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विधानसभा चुनाव में 3239 उम्मीदवार, 1504 उम्मीदवार मैदान से हटे

विधानसभा चुनाव में 3239 उम्मीदवार, 1504 उम्मीदवार मैदान से हटे

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अब कुल 3239 उम्मीदवार मैदान में हैं। सोमवार को नामांकन वापसी के आखिरी दिन 4743 उम्मीदवारों में से 1504 उम्मीदवारों ने मैदान छोड़ दिया। मंत्रालय में प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी दिलीप शिंदे ने यह जानकारी दी। विधानसभा चुनाव के लिए कुल 5543 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। नामांकन पत्रों की छानबीन के बाद 800 उम्मीदवारों का नामांकन अवैध पाया गया था जबकि 4743 उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए थे। इनमें से 1504 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। जिसके बाद अब 3239 उम्मीदवार चुनाव मैदान में बचे हैं। विधानसभा चुनाव में रत्नागिरी की चिपलूण सीट पर सबसे कम 3 और नांदेड़ दक्षिण सीट पर सबसे अधिक 38 उम्मीदवार चुनाव में हैं। शिंदे ने बताया कि जिन सीटों पर 15 से अधिक उम्मीदवार हैं वहां पर मतदान के लिए दो ईवीएम मशीनों की जरूरत पड़ेगी। विधानसभा चुनाव के लिए 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे जबकि चुनाव परिणाम 24 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। इससे पहले प्रदेश में साल 2014 के विधानसभा चुनाव में 4119 उम्मीदवार उतरे थे।

सबसे कम उम्मीदवार वाली सीटें 

प्रदेश में रत्नागिरी की चिपलूण सीट पर सबसे कम 3 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि नंदूरबार की शहादा में 4, अहमदनगर की अकोले सीट पर 4, मुंबई की माहिम सीट पर 4, बोरिवली में 4 और बांद्रा पश्चिम सीट पर 4 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। 

सबसे अधिक उम्मीदवार वाली सीटें 

राज्य में नांदेड़ दक्षिण सीट पर सबसे अधिक 38 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि औरंगाबाद पूर्व पर 34 और जालना सीट पर 32 उम्मीदवार उम्मीदवार उतरे हैं। 

भोकर में 135 ने पर्चा भरा था अब बचे केवल 7 

नांदेड़ की भोकर सीट पर 135 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था पर आश्चर्यजनक रूप से अब यहां सिर्फ 7 उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में बचे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इसलिए इस सीट पर पूरे प्रदेश की निगाहें हैं। यहां नामांकन पत्रों की छानबीन में 44 उम्मीदवारों के नामांकन रद्द हो गए थे। जिसके बाद इस सीट पर 91 प्रत्याशी बचे थे लेकिन सोमवार को नामांकन वापसी के अंतिम दिन 91 में से 84 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। अब भोकर सीट पर केवल 7 उम्मीदवार मैदान में हैं। 

