दैनिक भास्कर हिंदी: देश के 35.7 % बच्चे कुपोषण के शिकार, महाराष्ट्र के 36 % अल्प-वजनी   

December 21st, 2018

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। खानपान में लगातार हो रहे सुधार और सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बावजूद देश के 35.7 प्रतिशत बच्चे (पांच वर्ष से कम आयु के) अल्प-वजनी और 38 प्रतिशत बच्चे ठिगने हैं। हालांकि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की रिपोर्ट मानें तो चरण-3 के मुकाबले चरण-4 के दौरान इसके बेहतर नतीजे देखने को मिले हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मुताबिक एनएफएचएस-3 (वर्ष 2005-06) की रिपोर्ट में पांच वर्ष से कम आयु वर्ग के 42.5 प्रतिशत बच्चे कम वजन के और 48 प्रतिशत बच्चे ठिगने थे। लेकिन एनएफएचएस -4 (2015-16) की रिपोर्ट में स्थिति थोड़ी सुधरी और यह आंकड़ा बदलकर क्रमश: 35.7 प्रतिशत और 38.4 प्रतिशत हो गया है। एनएफएचएस -4 की रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 38.3 प्रतिशत बच्चे कम वजन के हैं तो 41.2 प्रतिशत ठिगने हैं।

महाराष्ट्र की 23.5 प्रतिशत महिलाएं हैं कुपोषित
केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ वीरेन्द्र कुमार ने बताया कि महाराष्ट्र भले ही औद्योगिक रूप से विकसित प्रदेशों में शुमार हो, परंतु बाल पोषण के मामले में इसकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। एनएफएचएस -4 की रिपोर्ट बताती है कि महाराष्ट्र के 36 प्रतिशत बच्चे (पांच वर्ष से कम आयु वाले) अल्प-वजनी हैं, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा है। इसी आयु वर्ग के महाराष्ट्र के 34.4 प्रतिशत बच्चे ठिगने हैं। महिला कुपोषण में भी महाराष्ट्र की स्थिति राष्ट्रीय औसत से खराब है। रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र की 23.5 प्रतिशत महिलाएं (15-49 वर्ष) कुपोषित हैं यानी उनके शरीर में ऊर्जा की भारी कमी है। राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो महिला कुपोषण का प्रतिशत 22.9 है। चिकित्सकों की मानें तो कुपोषित माता कुपोषित बच्चे को ही जन्म देती है। 

झारखंड की हालत है सबसे दयनीय
बच्चों में कुपोषण के मामले में सबसे खराब स्थिति झारखंड की है। यहां के 47.8 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। बिहार के 43.9 प्रतिशत बच्चे कुपोषण की श्रेणी में हैं तो तीसरे नंबर पर मध्यप्रदेश है, जहां के 42.8 प्रतिशत बच्चे अल्प-वजनी और 42 प्रतिशत बच्चे ठिगने हैं। उत्तरप्रदेश के 40 प्रतिशत बच्चे कम वजन के हैं तो गुजरात में यह प्रतिशत 39.3 है। बाल कुपोषण के मामले में उत्तर-पूर्व के राज्यों की स्थिति सराहनीय है। मिजोरम के बच्चों में कुपोषण की दर महज 12 प्रतिशत है तो मणिपुर में 13.8 प्रतिशत है। 

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