4 सितंबर 2025 को नासिक के डिविजनल पुलिस शिकायत प्राधिकरण के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ जांच में लापरवाही के लिए कार्रवाई का प्रस्ताव किया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने विभिन्न अधिकारियों को पत्र और नोटिस भेजकर जानकारी मांगी थी। उनसे पहले के जांच अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए उनके साथ भी समान व्यवहार होना चाहिए।
Created On :   13 July 2026 9:02 PM IST
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