जिलेवार सीट और उम्मीदवार

नंदूरबार की 4 सीटों पर 26 उम्मीदवार 
धुलिया की 5 सीटों पर 38 उम्मीदवार
जलगांव की 11 सीटों पर 100 उम्मीदवार 
बुलढाणा की 7 सीटों पर 59 उम्मीदवार
अकोला की 5 सीटों पर 68 उम्मीदवार 
वाशिम की 3 सीटों पर 44 उम्मीदवार 
अमरावती की 8 सीटों पर 109 उम्मीदवार 
वर्धा की 4 सीटों पर 47 उम्मीदवार 
नागपुर की 12 सीटों पर 146 उम्मीदवार, 
भंडारा की 3 सीट पर 42 उम्मीदवार, 
गोदिया की 4 सीटों पर 47 उम्मीदवार 
गडचिरोली की 4 सीटों पर 38 उम्मीदवार
चंद्रपुर की 6 सीटों पर 71 उम्मीदवार 
यवतमाल की 7 सीटों पर 88 उम्मीदवार 
नांदेड़ की 9 सीटों पर 135 उम्मीदवार 
हिंगोली की 3 सीटों पर 33 उम्मीदवार 
परभणी की 4 सीटों पर 53 उम्मीदवार
जालना की 5 सीटों पर 79 उम्मीदवार 
औरंबागाद की 9 सीटों पर 128 उम्मीदवार 
नाशिक की 15 सीटों पर 148 उम्मीदवार 
पालघर की 6 सीटों पर 53 उम्मीदवार 
ठाणे की 18 सीटों पर 214 उम्मीदवार
मुंबई उपनगर की 26 सीटों पर 244 उम्मीदवार
मुंबई शहर की 10 सीटों पर 89 उम्मीदवार 
रायगड की 7 सीटों पर 78 उम्मीदवार 
पुणे की 21 सीटों पर 246 उम्मीदवार
अहमदनगर की 12 सीटों पर 116 उम्मीदवार 
बीड़ की 6 सीटों पर 155 उम्मीदवार 
लातूर की 6 सीटों पर 79 उम्मीदवार 
उस्मानाबाद की 4 सीटों पर 50 उम्मीदवार 
सोलापुर की 12 सीटों पर 154 उम्मीदवार
सातारा की 8 सीटों पर 73 उम्मीदवार 
रत्नागिरी की 5 सीटों पर 32 उम्मीदवार 
सिंधुदुर्ग की 3 सीटों पर 23 उम्मीदवार 
कोल्हापुर की 10 सीटों पर 106 उम्मीदवार 
सांगली की 8 सीटों पर 68 उम्मीदवार 
 

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राजस्थान में सियासी घमासान फिर तेज, मंत्रिमंडल विस्तार पर गहलोत-पायलट आमने सामने


डिजिटल डेस्क, जयपुर। पंजाब में जब से कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर कांग्रेस प्रदेश कमेटी का अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को बनाया है, तब से राजस्थान में पायलट गुट का भी जोश हाई है। अब पायलट गुट के दबाव के कारण मंत्रिमंडल पर नए सिरे से चर्चा हो रही है। मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच तलवारें खिंच गईं हैं,  दोनों गुट आमने-सामने आ गये हैं। फिलहाल विस्तार की कोई तारीख तय नहीं है लेकिन यह माना जा रहा है कि अगले महीने इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है। अभी गहलोत कैबिनेट में 9 पद खाली हैं। अगर कांग्रेस 'एक व्यक्ति एक पद' के फॉर्मूले को मानती है तो शिक्षा राज्य मंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा को अपना पद छोड़ना होगा। वैसे गोविंद डोटासरा ने यह कहकर कि 'मैं दो-चार दिन का मेहमान हूं' अपने जाने के संकेत दे दिये हैं। एक पद विधानसभा उपाध्यक्ष का भी खाली है।   
 
आंकड़ों के हिसाब से गहलोत कैबिनेट में कुल 11 पद खाली हैं। लेकिन इन सभी पदों पर फिलहाल मंत्री नहीं बनाए जाएंगे। अंदेशा है कि विस्तार के बाद भी नाराजगी रह सकती है। उन हालातों का सामना करने के लिए फिलहाल कैबिनेट में दो या तीन पद खाली ही रखे जाएंगे। 
मत्रिमंडल विस्तार पर अगर पूरी तरह गहलोत हावी रहे तो 2 या 3 ही मंत्रियों की छुट्टी होगी। पर ये फैसला लेना भी गहलोत के लिए आसान नहीं होगा,  क्योंकि उन्हें उन लोगों के बीच फैसला लेना होगा जिन लोगों ने मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया था। 
अगर विस्तार पर पायलट गुट का दबाव रहा तो फिर 6 से 7 मंत्री आउट होना तय माने जा रहे हैं। और, अगर आलाकमान ने प्रदर्शन को आधार माना तो कई मंत्रियों को जाना पड़ सकता है, लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है। हालांकि, अजय माकन का 28-29 को जयपुर दौरा है। जिसमें वह जयपुर आकर हर विधायक से बात करेंगे। उसके बाद यह तय होगा कि कौन रहेगा और कौन जाएगा?   

