दैनिक भास्कर हिंदी: 54 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की फसल बर्बाद, सबसे अधिक कपास और सोयाबीन का नुकसान

November 15th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। जिले में 54 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसल बर्बाद होने के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सबसे ज्यादा नुकसान कपास व सोयाबीन का हुआ है। जिला प्रशासन की तरफ से गुरुवार को इस संबंध में सरकार को रिपाेर्ट भेज दी गई। जिला प्रशासन ने 46 करोड़ 85 लाख रुपए के मुआवजे की मांग सरकार से की है। 

प्राथमिक अनुमान गलत साबित
जिले में 9 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसल बर्बाद होने का प्राथमिक अनुमान गलत साबित हुआ। प्रशासन की तरफ से किए गए पंचनामे में 54 हजार हेक्टेयर में फसल बर्बाद होने की जानकारी सामने आई है। 5 हजार से ज्यादा हेक्टेयर में संतरे का नुकसान भी इसमें शामिल है। जिला प्रशासन गुरुवार को अपनी रिपोर्ट सरकार को भेजते हुए 46 करोड़ 85 लाख के मुआवजे की मांग भी की है। जिले में कुल 1 लाख 19 हजार 385 किसान प्रभावित हुए हैं, जिनका 33 फीसदी से ज्यादा नुकसान हुआ है। जिले में कपास, सोयाबीन, धान व तुअर की फसल ली जाती है। इसके अलावा बागायती में संतरा व मोसंबी का उत्पादन होता है। जिले में सबसे ज्यादा कपास व उसके बाद सोयाबीन का नुकसान हुआ है। 

33 फीसदी से कम वाले किसान बुरे फंसे 
जिले में 33 फीसदी से कम नुकसानवाले किसानों को मुआवजा सूची में शामिल नहीं किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने सरकार को जो रिपोर्ट भेजी, उसमें 33 फीसदी से कम नुकसानवाले किसान शामिल नहीं है। 33 प्रतिशत से कम नुकसानवाले किसानों को मुआवजा मिलना भी मुश्किल है। सरकार को जो रिपोर्ट भेजी गई, उसमें  33 फीसदी से कम नुकसान वाले किसान नहीं है। 

सफेद सोना बह गया बारिश में 
जिले में सबसे ज्यादा नुकसान कपास का हुआ है। बारिश के कारण कपास के बोंड खुल नहीं सके। कपास किसानों की नकदी फसल है। इसे विदर्भ का सफेद सोना भी कहा जाता है। नागपुरी संतरे की देश दुनिया में जबर्दस्त मांग है। जिले में 5 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में करोड़ों का संतरा बर्बाद हो गया। 

सरकार को रिपोर्ट भेज दी 
जिले में 54 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसल बर्बाद हुई है। इसमें कपास, सोयाबीन, धान व तुअर के अलावा संतरा भी शामिल है। सरकार को रिपोर्ट भेज दी गई है। रिपोर्ट में 33 प्रतिशत से ज्यादा नुकसानवाले शामिल हैं। 1 लाख 19 हजार 385 किसान प्रभावित हुए हैं आैर 46 करोड़ 85 लाख का मुआवजे की मांग की गई है।  -रवींद्र ठाकरे, जिलाधीश नागपुर. 
 

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