comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

चक्रवाती तूफान प्रभावित रत्नागिरी को 75 करोड़ और सिंधुदुर्ग को 25 करोड़ रुपए तत्काल मिलेंगे- सीएम उद्धव

चक्रवाती तूफान प्रभावित रत्नागिरी को 75 करोड़ और सिंधुदुर्ग को 25 करोड़ रुपए तत्काल मिलेंगे- सीएम उद्धव

डिजिटल डेस्क, मुंबई। राज्य सरकार की ओर से चक्रवाती तूफान निसर्ग से प्रभावित रत्नागिरी जिले के लिए 75 करोड़ रुपए और सिंधुदुर्ग जिले को 25 करोड़ रुपए तत्काल दिए जाएंगे। रविवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दोनों जिलों के लिए मदद राशि की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह पैकेज नहीं तत्काल मदद है। मुख्यमंत्री ने चक्रवात प्रभावित रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, ठाणे और पालघर जिले की स्थिति की समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदा में नुकसान भरपाई का पुराने मापदंड को बदलने की जरूरत है। उन्होंने प्रशासन को संशोधित नए मापदंड तैयार करके जल्द जानकारी देने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ठाणे और पालघर जिले में तुलना में कम नुकसान हुआ है पर दोनों जिलों की समीक्षा के बाद मदद का फैसला लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मदद कार्य करते समय प्राथमिकता तय किया जाए। लोगों के विश्वास में लेकर मदद काम पूरा होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोंकण में भूमिगत बिजली के तार बिछाने पर विचार किया जाए। इससे पहले मुख्यमंत्री ने रायगड जिले के लिए 100 करोड़ रुपए की घोषणा की थी। 

सिंधुदुर्ग के पालकमंत्री उदय सामंत ने कहा कि रायगड की तुलना में सिंधुदुर्ग का नुकसान कम हुआ, लेकिन सिंधुदुर्ग को कम से कम 25 से 30 करोड़ रुपए मदद की जरूरत है। रत्नागिरी के पालकमंत्री अनिल परब ने कहा कि जिले के मंडणगड, दापोली में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। वहीं नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि चक्रवात से ज्यादा नुकसान होने के कारण नागरिक प्रति परिवार नकद मदद राशि देने की मांग कर रहे हैं। पालघर के पालक मंत्री दादाजी भुसे ने जिले में हुए नुकसान की जानकारी दी। इस बैठक में आम के बाग, सुपारी, नारियल के पेड़ के हुए नुकसान पर चर्चा हुई। 

नुकसान भरपाई की अग्रिम राशि दी जाएगी- मेहता

मुख्य सचिव अजोय मेहता ने कहा कि चक्रवाती तूफान से हुए नुकसान का पंचनामा जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि नुकसान भरपाई की अग्रिम राशि जिलाधिकारियों को दी जाएगी। इससे आपदा प्रभावित नागरिकों को थोड़ी राहत मिल सकेगी। 
 

कमेंट करें
V2P5R
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।