इन मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा


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इनकी हो सकती मंत्रिमंडल में एंट्री- पायलट गुट के 3 और गहलोत गुट के 7 चहेरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 

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डोटासरा के बयान से उनके जाने के संकेत

प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाऐं जारी हैं उस बीच शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर छा गया है। इसमें उनको राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जारोली से कहते सुना जा सकता हैं- ‘मेरे पास एक घंटे फाइल नहीं रुकेगी, आप सोमवार को आ जाओ। एक मिनट में निकाल दूंगा, जितनी कहोगे। मैं दो-पांच दिन का ही मेहमान हूं। मुझसे जो कराना है करा लो।’ इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली ने हाथ जोड़कर कहा कि मैं आता हूं सर। इस वायरल वीडियो के बाद से ये कयास तेज हो गए हैं कि मंत्रिमंडल से डोटासरा की रवानगी तय है। 
 

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ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया से आए हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के अलावा जर्मन की महिला जिमनास्टिक्स ने फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपने मन के कपड़े पहनने की आजादी को अपने खेल के जरिए प्रमोट करने का फैसला किया है, जिससे उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness

जर्मनी की महिला जिमनास्ट रविवार को हुए टोक्यो ओलंपिक मुकाबले में फुल बॉडी सूट पहने नजर आई। खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूट को फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी को बढ़ावा देने साथ ही महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है जिसे पहनकर महिला खिलाड़ी आरामदायक महसूस कर सकें।

Germany's gymnasts wear body-covering unitards, rejecting 'sexualization' of sport - CNN 
 

जर्मनी की 4 जिमनास्ट जिनके नाम है पॉलीन शेफर-बेट्ज, सारा वॉस, एलिजाबेथ सेट्ज और किम बुई लाल और सफेद रंग के इस यूनिटार्ड सूट में नजर आई जो लियोटार्ड और लेगिंग्स को मिलाकर बनाया गया था। खिलाड़ी इसी को पहन कर मैदान में उतरीं थी। 

German gymnastics team, tired of 'sexualisation,' wears unitards | Deccan Herald
 

जर्मनी की टीम ने अपनी ट्रेनिंग में भी इसी तरह के कपड़े पहने हुए थे और अपने कई इंटरव्यूज में खिलाड़ियों ने कहा था कि इस साल फाइनल कॉम्पटीशन में भी वो फ्रीडम ऑफ चॉइस को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगी। खिलाड़ी सारा वॉस ने द जापान टाइम्स को बताया था यूनिटार्ड को फाइनल करने से पहले उन्होंने इस पर चर्चा भी की थी। सारा ने ये भी कहा कि जैसे जैसे एक महिला बड़ी होती जाती है, वैसे ही उसे अपने शरीर के साथ सहज होने में काफी मुश्किल होती हैं। हम ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसमें हम अच्छे भी दिखे और सहज भी महसूस करें। चाहे वो कोई लॉन्ग यूनिटार्ड हो या फिर शॉर्ट। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness
 

सारा ने यह भी बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में भी इसी तरह का फुल बॉडी सूट पहना था और इसका उद्देश्य सेक्सुलाइजेशन को कम करना है। हम लोगों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहते थे जिससे वो हमे फॉलो कर सकें। जर्मन के खिलाड़ियों की लोग काफी प्रशंसा भी कर रहे हैं। 


ओलंपिक प्रतियोगिताओं में जिमनास्ट महिलाओं को फुल या हाफ बाजू के पारंपरिक लियोटार्ड ही पहनना होता है साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुल कपड़े पहनने की अनुमति तो है लेकिन किसी भी महिला जिमनास्ट ने इस तरह के कपड़े नहीं पहने थे। यह पहली बार था जब जर्मन खिलाड़ी महिलाओं ने इस तरह के कपड़े पहने थे। 
बीते कुछ सालों में खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं के शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों को देख महिला खिलाड़ियो की चिंता बढ़ती जा रही है अब एथलीटों की सुरक्षा को देखते हुए नए सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं।