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पटरी पर लौटी मुंबई की लाइफ लाइन, जरूरी सेवा से जुड़े कर्मचारी ही कर सकेंगे सफर, बैंककर्मी नाराज 

पटरी पर लौटी मुंबई की लाइफ लाइन, जरूरी सेवा से जुड़े कर्मचारी ही कर सकेंगे सफर, बैंककर्मी नाराज 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मायानगरी की लाइफ लाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनें एक बार फिर पटरी पर लौट आईं है। 86 दिन बाद सोमवार सुबह साढ़े 5 बजे पहली लोकल चली। हालांकि फिलहाल केवल सरकारी कर्मचारियों और निजी अस्पतालों से जुड़े स्वास्थ्य कर्मियों को ही इन ट्रेनों में सफर की इजाजत दी गई है। फिलहाल मध्य रेलवे ने 200 लोकल ट्रेनें जबकि पश्चिम रेलवे ने 162 लोकल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। हर रोज सुबह 5:30 बजे से रात 11:30 बजे तक यह ट्रेन करीब 15 मिनट के अंतराल पर चलेंगी और इनमें 12 सौ की बजाय सिर्फ सात सौ यात्रियों को सफर करने की इजाजत होगी। फिलहाल सिर्फ फास्ट ट्रेनें चलाई जाएंगी, जो छोटे स्टेशनों पर नहीं रुकेंगी। पहचान पत्र देखकर ही लोगों को स्टेशनों पर आने की इजाजत दी जाएगी। टिकट खरीदने के लिए कुछ खिड़कियां खुलेंगी, लेकिन पहचान साबित करने के बाद ही टिकट दिया जाएगा। इसके अलावा जिन लोगों के रेलवे पास लॉकडाउन के चलते इस्तेमाल नहीं हो पाए, उनकी अवधि बढ़ाने का फैसला किया गया है। कर्मचारियों को क्यूआर कोड आधारित ई-पास जारी किए जाएंगे। इस बात की भी जांच की जाएगी कि जो कर्मचारी ड्यूटी के लिए आ रहा है, वह कंटेंमेंट जोन में रहने वाला ना हो। रेलवे स्टेशन क्षेत्र में 150 मीटर तक कोई फेरीवाला और कोई पार्किंग क्षेत्र नहीं होगा। प्रत्येक स्टेशन के बाहर इमरजेंसी सेवा के रूप में एम्बुलेंस तैनात होगी। इन ट्रेनों से अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े करीब सवा लाख कर्मचारी सफर कर सकेंगे। हालांकि पहले दिन यात्रियों की संख्या कम रही।

किसे यात्रा की इजाजत

राज्य  सरकार ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) में स्थित सभी महानगर पालिकाओं के कर्मचारियों को यात्रा की इजाजत दी है। मंत्रालय के सभी कर्मचारी राज्य सरकार के सभी कर्मचारी पुलिस होमगार्ड सफाई कर्मचारी आदि लोकल ट्रेनों से यात्रा कर सकेंगे इसके अलावा निजी क्षेत्र के स्वास्थ्यकर्मियों को भी लोकल में सफर करने की इजाजत होगी।

किसे इजाजत नहीं

आम लोगों के अलावा फिलहाल बैंक कर्मचारियों को भी लोकल ट्रेनों में सफर की इजाजत नहीं है। अभी पत्रकारों और मीडिया संस्थानों में काम करने वाले लोगों को भी लोकल से यात्रा की अनुमति नहीं है।

किस मार्ग पर कितनी ट्रेनें

मध्य रेलवे की कुल 200 लोकल चलाई जाएंगी। लोकल 100 अप रूट और 100 डाउन रूट पर चलेंगी। सीएसएमटी से कसारा, कर्जत, कल्याण, ठाणे स्टेशनों के बीच 130 लोकल चलेंगी। इनमें से 65 सीएसएमटी की ओर जाएंगी और 65 वापस लौटेंगी। सीएसएमटी से पनवेल के बीच भी 70 सेवाएं चलेंगी।

पश्चिम रेलवे कुल 162 ट्रेनें चलाएगी। इनमें 73 ट्रेनें डहानु -विरार से चर्चगेट की ओर चलेंगी, जबकि इतनी ही ट्रेनें वापस लौटेंगी। विरार और डहानु रोड स्टेशनों के बीच 16 ट्रेनें चलेंगी। चर्चगेट और बोरीवली के बीच कुछ फास्ट लोकल चलेंगी। बोरीवली के बाद वे अगले स्टेशन पर धीमी गति से चलेंगी।


लोकल ट्रेनों में बैंक कर्मियों को यात्रा की अनुमती ने मिलने से कर्मचारी संगठन नाराज

वहीं ऑल इंडिया सेंट्रल बैंक एम्प्लॉई कांग्रेस (एआईसीबीईसी) और राष्ट्रीय सेंट्रल बैंक ऑफिसर कांग्रेस (आरसीबीओसी) ने बैंक कर्मियों के साथ किए जा रहे सौतेले व्यवहार को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। इसके साथ ही बैंक कर्मियों व अधिकारियों को जरुरी सेवाओं से जुड़े लोगों की भांति मुंबई कि लोकल ट्रेन से सफर करने की इजाजत न मिलने का विरोध किया है। सोमवार से आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए लोकल ट्रेनों की शुरुआत की गई हैं पर इसमें बैंककर्मियो की सेवा को जरुरी सेवा न मानकर उन्हें ट्रेन में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। इसे एआईसीबीईसी के महासचिव सुभाष सावंत व आरसीबीओसी के मुख्य महासचिव जे एस राव ने आपत्तिजनक बताया है। इन दोनों संगठनों ने सरकार से मांग की है कि वह इस पूरे मामले को देखे और संबंधित प्राधिकरण को लेकर जरुरी दिशा निर्देश जारी करे। उन्होंने कहा कि बैंककर्मी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी होते है उनके साथ अपमानजनक बर्ताव बंद किया जाना चाहिए और जो परिवहन की सुविधाएं कोरोना योद्धाओं को उपलब्ध कराई गई है, बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों को भी उन सुविधाओं का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए। जरुरी सेवा में आने वाले बैंककर्मियों को इस्तेमाल करो और फेकनेवाली वस्तु न समझा जाए। बिना इनके अर्थव्यवस्था में तेजी नहीं आ सकती हैं। दोनों संगठन की ओर से जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक कोरोना के शुरुआती दौर में जब सरकार के कई विभाग काम नहीं कर रहे थे उस दौरान भी बैंककर्मियों ने लोगों तक अपनी सेवाएं पहुचाई। 


 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।